हवा में उड़ते एक वाणिज्यिक विमान के कॉकपिट के भीतर उस समय खौफनाक स्थिति पैदा हो गई जब एक सह-पायलट ने नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए मुख्य कैप्टन पर आपातकालीन कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से हमला बोल दिया। दुबई से इस्राइल के तेल अवीव की ओर जा रही फ्लाईदुबई की इस उड़ान में 170 से अधिक लोग सवार थे। उड़ान भरने के लगभग ढाई घंटे बाद विमान में यह अप्रत्याशित संघर्ष शुरू हुआ, जिसके कारण हवाई जहाज आसमान में अचानक लगभग 17,000 फीट (5,200 मीटर) नीचे आ गिरा। इस बेहद नाजुक मोड़ पर यात्रियों के असाधारण साहस और रिजर्व क्रू की तत्परता ने विमान को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचा लिया और सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारने में सफलता पाई।
कॉकपिट में अचानक जानलेवा हमला और विमान का गोता लगाना
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के लगभग दो घंटे और तीस मिनट बाद विमान में सब कुछ सामान्य लग रहा था। तभी कॉकपिट के अंदर मौजूद सह-पायलट ने अचानक आपातकालीन स्थिति के लिए रखी जाने वाली क्रैश एक्स उठा ली और मुख्य पायलट पर वार कर दिया। इस हमले का मुख्य मकसद पायलट को बेअसर करके हवाई जहाज का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेना था। हमले के तुरंत दौरान विमान का नियंत्रण बिगड़ा और वह हवा में तेजी से नीचे की ओर गोता लगाने लगा।
विमान ने इस गंभीर स्थिति के दौरान संकट से जुड़े सिग्नल भेजे। शुरुआत में विमान ने एक सामान्य आपात स्थिति का संकेत देने वाला कोड स्क्वॉक 7700 प्रसारित किया। इसके कुछ ही पलों बाद इसे बदलकर स्क्वॉक 7500 कर दिया गया, जो विमानन प्रोटोकॉल में गैर-कानूनी दखल या अपहरण (हाईजैकिंग) की पुष्टि करता है। विमान में सवार यात्री अचानक आई तेज गिरावट से बुरी तरह सहम गए क्योंकि विमान बहुत कम समय में 17,000 फीट नीचे गिर चुका था।
यात्रियों का अनुभव और कॉकपिट के भीतर का संघर्ष
उड़ान में मौजूद यात्री अल्मोग इटाली ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि अचानक ऐसा लगा जैसे हवाई जहाज किसी रोलरकोस्टर की तरह अत्यधिक जी-फोर्स के साथ सीधे नीचे गिरने लगा हो। उनके अनुसार, विमान लगभग 20 से 30 सेकंड तक बेहद तीव्र गति से नीचे गिरता रहा, फिर कुछ पलों के लिए संभला और उसके बाद दोबारा नीचे गिरने लगा। जैसे ही विमान में असामान्य हलचल महसूस हुई, यात्रियों को समझ आ गया कि कॉकपिट के भीतर कुछ भयानक घटित हो रहा है।
इस्राइली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के अनुसार, केबिन में सबसे पहले खतरे की घंटी ताली मानेस नाम की एक इस्राइली महिला ने बजाई, जिन्होंने कॉकपिट के अंदर से आ रही भारी चीख-पुकार और हंगामे की आवाजें सुनी थीं। गंभीर चोटों के बावजूद भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार कॉकपिट का दरवाजा आंशिक रूप से खोलने में कामयाब रहे। ताली मानेस के पति ज्वीका मानेस और तीन अन्य साहसी यात्री—यानीव हायुन, डॉ. शोटा मुसायेव और असफ रजुआन—बिना किसी हिचकिचाहट के कॉकपिट के भीतर घुस गए।
हमलावर को काबू करने की साहसिक कार्रवाई
कॉकपिट में प्रवेश करने वाले यानीव हायुन ने स्थिति की गंभीरता को बयां करते हुए बताया कि हमलावर विमान के उपकरणों और नियंत्रण प्रणाली को पूरी तरह नष्ट करने की कोशिश में जुटा था ताकि विमान को निष्क्रिय किया जा सके। हायुन ने तेजी से हमलावर की गर्दन को अपनी मजबूत पकड़ (चोकहोल्ड) में लिया और उसे खींचकर कॉकपिट से बाहर केबिन की तरफ ले आए। बाहर मौजूद अन्य यात्रियों ने तुरंत हमलावर को जमीन पर दबोच लिया।
हमलावर को अलग करने के बाद यानीव हायुन ने खुद विमान के नियंत्रण को संभाला और कंट्रोल व्हील को खींचकर विमान को स्थिर करने का प्रयास किया। उनके प्रयास से विमान का संतुलन सुधरने लगा, जिसके बाद विमान में यात्रा कर रहे एक अन्य पायलट ने कॉकपिट में आकर संचालन अपने हाथ में ले लिया। वहीं केबिन में ज्वीका मानेस और अन्य लोगों ने हमलावर के ही ज़िप-टाई और मल्टीमीडिया हेडफ़ोन के तारों का इस्तेमाल करके उसके हाथ-पैर मजबूती से बांध दिए। काबू में आने के बाद हमलावर क्रू सदस्यों के सामने चिल्लाने लगा, "Kill me, kill me!" यानी "मुझे मार डालो, मुझे मार डालो!"
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और जांच का दायरा
कॉकपिट पर नियंत्रण वापस मिलने के बाद विमान में सवार दो रिजर्व पायलटों ने तुरंत आपातकालीन प्रक्रिया शुरू की और विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित रूप से उतार लिया। संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल ने सरकारी मीडिया को जानकारी दी कि इस घटना के पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे के असली इरादों का पता लगाने के लिए व्यापक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, जांच एजेंसियां विशेष रूप से इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस घटना का संबंध किसी आतंकवादी गतिविधि या उद्देश्य से था।
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पकड़े जाने के बाद हमलावर की चीख-पुकार से साफ था कि वह आत्महत्या करने पर आमादा था और बहुत संभव था कि वह पूरे विमान को मार गिराना चाहता था। नेतन्याहू ने यह भी उल्लेख किया कि हमलावर कथित रूप से चरमपंथी कट्टरता से प्रभावित हुआ था। उन्होंने घायल कैप्टन, यात्रियों और दूसरे क्रू की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके सामूहिक प्रयासों ने 9/11 जैसी भीषण त्रासदी को टाल दिया।
भारतीय कैप्टन की बहादुरी और स्वास्थ्य स्थिति
भारत सरकार ने हमले के दौरान अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा दिखाने के लिए कैप्टन स्मित मच्छार की जमकर सराहना की है। यूएई स्थित भारतीय दूतावास ने कैप्टन के स्वास्थ्य की पुष्टि करते हुए कहा कि वे अच्छी स्थिति में हैं और उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। अस्पताल में उपचार करा रहे कैप्टन स्मित मच्छार ने स्वयं भी भरोसा जताया कि वे जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ और फिट होकर लौटेंगे। 170 से अधिक जिंदगियों को बचाने में उनके अदम्य साहस और यात्रियों की त्वरित कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हो रही है।



















