शिलांग में आयोजित एक बाइक रैली के दौरान भड़की हिंसा और बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़ के मामले में मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि घटना में बड़ी संख्या में उपद्रवियों के शामिल होने के आरोपों के बावजूद अब तक केवल चार खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) नेताओं को ही गिरफ्तार किया गया है। चीफ जस्टिस तेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि हिंसा में शामिल सभी उपद्रवियों की पहचान कर उनकी सटीक भूमिका तय की जाए।
जांच के दायरे और गति पर हाईकोर्ट के तीखे सवाल
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने जांच की सुस्त रफ्तार और उसके सीमित दायरे पर चिंता प्रकट की। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नागरिकों पर हमला करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। पुलिस ने पीठ को सूचित किया कि इस पूरी घटना के संबंध में विभिन्न थानों में कुल 22 एफआईआर दर्ज की गई हैं। हालांकि, गिरफ्तारियां केवल चार लोगों तक सीमित रहने पर अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और सभी दोषियों के खिलाफ समान रूप से कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
22 एफआईआर और जुटाये जा रहे तकनीकी साक्ष्य
मामले की प्रगति की जानकारी देते हुए पुलिस ने अदालत को बताया कि दर्ज 22 मामलों में से 4 एफआईआर शिलांग सदर थाने में, 9 रिंजाह में, 7 मावलाई में तथा 1-1 एफआईआर लैतमुखराह और लुमडिंगजरी पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई हैं। घटना से जुड़े दो वाहनों को भी जब्त किया गया है। इसके अलावा, जांच टीम 8 मोबाइल फोन से मिले डेटा का विश्लेषण कर रही है और 27 अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हिंसा में शामिल अन्य चेहरों की पहचान की जा सके।
निवारक उपायों में चूक और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा रैली के लिए तय की गई शर्तों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि क्या जुलूस शुरू होने के स्थान से ही इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी और क्या हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त निवारक कदम उठाए गए थे। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि हमले और संपत्ति के नुकसान की खबरों पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्या थी। इसके साथ ही, पीठ ने भीड़ हिंसा की रोकथाम और जांच से जुड़े तहसीन एस पूनावाला बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर भी स्पष्टीकरण मांगा।
7 सितंबर को शीर्ष पुलिस अधिकारियों की अदालत में पेशी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने विशेष जांच टीम (SIT) का पर्यवेक्षण कर रहे पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को अदालत की टिप्पणियों को ध्यान में रखकर जांच को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने निर्देश दिया है कि 7 सितंबर को आईजीपी, ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक (SP), तथा शिलांग सदर और लुमडिंगजरी थानों के प्रभारी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर हों। अधिकारियों को उस दिन जांच की पूरी प्रगति का ब्योरा देते हुए एक व्यापक स्टेटस रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।



















