आधुनिकता और विकास के तमाम बड़े दावों के बीच ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस तरह बच्चों के भविष्य और जीवन पर भारी पड़ रहा है, इसकी एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। राजस्थान राज्य के प्रतापगढ़ जिले के एक सुदूर गांव में स्कूली बच्चे रोज अपनी जान दांव पर लगाकर पढ़ाई करने जाने को विवश हैं। एक ओर जहां सरकारें शिक्षा का अधिकार देने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बातें करती हैं, वहीं दूसरी ओर यहां के मासूमों को स्कूल की चौखट तक पहुंचने के लिए मौत के रास्ते से गुजरना पड़ता है।
जोखिम भरा सफर और मासूमों की मजबूरी
प्रतापगढ़ जिले में स्थित उदियाखेड़ी गांव के बच्चों को रोजाना सुबह स्कूल जाने के लिए एक बेहद खतरनाक रास्ता चुनना पड़ता है। गांव के समीप बहने वाले एक बड़े नाले पर आवगमन का कोई सुरक्षित साधन या पक्का पुल उपलब्ध नहीं है। इस वजह से छात्र नाले के ऊपर गिरे एक पेड़ के पतले तने पर संतुलन बनाकर उसे पार करते हैं। तने से जरा सा भी पैर फिसलने का मतलब है सीधे गहरे नाले के तेज बहाव या पानी में गिर जाना। इसके बावजूद शिक्षा पाने की ललक और कोई दूसरा विकल्प न होने की मजबूरी में बच्चे हर दिन इस जानलेवा खतरे का सामना करते हैं।
दो दशकों से जारी है गुहार और नेताओं के वादे
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आजादी के इतने दशक बीत जाने के बाद भी उनके गांव की किस्मत नहीं बदल सकी है। चुनावी दौर में गांव का रुख करने वाले राजनीतिक प्रतिनिधि और उम्मीदवार विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाकर वोट तो हासिल कर लेते हैं, पर चुनाव संपन्न होते ही गांव वालों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। उदियाखेड़ी गांव के लोगों ने बताया कि वे पिछले 20 सालों से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस नाले पर एक सुरक्षित पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, दो दशकों से उन्हें सिर्फ आश्वस्त किया जाता रहा है, धरातल पर काम की एक ईंट भी नहीं रखी गई।
मानसून में और भयावह होते हैं हालात
बरसात के दिनों में इस समस्या का रूप और भी विकराल हो जाता है। मानसून के दौरान जब नाला लबालब भर जाता है, तब पेड़ के तने पर चलकर इसे पार करना और भी ज्यादा डरावना हो जाता है। ऐसी स्थिति में अभिभावक और बच्चे हर क्षण किसी अनहोनी के डर में जीने को मजबूर रहते हैं। ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं कि संबंधित प्रशासनिक विभाग और सरकार मामले की गंभीरता को समझे। किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना इस नाले पर जल्द से जल्द पक्के पुल का निर्माण शुरू कराया जाना चाहिए ताकि बच्चों का स्कूल जाना सुरक्षित हो सके।



















