भारत की सर्वोच्च आतंकवाद-रोधी और विशेष अभियान इकाई राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG शुक्रवार को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली इस विशिष्ट फोर्स की औपचारिक स्थापना 16 अक्टूबर 1985 को की गई थी। आम बोलचाल में 'ब्लैक कैट कमांडो' के नाम से पहचानी जाने वाली यह फोर्स बेहद खतरनाक बंधक संकट, विमान अपहरण, आतंकी हमलों और अप्रत्याशित सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है। बल का आधिकारिक आदर्श वाक्य 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है, जो किसी भी विषम परिस्थिति में देश के हर कोने में श्रेष्ठ सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
दो स्तरीय विशेष कार्यप्रणाली: एसएजी और एसआरजी
NSG की कार्यकुशलता की मुख्य रीढ़ इसके दो अलग-अलग ऑपरेशनल घटक हैं, जिन्हें स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG) और स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG) के नाम से जाना जाता है। इन दोनों समूहों का चयन और कार्य विभाजन अत्यंत स्पष्ट और कठोर नियमों पर आधारित है।
- स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG): यह NSG का मुख्य स्ट्राइक घटक है, जिसमें प्राथमिक रूप से भारतीय सेना से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों और सैनिकों को शामिल किया जाता है। अत्यंत जोखिम भरे प्रत्यक्ष आतंकवाद-रोधी अभियानों, बंधक मुक्ति अभियानों और उच्च-स्तरीय विशेष ऑपरेशनों को जमीन पर अंजाम देने का मुख्य दारोमदार इसी समूह पर होता है।
- स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG): इस समूह का गठन विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से प्रतिनियुक्त कर्मियों के माध्यम से किया जाता है। यह दस्ता विशिष्ट सुरक्षा दायित्वों को पूरा करने, संवेदनशील परिसरों की सुरक्षा और जटिल अभियानों के दौरान सहयोगी सुरक्षात्मक घेरा तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है।
- विस्फोटक निरोधक दस्ते: आतंकी और सामरिक ऑपरेशनों के साथ-साथ NSG के पास बम निरोधक और काउंटर-आईईडी अभियानों की विशेष क्षमता मौजूद है। इस इकाई के विशेषज्ञ विस्फोटक सामग्रियों और आईईडी से उत्पन्न खतरों को बेअसर करने में माहिर होते हैं।
मानेसर का नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर और तकनीकी जांच
हरियाणा के मानेसर में स्थित नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर (NBDC) देश में विस्फोटक संबंधी घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण का केंद्रीय मंच है। यह केंद्र देशभर में होने वाले विभिन्न विस्फोटों से जुड़ी तकनीकी जानकारियों, रासायनिक साक्ष्यों और विस्फोटकों के निर्माण पैटर्न का विस्तृत डेटाबेस तैयार करता है। किसी भी बड़े धमाके के बाद जांच एजेंसियों को तकनीकी विशेषज्ञता और फोरेंसिक सहायता प्रदान करने में इस केंद्र की भूमिका निर्णायक रहती है। घटनाओं के पैटर्न को समझकर भविष्य में होने वाले विस्फोटक खतरों के तकनीकी पहलुओं को बेअसर करने की रणनीतियां यहीं तैयार की जाती हैं।
मुख्यालय और देशभर में फैले रणनीतिक क्षेत्रीय हब
NSG का मुख्य प्रशासनिक और ऑपरेशनल मुख्यालय हरियाणा के मानेसर में स्थित है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में देश के अलग-अलग हिस्सों में तुरंत कमांडो पहुंचाने और त्वरित प्रतिक्रिया समय सुनिश्चित करने के लिए देश के प्रमुख शहरों में क्षेत्रीय हब स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, गुजरात और जम्मू में NSG के क्षेत्रीय हब पूरी तरह से क्रियाशील हैं। इसके साथ ही अयोध्या में भी एक नया क्षेत्रीय हब स्थापित करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसकी पूर्ण परिचालन स्थिति की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है। इन हबों का मुख्य उद्देश्य संकट की स्थिति में स्थानीय पुलिस और राज्य प्रशासन के साथ तेजी से समन्वय स्थापित करके बिना समय गंवाए ऑपरेशनों को शुरू करना है।
बदलते दौर की चुनौतियां और आधुनिकीकरण
वर्तमान समय में आतंकवाद और सुरक्षा संकट का स्वरूप तेजी से तकनीकी और जटिल हो चुका है। भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में हमलों के तरीके, परिष्कृत इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस और ड्रोन के जरिए पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिम सुरक्षा बलों के सामने गंभीर चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। इन खतरों से निपटने के लिए NSG अपनी तकनीकी दक्षता, एडवांस हथियारों, संयुक्त सैन्य अभ्यासों और संचार तंत्र को लगातार अपग्रेड कर रही है। बल की ऑपरेशनल सफलता में कमांडो के शारीरिक पराक्रम के साथ-साथ मजबूत इंजीनियरिंग, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, संचार जाल और व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स विंग का समान रूप से बड़ा योगदान रहता है।



















