बाजार में सीफूड खरीदते समय सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना होता है कि जो मछली आप घर ले जा रहे हैं, वह सेहत के लिए सुरक्षित और ताजी है या नहीं। कई बार सामान्य दिखने वाली मछली भी अंदर से बासी हो सकती है, जिससे न सिर्फ उसका स्वाद बिगड़ता है बल्कि फूड पॉइजनिंग और पेट की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मछली की ताजगी और उसकी गुणवत्ता की सही पहचान करने के लिए कुछ आसान शारीरिक लक्षणों और वैज्ञानिक पैमानों को समझना जरूरी है।
गंध से करें पहचान और समझें रासायनिक बदलाव
मछली की ताजगी का सबसे पहला और सटीक पैमाना उसकी महक होती है। ताजी पकड़ी गई मछली से कभी भी असहनीय या सड़ी हुई बदबू नहीं आती, बल्कि उसमें साफ पानी अथवा समुद्र जैसी हल्की प्राकृतिक सुगंध महसूस होती है। जब मछली लंबे समय तक रखी रहती है और बासी होने लगती है, तो उसमें से बहुत तीखी, खट्टी या खराब बदबू आने लगती है। ऐसा मछली के ऊतकों में ट्राइमिथाइलअमाइन नामक रसायन की मात्रा तेजी से बढ़ने के कारण होता है, जो उसके सड़ने का स्पष्ट संकेत है।
आंखों की चमक और बनावट को गौर से देखें
पूरी मछली खरीदते समय उसकी आंखें उसकी ताजगी का आईना होती हैं। अच्छी और ताजी मछली की आंखें बिल्कुल साफ, चमकदार और बाहर की ओर हल्की उभरी हुई दिखाई देती हैं। इसके विपरीत, अगर मछली की आंखें धुंधली नजर आ रही हों, अंदर की तरफ धंसी हुई हों या पूरी तरह बेजान दिखें, तो यह साफ इशारा है कि मछली काफी पुरानी हो चुकी है और उसे खरीदने से बचना चाहिए।
मांस के लचीलेपन और बनावट की जांच
मछली के शरीर को छूकर और हल्का दबाकर उसकी ताजगी तुरंत परखी जा सकती है। ताजी मछली का मांस काफी सख्त, गठीला और लचीला होता है। जब आप अपनी उंगली से उसके मांस को हल्का दबाते हैं, तो वह तुरंत अपनी पुरानी स्थिति में वापस आ जाता है। यदि मांस को दबाने पर गड्ढा या निशान बना रह जाए अथवा उसका मांस अत्यधिक ढीला और चिपचिपा लगे, तो समझ लें कि मछली बहुत दिनों से रखी हुई है।
गलफड़ों का रंग देता है ताजगी का पक्का सुराग
पूरी मछली की जांच करते वक्त उसके गलफड़ों का निरीक्षण जरूर करना चाहिए। ताजी मछली के गलफड़े हमेशा चमकीले लाल या हल्के गुलाबी रंग के होते हैं, जो स्वस्थ रक्त संचार और ताजगी का प्रमाण हैं। समय बीतने के साथ गलफड़ों का रंग फीका पड़ने लगता है और वे भूरे या स्लेटी रंग में बदल जाते हैं, जो बासी होने की निशानी है।
फार्म की मछली बनाम खुले पानी की जंगली मछली
मछली चुनते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि वह खुले प्राकृतिक पानी से पकड़ी गई है या किसी फार्म में पाली गई है। इन दोनों के पोषण स्तर में काफी फर्क हो सकता है। खुले पानी की जंगली मछलियों में आमतौर पर ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा काफी अच्छी पाई जाती है, जबकि फार्म में पाली गई मछलियों में कुल फैट का अनुपात अलग हो सकता है। इसलिए पैकेज्ड मछली लेते समय उसके लेबल और पोषण संबंधी जानकारी को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
मर्करी की मात्रा और सेहत से जुड़ी सावधानियां
मछलियों में मर्करी यानी पारे की मौजूदगी एक गंभीर स्वास्थ्य पहलू है। खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर रहने वाली बड़ी शिकारी मछलियों में मर्करी का स्तर काफी अधिक जमा हो जाता है। उदाहरण के तौर पर शार्क, किंग मैकेरल और स्वॉर्डफिश जैसी मछलियों में मर्करी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इनके सेवन से बचना चाहिए। इसके स्थान पर कम मर्करी वाली किस्मों जैसे सैल्मन, सार्डिन और तिलापिया का चुनाव करना सुरक्षित माना जाता है।
फ्रोजन मछली के पोषण और स्टोरेज की हकीकत
अक्सर लोग फ्रोजन मछली को कमतर मान लेते हैं, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। यदि मछली को पकड़ने के तुरंत बाद उचित तापमान पर वैज्ञानिक तरीके से फ्रीज किया गया हो, तो उसके प्राकृतिक पोषक तत्व लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया है कि सही तरीके से रखी गई फ्रोजन मछली और तुरंत बाजार पहुंची ताजी मछली के ओमेगा-3 स्तर में कोई खास अंतर नहीं होता। इसलिए फ्रोजन मछली खरीदते समय पैकेट की सील, स्टोरेज की स्थिति और लेबल पर दर्ज विवरण की सावधानीपूर्वक जांच करें।


















