रॉयल बैंक ऑफ कनाडा के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बैंक ऑफ कनाडा 2026 के बाकी महीनों में अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं करेगा। केंद्रीय बैंक के सामने एक तरफ कच्चे तेल के कारण बढ़ती महंगाई का दबाव है, तो दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती का माहौल गहरा रहा है। आगामी 28 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से पहले तीसरी तिमाही के कारोबारी आउटलुक सर्वे और ताजा महंगाई आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। नीति निर्माताओं के लिए विकास को रफ्तार देने और कीमतों को काबू में रखने के बीच संतुलन साधना बेहद जटिल साबित हो रहा है।
महंगाई के बढ़ते जोखिम और नीतिगत दुविधा
अर्थशास्त्री क्लेयर फैन और एबे शू के विश्लेषण के मुताबिक, बैंक ऑफ कनाडा 28 अक्टूबर को अपने आगामी फैसले के लिए विभिन्न आर्थिक संकेतकों का मूल्यांकन कर रहा है। अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कच्चे तेल के ऊंचे दाम केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेंगे। ऊर्जा की यह बढ़ी हुई लागत गैर-ऊर्जा उत्पादों और रोजमर्रा की सेवाओं में फैल सकती है। जब परिवहन और ईंधन महंगा होता है, तो कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे अंततः आम उपभोक्ताओं के लिए सामान महंगे हो जाते हैं।
इसके अलावा, यदि लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो कारोबारियों और उपभोक्ताओं के मन में भविष्य की महंगाई को लेकर आशंकाएं बढ़ सकती हैं। जब बाजार यह मान लेता है कि महंगाई लगातार बनी रहेगी, तो मजदूरी और कीमतों में स्वतः वृद्धि का एक दुष्चक्र शुरू हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक आमतौर पर दरों में कटौती करने से बचते हैं, भले ही जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियां कमजोर पड़ रही हों।
धीमी पड़ती विकास दर और रोजगार बाजार में गिरावट
कनाडा की आर्थिक प्रगति हाल के महीनों में काफी असंतुलित रही है। चालू वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में मजबूत विस्तार देखने के बाद, वर्ष की दूसरी छमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है। उत्पादन और मांग दोनों ही क्षेत्रों में नरमी दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है।
श्रम बाजार के आंकड़े भी चिंता पैदा कर रहे हैं। अगस्त और सितंबर के महीनों में लगातार नौकरियों में कमी आई है। पिछले साल गिरावट दर्ज करने के बाद, बेरोजगारी दर पिछले तीन महीनों से 6.5 प्रतिशत के स्तर पर थमी हुई है। रोजगार के अवसरों में आ रही इस कमी और स्थिर पड़ी बेरोजगारी दर के कारण आर्थिक सुधार की गति धीमी बनी हुई है। अर्थव्यवस्था की यह नाजुक स्थिति केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत फैसले लेना और अधिक मुश्किल बना रही है, क्योंकि ब्याज दरों को ऊंचा रखने से रोजगार पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर की चाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा कि वह कीमतों में स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, हालांकि उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के तय मार्ग के बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। उनकी इस अनिर्णायक टिप्पणी के कारण अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपनी बढ़त जारी रखी और AUD/USD जोड़ी मजबूत होकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ गई। इसके विपरीत, डॉलर में आई कमजोरी के चलते जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा में भारी गिरावट आई और USD/JPY फिसलकर 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। मुद्रा विनिमय दरों में यह फेरबदल दिखाता है कि निवेशक केंद्रीय बैंकों की अगली घोषणाओं को लेकर कितने सतर्क हैं।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों में भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को हाजिर सोना 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे लाभ और हानि के बीच झूलता रहा। अमेरिकी डॉलर में हल्की गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली सुधार ने पीली धातु की चाल को एक सीमित दायरे में बांधकर रखा है, जिससे निवेशक किसी बड़े रुझान के इंतजार में हैं।
दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार पूरे अक्टूबर महीने में दबाव के दौर से गुजर रहा है। सबसे प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (BTC) सप्ताह की शुरुआत में 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे लुढ़क गई थी। हालांकि शुक्रवार को इसमें हल्का सुधार देखा गया और यह संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के आसपास पहुंच गई। वृहद आर्थिक अनिश्चितताओं, उच्च उधारी लागत और संस्थागत मांग में आई कमी के चलते क्रिप्टो बाजार में नए निवेश की गति फिलहाल धीमी बनी हुई है।
वर्ष 2026 के अंत तक अनिश्चितता का दौर
रॉयल बैंक ऑफ कनाडा के विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि बैंक ऑफ कनाडा के लिए यह गतिरोध आसानी से हल होने वाला नहीं है। आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के लिए दरों में कटौती की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र से आ रही महंगाई केंद्रीय बैंक को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है। विकास और मुद्रास्फीति के इन परस्पर विरोधी जोखिमों के कारण वर्ष 2026 के शेष समय में नीतिगत दरों को जस का तस रखा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

















