मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दक्षिणी लेबनान के इलाकों में इजराइली सेना की भीषण एयरस्ट्राइक से हालात फिर बेकाबू हो गए हैं। सुरक्षा क्षेत्र में तैनात इजराइली सैनिकों पर हुए हमले के जवाब में की गई इस सैन्य कार्रवाई में 3 इजराइली सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके तुरंत बाद इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने हिजबुल्लाह के कमान सेंटर को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। लेबनान के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों के दौरान बच्चों और महिलाओं समेत कम से कम 11 लोगों की जान चली गई है। घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है।
सीजफायर उल्लंघन और इजराइली सैनिकों पर हमला
इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में गश्त कर रहे सैनिकों पर हिजबुल्लाह के लड़ाकों ने अचानक हमला बोल दिया था। इस हमले में 3 सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए, जिसके बाद सेना ने तत्काल जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया। इजराइली सेना ने दावा किया कि उन्होंने सीधे उस ठिकाने को अपना निशाना बनाया, जहां से सैनिकों पर हमले का निर्देश जारी किया गया था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा और सैनिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मानव ढाल के उपयोग और नागरिक मौतों पर इजरायल का पक्ष
सैन्य हमले के बाद इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्वीकार किया कि जिस ठिकाने को तबाह किया गया, वहां आम नागरिक भी मौजूद थे। हालांकि, इजराइली प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की मौजूदगी की जानकारी हमले के बाद सामने आई। इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह रणनीतिक रूप से अपने सैन्य ढांचों को रिहायशी इलाकों में स्थापित करता है ताकि नागरिकों को 'मानव ढाल' की तरह इस्तेमाल किया जा सके। आईडीएफ के अनुसार, यह एयरस्ट्राइक दक्षिणी लेबनान के अंसार क्षेत्र में हिजबुल्लाह की रदवान फोर्स के केंद्रीय मुख्यालय पर की गई थी। इस कार्रवाई में रदवान फोर्स के बटालियन कमांडर अली समीर अल-हाज हसन सहित कई अन्य लड़ाके मारे गए। सेना ने यह भी कहा कि हसन का परिवार मुख्यालय के भीतर मौजूद था और वे हमले की चपेट में आ गए, यद्यपि वे सेना का प्राथमिक लक्ष्य नहीं थे। अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए इजरायल ने हसन को वैध सैन्य लक्ष्य करार दिया।
अमेरिकी राजदूत का बयान और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने भी हिजबुल्लाह की कार्यशैली की सख्त आलोचना की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि ईरान समर्थित यह संगठन पहले इजराइली सैनिकों पर हमला कर गंभीर रूप से घायल करता है और फिर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करता है जिससे इजरायल को जवाबी हमला करना पड़े। हकाबी ने दावा किया कि हिजबुल्लाह जानबूझकर बच्चों को सैन्य अभियानों वाले क्षेत्रों में लाकर उनकी जान जोखिम में डालता है, ताकि सैन्य अभियानों के दौरान अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके।
हिजबुल्लाह का पलटवार और घरेलू राजनीति पर आरोप
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने इजराइली एयरस्ट्राइक को आक्रामकता को बढ़ावा देने वाली कार्रवाई करार दिया है। संगठन का कहना है कि इजराइली युद्धक विमानों ने अंसार गांव के बाहरी इलाके में स्थित एक मकान और दीर अल-जहरानी गांव की एक बहुमंजिला इमारत को निशाना बनाया। हिजबुल्लाह ने आरोप लगाया कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी डगमगाती घरेलू राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने, आगामी चुनाव में राजनीतिक लाभ उठाने और इजरायल के कट्टरपंथी दक्षिणपंथी गुटों को संतुष्ट करने के उद्देश्य से युद्ध का दायरा बढ़ा रहे हैं। संगठन ने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह इजराइली आक्रामकता को रोकने के लिए कूटनीतिक और कानूनी रास्ते तलाशे।
लेबनानी नेतृत्व की तीखी निंदा और जमीनी हालात
इजराइली हमले में हुई नागरिक मौतों पर लेबनान के शीर्ष नेतृत्व ने कड़ा विरोध जताया है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने संयुक्त रूप से इन सैन्य हमलों की निंदा की। प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में निर्दोष नागरिकों पर हमले इस संवेदनशील क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। नवीनतम रिपोर्टों के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान के अलग-अलग स्थानों पर हुए इन हमलों में कुल 11 लोगों की जान गई है, जिनमें अकेले अंसार गांव में मारे गए 3 मासूम बच्चे और 2 महिलाएं शामिल हैं। क्षेत्र में लगातार बमबारी से आम जनता के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है।



















