मेघालय और असम के चर्च ऑफ गॉड की पास्टर्स फेलोशिप ने राज्य सरकार से 1 नवंबर को आधिकारिक राज्य अवकाश घोषित करने की मांग की है। यह दिन पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख आदिवासी अधिकार नेता और संविधान निर्माता रेवरेंड जेजेएम निकोल्स-रॉय की पुण्यतिथि का प्रतीक है। फेलोशिप के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को शिलांग में उप मुख्यमंत्री प्रेस्टन टिनसोंग से मुलाकात कर इस संबंध में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।
शिलांग में उप मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
शिलांग में हुई इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने 1 नवंबर को राज्य अवकाश घोषित करने के पीछे के तर्कों को विस्तार से रेखांकित किया। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पास्टर्स फेलोशिप के महासचिव रेवरेंड डॉ एसके सिएमलीह ने बताया कि उप मुख्यमंत्री प्रेस्टन टिनसोंग ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव का ध्यानपूर्वक परीक्षण करेगी। फेलोशिप का मानना है कि सरकारी मान्यता मिलने से मेघालय और पूरे पूर्वोत्तर के सामाजिक व राजनीतिक ढांचे को आकार देने वाले एक महान नेता को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी।
रेवरेंड जेजेएम निकोल्स-रॉय के योगदान की सराहना
रेवरेंड जेजेएम निकोल्स-रॉय को क्षेत्र में एक दूरदर्शी राजनेता, संविधान निर्माता, चर्च के अग्रदूत और आदिवासी अधिकारों के रक्षक के रूप में जाना जाता है। पास्टर्स फेलोशिप ने उनके व्यापक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने आदिवासी कल्याण, धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक विकास और समाज सेवा के क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए। भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर के जनजातीय समुदायों के अधिकारों और स्वायत्तता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
संवैधानिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की पहल
फेलोशिप के अनुसार 1 नवंबर को राज्य अवकाश घोषित करने का उद्देश्य केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करना ही नहीं है, बल्कि यह राज्य की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी देगा। संगठन का कहना है कि यह वार्षिक अवकाश आने वाली पीढ़ियों को मेघालय की संवैधानिक विरासत, जनजातीय पहचान, आध्यात्मिक परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने में मदद करेगा।



















