दक्षिण पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्था वियतनाम में तीसरी तिमाही के दौरान विनिर्माण और बुनियादी ढांचा निवेश के दम पर तेज आर्थिक सुधार दर्ज किया गया है। महामारी के बाद से अब तक के सबसे मजबूत प्रदर्शन के तहत देश की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 10.0% तक पहुंच गई है। इस तेज विस्तार ने जहां वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों से वियतनाम के बढ़ते औद्योगिक आधार को रेखांकित किया है, वहीं दूसरी तरफ मांग आधारित दबाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने नीति निर्माताओं के सामने सतर्कता बरतने की चुनौती भी खड़ी कर दी है।
औद्योगिक विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण से मिला सहारा
वियतनाम की इस तेज आर्थिक प्रगति की मुख्य वजह चीन से इतर अपनी आपूर्ति श्रृंखला को फैलाने की वैश्विक कंपनियों की रणनीति रही है। कंपनियों द्वारा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे निरंतर निवेश ने वियतनाम के विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, उद्योग और निर्माण क्षेत्र में सालाना आधार पर 12.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके समानांतर सेवा क्षेत्र ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 9.5% का विस्तार हासिल किया।
विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर दूसरी तिमाही के 10.8% से बढ़कर तीसरी तिमाही में 11.4% पर पहुंच गई। इस क्षेत्र ने कुल हेडलाइन वृद्धि में अकेले 2.8 प्रतिशत अंक का योगदान दिया है। इसके अलावा, विदेशी पूंजी के निरंतर प्रवाह के चलते निर्माण क्षेत्र में जबर्दस्त उछाल देखने को मिला। विदेशी निवेशकों की मजबूत रुचि के कारण निर्माण गतिविधियों में दूसरी तिमाही के 8.9% के मुकाबले तीसरी तिमाही में 12.2% की वृद्धि दर्ज की गई। यह पूरी गति मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय और कारखानों के विस्तार पर टिकी रही है।
उत्पादन और निवेश प्रवाह पर सांख्यिकी कार्यालय का रुख
अर्थव्यवस्था के आने वाले महीनों के रुझान पर नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस की प्रमुख गुयेन थू ओन्ह ने स्थिति स्पष्ट की है। गुयेन थू ओन्ह ने कहा, “जैसे-जैसे पूंजी उत्पादन, निवेश और खपत में प्रवाहित हो रही है, इसका प्रभाव वर्ष के अंतिम महीनों में अधिक स्पष्ट हो सकता है।”
हालांकि तीसरी तिमाही में 10.0% की तीव्र वृद्धि के बावजूद सरकार के पूरे साल के 10% के महत्वाकांक्षी वार्षिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए चौथी तिमाही में असाधारण रूप से मजबूत आर्थिक गतिविधियों की दरकार होगी। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यद्यपि विकास की गति चौथी तिमाही में भी जारी रहने की संभावना है, लेकिन यह गति अपने साथ मांग जनित मूल्य दबावों को भी बढ़ा सकती है।
महंगाई का बढ़ता दबाव और कच्चे तेल के जोखिम
तेज आर्थिक रफ्तार के बीच मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सितंबर महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई बढ़कर 5.1% पर पहुंच गया, जो औसतन 4.5% के निर्धारित लक्ष्य से काफी ऊपर है। महंगाई में इस उछाल के पीछे घरेलू स्तर पर तेज ऋण विस्तार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती लागत को प्रमुख कारक माना जा रहा है।
विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे मुद्रास्फीति में और अधिक बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। वर्तमान में जिंस बाजार में क्रूड ऑयल (CL=F) का भाव 89.79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 89.44 डॉलर के मुकाबले 0.39% की बढ़त दर्शाता है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो इसका आरएसआई(14) 45 के स्तर पर है, जबकि 20-दिवसीय ईएमए 92.24 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.13 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.97 डॉलर पर स्थित है, जो दीर्घकालिक स्तर पर मजबूत रुझान का संकेत देता है। पिवट बिंदु 90.03 डॉलर के आसपास है, जहां पहला प्रतिरोध 90.74 डॉलर और समर्थन 89.09 डॉलर पर आंका गया है। वैश्विक बाजार में ऊर्जा के इस ऊंचे स्तर ने आयात निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए आयातित महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है।
स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के सामने सीमित विकल्प
ऊंची मुद्रास्फीति और बैंकिंग प्रणाली में तीव्र ऋण उठाव के कारण देश के केंद्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (एसबीवी) के पास अतिरिक्त मौद्रिक राहत देने की गुंजाइश सीमित हो गई है। जब अर्थव्यवस्था पहले से ही क्षमता विस्तार और मांग के दबाव से गुजर रही हो, तब अतिरिक्त तरलता प्रदान करने से मूल्य वृद्धि के और अनियंत्रित होने का खतरा रहता है। बैंक को अब आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बनाए रखने और उपभोक्ता कीमतों को स्थिर रखने के बीच नाजुक संतुलन साधना पड़ रहा है।
वैश्विक वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया और बॉन्ड यील्ड का असर
वियतनाम के इन व्यापक आर्थिक आंकड़ों के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड की घट-बढ़ का प्रभाव देखने को मिला है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर को निचली कीमतों पर लिवाली का सहारा मिला है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा, जबकि बाजार की नजरें फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी के मिनट्स पर टिकी हैं।
वहीं जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान 158.50 के स्तर के पास डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर पर दिखा। कीमती धातुओं में भी दबाव देखा गया, जहां सोने की कीमतें मंगलवार की बढ़त गंवाकर 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक ऊपर आ गईं। डिजिटल परिसंपत्तियों में बिटकॉइन 87,200 डॉलर के स्तर पर आपूर्ति दबाव के बाद सुस्ती में रहा, वहीं इथेरियम 2,600 डॉलर के समर्थन स्तर की ओर और रिपल 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के पास फिसल गया। दूसरी तरफ यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी महंगाई का सामना करते हुए दोराहे पर खड़ा है, जहां बॉन्ड बाजार की सख्ती ने नीतिगत निर्णयों को जटिल बना दिया है।
























