वैश्विक विदेशी मुद्रा बाज़ार में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान न्यूज़ीलैंड डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति मज़बूत की है। मुद्रा जोड़ी 0.5690 के स्तर को पार करते हुए 0.5696 के आसपास कारोबार करती नज़र आई। मुद्रा बाज़ार में इस हलचल के पीछे मुख्य कारण रिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी करने की प्रबल संभावना है। हालांकि ताज़ा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े अपेक्षाकृत नरम रहे हैं, लेकिन वित्तीय बाज़ार के विश्लेषक मानते हैं कि चौथी तिमाही में देश की महंगाई दर 4 प्रतिशत के आंकड़े से काफी ऊपर जा सकती है। ऐसे में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे से बाहर काफी लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिसकी वजह से नीति नियंताओं को नीतिगत दरों में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, न्यूज़ीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर 0.5696 पर दर्ज की गई, जो पिछले सत्र के 0.5705 के बंद स्तर से 0.16 प्रतिशत नीचे है। इस जोड़ी का 52 हफ्तों का निचला स्तर 0.5567 और उच्चतम स्तर 0.6093 रहा है। मौजूदा कारोबारी मात्रा 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर बनी हुई है। बाज़ार सहभागी इस समय दोनों केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक रुख में आने वाले अंतर का आकलन कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के हवाले से बाज़ार अब लगभग 85 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहा है कि न्यूज़ीलैंड का केंद्रीय बैंक अपनी अक्टूबर बैठक में आधिकारिक नकद दर को 25 आधार अंक यानी एक चौथाई प्रतिशत बढ़ाकर 3.0 प्रतिशत कर देगा। इसके साथ ही, लगभग 50 प्रतिशत यानी दो में से एक संभावना इस बात की भी है कि दिसंबर तक यह दर बढ़कर 3.25 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी।
फेडरल रिज़र्व की सुस्ती और ब्याज दर परिदृश्य
दूसरी तरफ, अमेरिकी मुद्रा में दांव लगाने वाले ट्रेडर्स ने अमेरिकी ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। फेडरल रिज़र्व के प्रमुख केविन वॉर्श ने हालिया संबोधन में इस बात का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया कि अगली दर वृद्धि कब तक देखने को मिल सकती है। मौद्रिक बाज़ार अब फेड की अक्टूबर नीति बैठक में दरों में किसी भी बदलाव न होने यानी रोक लगाने की 92.8 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहा है। केविन वॉर्श के संबोधन का विश्लेषण करने वाले एफएक्सएस स्पीचट्रैकर पर उनके वक्तव्य को 10 में से 5.6 का स्कोर दिया गया है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 6.1 से मामूली रूप से कम है। यह स्कोर दर्शाता है कि संरचनात्मक विकास और निवेश में तेजी पर सकारात्मक टिप्पणियों के बावजूद फेड प्रमुख का लहजा ऐतिहासिक आधार रेखा की तुलना में थोड़ा कम प्रभावशाली रहा।
केविन वॉर्श ने अपने वक्तव्य में स्वीकार किया कि वे वैश्विक वित्तीय संकट के दौर से अत्यधिक प्रभावित और सतर्क रहे हैं। यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक के भीतर अभी भी अत्यधिक सावधानी बरतने का रुझान बना हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फेड की उम्मीदों के अनुरूप रही है और नीतियों द्वारा संचालित निवेश में मजबूती आई है। उन्होंने अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों के परिणामों पर पहले से कोई भी राय देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि फेड पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहेगा। इसके अतिरिक्त, वॉर्श ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को मांग पक्ष की एक ऐसी शक्ति बताया जिसके रोज़गार पर प्रभाव अभी अनिश्चित हैं। आगामी फील्ड सुनवाइयों और टास्क फोर्स के गठन के साथ यह रुख मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थिरता के संदर्भ में तकनीकी जोखिमों और अवसरों की पड़ताल करने वाला बना हुआ है।
