मेघालय की राजधानी शिलांग में स्वदेशी आस्था से जुड़े समुदाय का एक बहुत पुराना सपना शनिवार को पूरा हो गया। अपर केंच ट्रेस-लुमशात्संग्गी में 'लिंग सेंग' नाम से तैयार एक नए सांस्कृतिक भवन और प्रार्थना स्थल का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से क्षेत्र के स्थानीय विश्वासियों को अपनी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के निर्वहन के लिए एक समर्पित केंद्र मिल गया है।
पूर्वोत्तर परिषद के सहयोग से पूरी हुई परियोजना
इस पूरे निर्माण कार्य के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) द्वारा प्रदान की गई थी, जिसके तहत 9.28 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई। उद्घाटन समारोह में कैबिनेट मंत्री और साउथ शिलांग के विधायक सनबोर शुल्लई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ उत्तर पूर्वी परिषद के सचिव सतिंदर कुमार भल्ला तथा परिषद के सलाहकार रिचर्ड जे लालनुनकिमा भी इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपस्थित रहे।
लंबे समय से महसूस हो रही थी प्रार्थना स्थल की कमी
समारोह को संबोधित करते हुए सनबोर शुल्लई काफी भावुक नजर आए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से साझा किया कि विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच केवल सेंग खासी समुदाय के पास ही एक समर्पित प्रार्थना भवन नहीं था, जिससे उन्हें वर्षों से गहरी टीस महसूस होती थी। उन्होंने कहा कि इस भवन के अस्तित्व में आने के बाद अब उनके मन में कोई मलाल बाकी नहीं रहा है, क्योंकि यह उनके एक बहुत पुराने सपने के साकार होने जैसा है।
केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों की सराहना
विधायक ने इस महत्वाकांक्षी पहल को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने धन स्वीकृत कराने में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा, उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग और स्नियावभालांग धार सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना का प्रस्ताव उत्तर पूर्वी परिषद के माध्यम से आगे बढ़ाया गया था, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समर्थन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मंजूरी मिली।
सामाजिक सौहार्द और परस्पर सम्मान बनाए रखने की अपील
कार्यक्रम के दौरान सनबोर शुल्लई ने इलाके में आपसी भाईचारे और शांति बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने लाबान का उदाहरण देते हुए कहा कि यह इलाका अनेकता में एकता का सच्चा प्रतीक है, जहाँ भिन्न-भिन्न पंथों और समुदायों के लोग पीढ़ियों से मिल-जुलकर रहते हैं। भारतीय संविधान के मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नागरिकों से धर्मनिरपेक्षता, आपसी आदर और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांतों पर चलने का आग्रह किया। उनका कहना था कि धार्मिक या सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद हर व्यक्ति के भीतर एक ही आत्मा वास करती है, इसलिए मतभेदों को कभी हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने लोगों को प्रार्थना को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने का भी परामर्श दिया। इस परियोजना को साकार करने में उनके विशेष योगदान के सम्मान में सेंग खासी री-रेड लाबान ने उन्हें पारंपरिक पगड़ी और स्मृति चिह्न भेंट किए।



















