रिमरांगपारा: मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने गुरुवार को दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स के रिमरांगपारा हायर सेकेंडरी स्कूल के जीर्णोद्धार किए गए भवन का औपचारिक उद्घाटन किया। इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष यानी सीएमएसडीएफ के तहत 14 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में गांबेग्रे की विधायक मेहताब चांदी ए. संगमा और चोकपोट के विधायक सेगचिम संगमा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
शिक्षा क्षेत्र को भारी बजट और मिशन एजुकेशन
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के लिए शिक्षा हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। राज्य सरकार विभिन्न विकास कार्यों पर कुल लगभग 20,000 करोड़ रुपये खर्च करती है, जिसमें से अकेले शिक्षा क्षेत्र के लिए हर साल 4,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि अतीत में मेघालय की शिक्षा व्यवस्था को बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षकों के वेतन से जुड़े मुद्दों और खराब परीक्षा परिणामों जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। सरकार अब मिशन एजुकेशन के जरिए इन सभी कमियों को दूर करने में जुटी है।
छात्रों के प्रदर्शन और परीक्षा परिणामों में सुधार
अतीत का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि गारो हिल्स क्षेत्र में एक समय 75 प्रतिशत से अधिक बच्चे एसएसएलसी परीक्षा में फेल हो जाते थे, लेकिन पिछले आठ वर्षों में सरकार के निरंतर प्रयासों से स्थिति बदली है। इस साल एसएसएलसी परीक्षा का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़कर 86.84 प्रतिशत हो गया है, जबकि हायर सेकेंडरी के विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय में पास प्रतिशत 83 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में राज्य का स्कोर 2024 के 448 अंक से सुधरकर 2026 में 525.71 अंक पर पहुंच गया है, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
बुनियादी ढांचे और डिजिटल लर्निंग का विस्तार
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मिशन एजुकेशन के तहत राज्य भर में 2,000 से अधिक स्कूलों का आधुनिकीकरण और उन्नयन किया जा चुका है, और अकेले 23 सितंबर को 80 नए स्कूल भवन राष्ट्र को समर्पित किए गए थे। बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सीएम इंपैक्ट प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से छात्रों को चैप्टर-वार पाठ, शंकाओं के समाधान के लिए एक चैटबॉट और मॉक टेस्ट की सुविधा मिलती है। खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी इस प्लेटफॉर्म की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इसे ऑफलाइन मोड में उपलब्ध कराने पर काम चल रहा है।
स्कूलों की जमीनी हकीकत और आगामी रोडमैप
बुनियादी ढांचे में सुधार के बावजूद मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि केवल इमारतें बन जाने से पूरी समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बिजली, सुरक्षित पेयजल, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशालाओं और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई। कॉनराड के. संगमा ने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक अकाउंट से इस कार्यक्रम की जानकारी साझा की और बताया कि शिक्षा विभाग को एक विशेष रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रत्येक स्कूल की कमियों, समय सीमा और वित्तीय आवश्यकताओं की सटीक पहचान की जा सके।
उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार और शिक्षकों के वेतन
राज्य में विभिन्न स्तरों के शिक्षण संस्थानों में संतुलन की कमी पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि मेघालय में लगभग 9,000 सरकारी निचली प्राथमिक स्कूल, 3,000 ऊपरी प्राथमिक स्कूल, 1,700 माध्यमिक स्कूल, 500 उच्च माध्यमिक स्कूल और 80 कॉलेज मौजूद हैं। उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ाने के लिए सरकार ने 23 नए पीपुल्स कॉलेज खोले हैं, बाघमारा और विलियमनगर में कॉलेज सुविधाएं विकसित की हैं, महेंद्रगंज में कॉलेज शुरू किया है तथा शिलोंग में एक राज्य विश्वविद्यालय और एक इंजीनियरिंग कॉलेज की परियोजनाएं हाथ में ली हैं। इसके साथ ही, 23,000 से अधिक तदर्थ और एसएसए शिक्षकों के लिए एक संरचित वेतन ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत उनके वेतन के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।



















