सीमांत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में लद्दाख के लिए लगभग 3350 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन वाले 5 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण किया गया। इन परियोजनाओं का मुख्य दायरा सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर करने, आधुनिक विमानन सेवाएं मुहैया कराने, पनबिजली उत्पादन और पारेषण नेटवर्क मजबूत करने, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा जल सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़ा हुआ है।
ज़ांस्कर घाटी के रास्ते वैकल्पिक संपर्क प्रदान करेगी नई सड़क
सीमावर्ती इलाकों में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा तैयार किए गए 298 किलोमीटर लंबे निम्मू-पदुम-दारचा मार्ग को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह रणनीतिक सड़क मार्ग लेह जिले के निम्मू क्षेत्र को हिमाचल प्रदेश के दारचा से सीधे जोड़ता है, जिसका रास्ता अत्यंत दुर्गम और अलग-थलग मानी जाने वाली ज़ांस्कर घाटी से होकर गुजरता है। अब तक लद्दाख का शेष भारत से सड़क संपर्क मुख्य रूप से श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्भर रहा है। नई सड़क इन दोनों पारंपरिक रास्तों के एक मजबूत पूरक और सुरक्षित वैकल्पिक संपर्क मार्ग के रूप में कार्य करेगी।
कठिन हिमालयी दर्रों के बीच इंजीनियरिंग की मिसाल
शिनकुन ला दर्रे सहित बेहद जटिल, बर्फीले और ऊंचे भौगोलिक भूभाग को काटकर तैयार किया गया यह मार्ग आधुनिक इंजीनियरिंग कौशल का बेहतरीन प्रमाण माना जा रहा है। रक्षा के नजरिए से यह सड़क बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे सशस्त्र बलों के वाहनों की आवाजाही अधिक तेज होगी और सीमांत चौकियों तक सैन्य लॉजिस्टिक्स तथा आपूर्ति तंत्र को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर ज़ांस्कर क्षेत्र की जनता को सबसे बड़ा लाभ यह मिलेगा कि वे साल के कठिन महीनों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, उन्नत शिक्षण संस्थानों, व्यापारिक बाजारों और सरकारी जरूरी सेवाओं तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
लेह हवाई अड्डे पर 640 करोड़ का भव्य टर्मिनल भवन
हवाई संपर्क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करते हुए लेह स्थित कुशोक बकुला रिम्पोची हवाई अड्डे पर नवनिर्मित पैसेंजर टर्मिनल भवन का उद्घाटन संपन्न हुआ। 640 करोड़ रुपये के निर्माण बजट से तैयार किया गया यह विशाल टर्मिनल 23,800 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह आधुनिक इमारत हर साल 35 लाख मुसाफिरों की सुगम आवाजाही को संभालने की पूर्ण क्षमता रखती है।
पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा मेल
हिमालय के नाजुक पारिस्थिकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए इस हवाई अड्डा टर्मिनल में ग्रीन टेक्नोलॉजी का विशेष ध्यान रखा गया है। इमारत के ऊर्जा प्रबंधन और कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर रखने के उद्देश्य से इसमें जियोथर्मल ऊर्जा प्रणाली का उपयोग किया गया है। यह ढांचा लद्दाख के संवेदनशील वातावरण में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। टर्मिनल के भीतरी और बाहरी स्वरूप में अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय लद्दाखी वास्तुकला एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के तत्वों को खूबसूरती से पिरोया गया है, जिससे क्षेत्र की राष्ट्रीय एयर कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा।
स्वच्छ पनबिजली और बेहतर पारेषण नेटवर्क से जगमगाएगा क्षेत्र
ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती देने और क्षेत्र के स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों का समुचित इस्तेमाल करने के संकल्प के तहत दो प्रमुख बिजली परियोजनाओं की भी शुरुआत की गई। इनमें 9 मेगावाट क्षमता वाली हनु लघु हाइड्रोपावर परियोजना और 66 किलोवॉट की डबल-सर्किट दाह-हनु-खालत्सी ट्रांसमिशन लाइन शामिल हैं। इस ट्रांसमिशन लाइन और पावर स्टेशन के चालू होने से लद्दाख के घरेलू और व्यावसायिक बिजली नेटवर्क की स्थिरता में व्यापक सुधार आएगा, जिससे अत्यधिक ठंड के मौसम में भी बिजली आपूर्ति में बार-बार आने वाली बाधाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।




















