मेघालय में हिनिएवट्रेप इंटीग्रेटेड टेरिटोरियल ऑर्गनाइजेशन (एचआईटीओ) ने राज्य सरकार से 17 अगस्त की तारीख को ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व के दिन के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की अपील की है। संगठन का कहना है कि वर्ष 1948 में खासी राज्यों और भारत संघ के बीच हुआ समझौता राज्य के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे आधिकारिक रूप से याद किया जाना चाहिए। इस संबंध में एचआईटीओ ने मेघालय के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें इस दिन को पूरे राज्य में प्रतिवर्ष मनाने की सिफारिश की गई है।
1948 का ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व
संगठन के अनुसार, 17 अगस्त 1948 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने 25 खासी राज्यों से जुड़े एक सशर्त विलय पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) और उससे जुड़े अनुबंध पत्र को स्वीकार करते हुए उस पर हस्ताक्षर किए थे। एचआईटीओ ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अन्य कई देशी रियासतों द्वारा हस्ताक्षरित विलय पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ मर्जर) से काफी भिन्न थी। संगठन का मानना है कि यह समझौता नव स्वतंत्र भारत संघ और खासी राज्यों के बीच एक अनूठे संवैधानिक संबंध को प्रदर्शित करता है, जिसे जनता के समक्ष लाना आवश्यक है।
प्रस्तावित शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
एचआईटीओ ने राज्यपाल को दिए अपने प्रस्ताव में सुझाव दिया है कि इस दिन को राज्य भर में विभिन्न शैक्षणिक और बौद्धिक गतिविधियों के माध्यम से मनाया जाना चाहिए। इसमें सेमिनार, सार्वजनिक व्याख्यान, ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रदर्शनियां, और स्कूलों तथा कॉलेजों में विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव शामिल है। इसके अलावा, पारंपरिक शासन संस्थानों, इतिहासकारों, संवैधानिक विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है। संगठन ने 1948 के विलय पत्र और अनुबंध पर अधिक अकादमिक शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया है ताकि युवा पीढ़ी मेघालय के क्रमिक विकास को समझ सके।
राज्य सरकार से पहल की अपील
एचआईटीओ ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से अनुरोध किया है कि वे इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा और राज्य सरकार के साथ चर्चा करें और प्रशासन को इसके ऐतिहासिक तथा संवैधानिक आधार का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करें। एचआईटीओ के अध्यक्ष डोनबोक डखार और राजनीतिक सचिव गैरी मायरबोह ने कहा कि इस तरह के आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य की ऐतिहासिक स्मृति को संरक्षित करना और भारत की आजादी के व्यापक परिदृश्य में मेघालय की विशिष्ट संवैधानिक यात्रा को रेखांकित करना है। संगठन का मानना है कि यह कदम संवैधानिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ गंभीर अकादमिक चर्चाओं के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा।





