इस बीच, एफएक्सएस फेड सेंटीमेंट इंडेक्स 0.00 अंक के बदलाव के साथ 127.51 के ऊंचे स्तर पर स्थिर बना रहा। यह इस बात की पुष्टि करता है कि फेडरल रिज़र्व का समग्र नीतिगत दृष्टिकोण अभी भी हॉकिश यानी सख्त मौद्रिक नीति के दायरे में बना हुआ है। भले ही वॉर्श के भाषण का स्कोर औसत से नीचे रहा हो, लेकिन इंडेक्स में किसी भी बदलाव का न होना बताता है कि भविष्य के नीतिगत कदमों पर उनकी गैर-प्रतिबद्ध टिप्पणियों ने भी बाज़ार में अमेरिकी डॉलर को मिलने वाले बुनियादी समर्थन को नुकसान नहीं पहुंचाया है।
तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण बाज़ार स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नज़र डालें तो एनज़ेडडी/यूएसडी में अल्कालिक मंदी का दबाव अभी भी मौजूद है क्योंकि कीमत 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे सीमित है। 100-दिवसीय एसएमए वर्तमान में 0.5770 के स्तर पर स्थित है, जो ऊपर की ओर एक मजबूत अवरोध बना हुआ है। इसके अलावा 50-दिवसीय एसएमए 0.5762 और 200-दिवसीय एसएमए 0.5838 पर स्थित है। वहीं एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय ईएमए 0.5664, 50-दिवसीय ईएमए 0.5719 और 200-दिवसीय ईएमए 0.5796 पर है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे होना चार्ट पर डेथ क्रॉस संरचना को दर्शाता है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति का संकेत है।
हालांकि, अल्पकालिक दृष्टिकोण से जोड़ी बोलिंजर बैंड के 20-दिवसीय मध्य रेखा के ऊपर बनी हुई है, जो 0.5634 के आसपास है। यह हालिया गिरावट के बाद कीमतों में कुछ स्थिरता का संकेत देता है। बोलिंजर बैंड का ऊपरी दायरा 0.5701 से 0.5705 के आसपास ऊपरी आपूर्ति क्षेत्र का काम कर रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 14 वर्तमान में 52.8 से सुधरकर 54 के स्तर पर आ गया है, जो तटस्थ क्षेत्र में वापसी और ओवरसोल्ड दबाव के कम होने का संकेत देता है, न कि किसी स्पष्ट तेजी का। एडीएक्स संकेतक 43 पर है जो एक मजबूत ट्रेंडिंग बाज़ार की पुष्टि करता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट और सिग्नल दोनों लाइनें 90 पर बनी हुई हैं। एमएसीडी हिस्टोग्राम शून्य पर बुलिश रुख दिखा रहा है। दिन के लिए धुरी बिंदु यानी पिवट 0.5693 पर है, जिसके ऊपर पहला रेसिस्टेंस 0.5704 और दूसरा रेसिस्टेंस 0.5711 पर है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट 0.5685 और दूसरा सपोर्ट 0.5674 पर है, जबकि 0.5565 से 0.5568 का निचला बोलिंजर बैंड एक मजबूत संरचनात्मक आधार बना हुआ है। यदि यह निचला स्तर टूटता है तो बाज़ार में नए निचले स्तरों की ओर गिरावट गहरा सकती है।
न्यूज़ीलैंड डॉलर की चाल तय करने वाले बुनियादी कारक
न्यूज़ीलैंड डॉलर, जिसे विदेशी मुद्रा बाज़ार में कीवी नाम से जाना जाता है, वैश्विक निवेशकों के बीच एक प्रमुख ट्रेड की जाने वाली मुद्रा है। इसका मूल्य मुख्य रूप से न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था की स्थिति और वहां के केंद्रीय बैंक की नीतियों से तय होता है। इसके साथ ही कुछ विशिष्ट आर्थिक पहलू भी कीवी की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चीन न्यूज़ीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन सीधे तौर पर न्यूज़ीलैंड डॉलर को प्रभावित करता है। चीन की अर्थव्यवस्था में कमजोरी का अर्थ होता है न्यूज़ीलैंड से होने वाले निर्यातों में कमी, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों और मुद्रा दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके विपरीत, चीन में औद्योगिक सुधार कीवी के लिए सकारात्मक साबित होता है।
डेयरी उत्पादों की कीमतें न्यूज़ीलैंड डॉलर की चाल का दूसरा सबसे बड़ा कारक हैं। डेयरी उद्योग न्यूज़ीलैंड का सबसे प्रमुख निर्यात क्षेत्र है। जब वैश्विक बाज़ार में डेयरी उत्पादों की कीमतें बढ़ती हैं, तो न्यूज़ीलैंड की निर्यात आय में जबरदस्त इजाफा होता है, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और मुद्रा की मांग बढ़ती है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड का मुख्य उद्देश्य मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में रखना है, जिसमें इसका मुख्य केंद्र बिंदु 2 प्रतिशत के आसपास संतुलन बनाए रखना होता है। जब अर्थव्यवस्था में महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। इस कदम से बॉन्ड यील्ड में इजाफा होता है, जिससे विदेशी निवेशक आकर्षित होते हैं और न्यूज़ीलैंड डॉलर को सहारा मिलता है। इसके उलट ब्याज दरों में कटौती मुद्रा को कमजोर करती है।
