इरान और अमेरिका के बीच चल रहे गंभीर सैन्य संघर्ष में पिछले तीन दिनों से दोनों तरफ से कोई नया हमला नहीं हुआ है। इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया कि दोनों देशों के बीच बेहद सौहार्दपूर्ण बातचीत चल रही है। उन्होंने युद्ध की समाप्ति की उम्मीद जताते हुए कहा कि ऐसा होने की अच्छी संभावना मौजूद है। हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर मध्यस्थता की यह कोशिश नाकाम रहती है तो वॉशिंगटन फिर से वही सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा जो वह पहले कर रहा था।
तेहरान का इनकार और मध्यस्थता के प्रयास
डोनाल्ड ट्रंप के इन दावों के विपरीत तेहरान ने किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत चलने की बात से साफ इनकार किया है। अमरीकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उन्होंने शुक्रवार को ईरान पर किए जाने वाले अमरीकी हमलों को रोकने का फैसला इसलिए लिया था क्योंकि मध्यस्थता कर रहे देशों ने उनसे बातचीत को एक और अवसर देने का अनुरोध किया था। यह अस्थायी युद्धविराम दो हफ्ते तक चले लगातार हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद आया है, जिसने जून महीने में तय हुए समझौते को पूरी तरह से समाप्त कर दिया था। उस समय अमरीकी सेना ने कहा था कि इन हमलों का मकसद फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक तेल मार्ग पर व्यावसायिक जहाजों के लिए ईरानी खतरे को कम करना है।
अमरीकी गोला बारूद और सैन्य तैयारियों पर ट्रंप का बयान
पिछले पांच महीनों से जारी इस संघर्ष के बीच अमरीकी मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि पेंटागन का गोला-बारूद का भंडार खत्म होने की कगार पर है। डोनाल्ड ट्रंप ने इन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमरीका के पास पर्याप्त मात्रा में सैन्य सामग्री और मध्य-स्तरीय हथियार मौजूद हैं, जिनका उपयोग वे किसी भी स्थिति में कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पैट्रियट एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों का जिक्र करते हुए कहा कि इनका उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने भी रक्षा तैयारियों पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमरीकी सेना के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मौजूद है। प्रवक्ता के अनुसार, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने यह साबित कर दिया है कि अमरीका को चुनौती देने का क्या अंजाम होता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने अमरीकी रक्षा ठेकेदारों को देश में ही बने हथियारों के उत्पादन को लगातार बढ़ाने का निर्देश दिया है।
फरवरी से अब तक संघर्ष का पूरा घटनाक्रम
अमरीका और इज़राइल ने इस साल 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों और इज़राइल के भीतर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए थे। इसके बाद जून में दोनों पक्षों ने सैन्य गतिविधियों को रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अगले 60 दिनों के भीतर स्थायी युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
हालांकि, यह शांति लंबे समय तक नहीं टिक सकी। 13 जुलाई को ईरानी बलों द्वारा समुद्री मार्ग में तेल टैंकरों पर हमला करने के बाद वॉशिंगटन ने फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी। जवाब में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में अमरीकी सैन्य सुविधाओं पर हमले किए जिसमें चार अमरीकी सैनिक मारे गए। वहीं ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अमरीकी हमलों में दर्जनों ईरानी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान जा चुकी है।



















