मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर के भीतर विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई कड़े बदलाव लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत परिसर में अनधिकृत वाहनों और बाहरी व्यक्तियों के बिना रोकटोक प्रवेश पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया दीपावली के तुरंत बाद परिसर में सक्रिय कर दी जाएगी, ताकि अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।
कर्मचारियों के लिए पास और आधुनिक नंबर प्लेट पहचान तकनीक
विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति के सदस्य मितेंद्र गुप्ता के अनुसार, परिसर में नियमित तौर पर आने वाले प्रोफेसरों और अन्य सभी कर्मचारियों के वाहनों के लिए खास पास जारी किए जाएंगे। केवल वही वाहन मुख्य द्वार से अंदर आ सकेंगे, जिनके पास यह पास उपलब्ध होगा। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी एएनपीआर तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
प्रशासन इसके लिए परिसर में संचालित होने वाले सभी अधिकृत वाहनों का एक व्यवस्थित डेटाबेस बना रहा है। जब कोई अधिकृत वाहन मुख्य द्वार पर पहुंचेगा, तो वहां लगे अत्याधुनिक बूम बैरियर डेटाबेस के मिलान के आधार पर अपने आप खुल जाएंगे। इससे गेट पर भीड़भाड़ की स्थिति नहीं बनेगी और बाहरी वाहनों की तत्काल पहचान सुनिश्चित हो सकेगी।
दूर-दराज से आने वाले छात्रों के लिए टोकन और पार्किंग के कड़े नियम
विभिन्न कार्यों से दूर-दराज के इलाकों से विश्वविद्यालय पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भी अलग व्यवस्था तय की गई है। ऐसे छात्रों को मुख्य प्रवेश द्वार पर आवश्यक विवरण दर्ज कराने के बाद एक टोकन उपलब्ध कराया जाएगा। जिन विद्यार्थियों के पास निजी वाहन होंगे, उन्हें परिसर के भीतर कहीं भी वाहन ले जाने की छूट नहीं मिलेगी।
सभी आगंतुकों और छात्रों को अपने वाहन केपी हॉस्टल के पिछले हिस्से में निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही खड़े करने होंगे। वाहन पार्क करने के पश्चात ही छात्र पैदल विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों या कार्यालयों में अपने आवश्यक कार्य निपटाने जा सकेंगे। इस नियम का मकसद शिक्षण विभागों और प्रशासनिक भवनों के आसपास वाहनों की अनावश्यक आवाजाही को पूरी तरह खत्म करना है।
सीसीटीवी से निगरानी और गति सीमा पर नजर
विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न संवेदनशील और प्रमुख रास्तों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों के जरिए वाहनों की गति सीमा पर निरंतर नजर रखी जाएगी, ताकि परिसर के अंदर तेज रफ्तार से होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को रोका जा सके। इसके अलावा परिसर में होने वाली अन्य सभी गतिविधियों की भी 24 घंटे लगातार निगरानी की जाएगी।
हाल ही में केपी हॉस्टल के पीछे बने पार्किंग क्षेत्र में एक युवक और युवती का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसके चलते परिसर की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। यद्यपि विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया था कि उक्त वीडियो विश्वविद्यालय परिसर का नहीं है, फिर भी भविष्य में किसी अप्रिय घटना या अनुशासनहीनता से बचने के लिए एहतियात के तौर पर यह तकनीकी ढांचा खड़ा किया जा रहा है।



















