इराक की सरजमीं पर हुए संयुक्त सैन्य हमलों को लेकर बगदाद और वॉशिंगटन के बीच राजनयिक तल्खी बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को इराकी प्रशासन ने पूरी तरह झूठा करार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह सैन्य कार्रवाई इराकी नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाकर की गई थी। इराक सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी जानकारी या सहमति के बिना यह कार्रवाई की गई, जिसमें पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के कम से कम 20 लड़ाके मारे गए हैं। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने सऊदी अरब की अपनी तय यात्रा को स्थगित करने का फैसला किया है।
सैन्य हमलों पर आधिकारिक अनुमति का स्पष्ट इंकार
इराकी सरकार के प्रवक्ता हैदर अल-अबूदी ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि बगदाद प्रशासन ने किसी भी विदेशी ताकत को अपनी सीमाओं के अंदर सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति प्रदान नहीं की है। हैदर अल-अबूदी ने कहा, "इराकी सरकार ने अपनी सीमा के भीतर किसी भी स्थान या समूह पर हमला करने की कोई अनुमति नहीं दी है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों को इन हमलों के अंजाम दिए जाने से पहले कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। इससे पहले बुधवार के दिन भी इराकी प्रशासन ने अपने संप्रभु क्षेत्र में हुई इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसकी आधिकारिक निंदा की थी।
ड्रोन हमलों के आरोपों पर सबूत की मांग
एक तरफ जहां अमेरिकी और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों की कार्रवाई पर विवाद जारी है, वहीं इराक ने सऊदी अरब से उन दावों के प्रमाण पेश करने को कहा है जिनमें उसकी जमीन का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि सोमवार और मंगलवार को इराक की सीमा के भीतर से छोड़े गए ड्रोन ने राजधानी रियाद और वहां के कई अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया था। इन आरोपों का जवाब देते हुए इराकी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता सबाह अल-नुमान ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश या एजेंसी ने अब तक ऐसे कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं जो यह साबित कर सकें कि ड्रोन इराक से उड़ाए गए थे।
राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रुख
सबाह अल-नुमान ने इराक की सुरक्षा नीति को रेखांकित करते हुए दोहराया कि देश की जमीन का इस्तेमाल किसी भी गैर-सरकारी अथवा सशस्त्र संगठन द्वारा पड़ोसी मुल्कों पर हमला करने के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इराक अपनी संप्रभुता का हनन भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका कहना था कि सरकार अपनी सीमाओं के अंदर से होने वाली किसी भी एकतरफा सशस्त्र गतिविधि को रोकेगी और साथ ही बाहर से होने वाले किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का पुरजोर विरोध करेगी। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इराक का यह सख्त रुख क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


