न्यूज़ीलैंड के प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़े जैसे सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, बेरोजगारी दर और उपभोक्ता विश्वास भी मुद्रा के मूल्यांकन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। मजबूत आर्थिक विकास और कम बेरोजगारी विदेशी पूंजी को आकर्षित करती है और केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने का अवसर देती है। इसके अलावा न्यूज़ीलैंड डॉलर को जोखिम से जुड़ी मुद्रा यानी कमोडिटी करेंसी माना जाता है। जब वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है और आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मकता रहती है, तब कीवी में मजबूती आती है। इसके विपरीत, जब बाज़ार में अनिश्चितता या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और न्यूज़ीलैंड डॉलर में बिकवाली देखने को मिलती है।
वैश्विक मुद्रा बाज़ार और कमोडिटी परिदृश्य
व्यापक विदेशी मुद्रा बाज़ार में अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया का सख्त रुख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती दे रहा है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब दबाकर रखा है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों के कारण उपजी मुद्रास्फीति की चिंताएं अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं को हवा दे रही हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन भी मिल रहा है।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखी गई, जिससे यूएसडी/जेपीवाई फिसलकर 156.00 के करीब एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों ने बैंक ऑफ़ जापान द्वारा जल्द ब्याज दर बढ़ाए जाने के दावों को बल दिया है, जिससे येन में तेज़ी आई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई भारी गिरावट ने भी येन के मुकाबले डॉलर पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
कमोडिटी बाज़ार में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। शुक्रवार के एशियाई सत्र में सोना अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया और 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की वजह से बढ़ती महंगाई ने फेडरल रिज़र्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दर बढ़ाने की अटकलों को फिर से जीवित कर दिया है। इससे बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग प्रभावित हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर की कमजोरी के बावजूद सोना ट्रेडिंग रेंज के निचले स्तर को तोड़कर मंदी के दबाव में दिखाई दे रहा है।
ब्रिटेन में मुद्रास्फीति का दबाव फिर से बढ़ता दिख रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में ब्रिटेन की वार्षिक सीपीआई मुद्रास्फीति बढ़कर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अगस्त में 3.1 प्रतिशत थी। यह अक्टूबर 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है और अर्थशास्त्रियों के 3.4 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है। इसने बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने की चुनौती को और बढ़ा दिया है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और भविष्य की नीतियां
अमेरिकी डॉलर के लिए आने वाले दिन अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं, क्योंकि 3 नवंबर को वहां मध्यावधि चुनाव होने हैं। बाज़ार जहां दिसंबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में एक और वृद्धि की संभावनाओं का आकलन कर रहा है, वहीं अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण के लिए होने वाला मुकाबला देश की राजकोषीय नीतियों की दिशा तय करेगा। संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक शक्ति का संतुलन यह निर्धारित करेगा कि आगामी वर्षों में सरकारी खर्च और कर नीतियों का स्वरूप क्या होगा। यह बदलाव परोक्ष रूप से 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति की चाल और फेडरल रिज़र्व के निर्णयों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। निवेशकों की नज़रें अब आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

















