मेघालय के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशुओं की गहन चिकित्सा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम बुनियादी ढांचा तैयार हो गया है। पश्चिम खासी हिल्स जिले के मुख्यालय नोंगस्टोइन में 31.05 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) अस्पताल को गुरुवार को औपचारिक रूप से आम जनता की सेवा के लिए शुरू कर दिया गया। इस चिकित्सा केंद्र के शुरू होने से इलाके की जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं और बीमार शिशुओं को आपातकालीन उपचार के लिए अब लंबी दूरी तय करके राज्य की राजधानी शिलांग नहीं जाना पड़ेगा। उद्घाटन समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री मेथोडियस डखार और विधायक गेब्रियल वहलांग तथा आर.जी. मोमिन भी मौजूद रहे।
अस्पताल में मौजूद आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और ऑक्सीजन प्लांट
नोंगस्टोइन का यह नया चिकित्सा केंद्र व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं से लैस है। 31.05 करोड़ रुपये के कुल बजट से तैयार किए गए इस परिसर में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), एक आधुनिक पैथोलॉजी प्रयोगशाला परिसर, त्वरित आपातकालीन चिकित्सा इकाई, सुसज्जित लेबर रूम, गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू), नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) और उन्नत ऑपरेशन थिएटर कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, मरीजों को निर्बाध प्राणवायु उपलब्ध कराने के मकसद से 0.37 करोड़ रुपये की अलग लागत से एक पीएसए मेडिकल ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट भी परिसर में लगाया गया है।
बच्चों में जन्मजात विकारों, शारीरिक विकास से जुड़ी रुकावटों और विभिन्न दिव्यांगताओं की समय पर पहचान करने तथा उनके शुरुआती इलाज के उद्देश्य से इसी अस्पताल परिसर में एक जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। पश्चिम खासी हिल्स जिले में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर के आंकड़े लंबे समय से राज्य के सर्वाधिक चिंताजनक स्तरों में शामिल रहे हैं। इसी गंभीर भौगोलिक और सामाजिक चुनौती को ध्यान में रखते हुए इस स्वास्थ्य परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया गया है।
जनसंवाद पहल और जमीनी मांगों पर अमल
इस अस्पताल के निर्माण की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने बताया कि यह सुविधा सीएम कनेक्ट कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा रखी गई पुरानी मांग का सीधा परिणाम है। संवाद सत्र में जनता द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद नवंबर 2025 में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने जमीनी स्तर पर मौके का मुआयना किया था। उस दौरान निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के साथ ही डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, जरूरी उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता की अंतिम रूपरेखा तय की गई, जिससे अस्पताल के संचालन का रास्ता साफ हुआ।
सीएम कनेक्ट पहल को जमीनी आवाज को शासन तक पहुंचाने का जरिया बताते हुए संगमा ने कहा, “यह शायद लोकतंत्र के सबसे बेहतरीन रूपों में से एक हो सकता है।” उन्होंने साझा किया कि प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उनसे इस जनसंवाद मॉडल को अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सामने एक बेहतरीन प्रशासनिक मिसाल के रूप में पेश करने को कहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि शासन चलाने के साथ लगातार शिकायतें, जनदबाव और अपेक्षाएं जुड़ी रहती हैं, लेकिन जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों का काम इनसे मुंह मोड़ना नहीं बल्कि हर चुनौती का सीधे सामना करना है।
समारोह के दौरान उस निजी जमीन मालिक को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया, जिन्होंने अस्पताल भवन के निर्माण के लिए अपनी जमीन बिना किसी शर्त के दान दी थी। इसके साथ ही आईडीबीआई बैंक द्वारा अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत स्वास्थ्य विभाग को भेंट की गई एक नई एम्बुलेंस को भी क्षेत्र के लिए रवाना किया गया। पहाड़ी रास्तों में जटिल स्वास्थ्य स्थितियों के दौरान प्रसूताओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में यह रेफरल वाहन जीवनरक्षक साबित होगा। मुख्यमंत्री ने अपने X पर लिखा कि नोंगस्टोइन में इस अस्पताल के खुलने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की देखभाल को नई ताकत मिलेगी।
नोंगस्टोइन के इर्द-गिर्द 498 करोड़ का सड़क नेटवर्क और कनेक्टिविटी विस्तार
स्वास्थ्य ढांचे के अलावा इलाके के समग्र विकास को गति देने के लिए कई अन्य अहम परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया गया। इनमें नोंगस्टोइन में बनने वाला गोल्डन जुबली गार्डन, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) का नया शैक्षणिक भवन और 22.27 करोड़ रुपये की लागत वाली सोहपियान से नोंगस्टोइन तक की सड़क शामिल हैं। प्रशासनिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए संगमा ने कहा कि सरकारी निवेश और ढांचागत विकास को केवल शिलांग या तुरा जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
क्षेत्र का सबसे बड़ा बुनियादी ढांचा निवेश 383.91 करोड़ रुपये की लागत से बन रही नोंगस्टोइन-मावित-नोंगज्री सड़क के 35 किलोमीटर लंबे मावित से नोंगज्री खंड का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण है, जो नोंगस्टोइन को दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स के रानीकोर से जोड़ती है। इसके साथ ही नाबार्ड के आरआईडीएफ के तहत 63.01 करोड़ रुपये की नोंगस्टोइन-मावित सड़क, 22.27 करोड़ रुपये की सोहपियान-नोंगस्टोइन सड़क और पीएमजीएसवाई-3 के अंतर्गत दो पुलों सहित 29.12 करोड़ रुपये की नोंगख्लाव-बायर्की-उमडोहलुन सड़क के निर्माण को मिलाकर कुल 498.31 करोड़ रुपये की कनेक्टिविटी परियोजनाएं नोंगस्टोइन के आसपास केंद्रित हैं। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसियों को सड़कों के किनारों, फुटपाथों और जल निकासी नालियों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
जिले के 50 वर्षों का सफर और दीर्घकालिक विजन
परियोजनाओं की निगरानी की जिम्मेदारी उपायुक्त और स्थानीय विधायक को सौंपते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण में किसी भी प्रकार की कमी या अड़चन आने पर इसकी जानकारी सीधे उन्हें दी जाए। पश्चिम खासी हिल्स के गठन के 50 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले वर्ष क्षेत्र की दिशा तय करने वाले साबित होने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और नीति निर्धारकों से विधानसभा क्षेत्र और जिला स्तर पर तीन वर्ष, पांच वर्ष, दस वर्ष और पचास वर्ष की अवधि के ठोस लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया ताकि स्थानीय युवा विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
पिछले आठ वर्षों के वित्तीय आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सभी प्रमुख क्षेत्रों को मिलाकर अकेले पश्चिम खासी हिल्स में लगभग 900 करोड़ रुपये के विकास कार्य जमीन पर उतारे गए हैं। इसी तरह का सघन विकास मॉडल दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स, दक्षिण गारो हिल्स और पूर्वी जयंतिया हिल्स में भी लागू किया जा रहा है। इसका एक स्पष्ट उदाहरण 450 करोड़ रुपये की सुतंगा-सैपुंग सड़क है, जिसे राज्य स्थापना के दशकों बाद अब जाकर मंजूरी मिल सकी है। उपस्थित अधिकारियों और प्रशासनिक टीम को कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाते हुए संगमा ने कहा, “ईश्वर ने आपको यह अवसर दिया है। आपके समय के 10 सेकंड किसी का जीवन बदल सकते हैं।”
























