ईरान और ओमान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए एक समझौते का मसौदा तैयार कर लिया गया है। इस अहम समुद्री रास्ते पर आवाजाही बहाल करने को लेकर वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आगामी एक से दो दिनों के भीतर इस संबंध में किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच रोम में हुई दो दिवसीय बातचीत सकारात्मक माहौल में समाप्त हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट दूर होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट की पृष्ठभूमि और कारण
इस वैश्विक विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इस सैन्य कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य तेहरान में सरकार को बदलना और उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना था। हालांकि, युद्ध के ये शुरुआती लक्ष्य हासिल नहीं हो सके और समय के साथ यह संघर्ष स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण हासिल करने की होड़ में बदल गया।
लड़ाई के दौरान ईरानी हमलों के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से होने वाला व्यापारिक जहाजों का परिवहन लगभग ठप हो गया था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति अचानक रुकने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापक अनिश्चितता फैल गई थी। इसके चलते ईंधन और विभिन्न दैनिक आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
रोम वार्ता और समझौते का प्रस्तावित मसौदा
इटली की राजधानी रोम में आयोजित दूसरे दिन की कूटनीतिक बैठक को जमीनी घटनाक्रमों के कारण समय से पहले समाप्त करना पड़ा। इसके बावजूद अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चा बहुत ही सकारात्मक रही। यदि दोनों पक्षों को आवश्यकता महसूस होती है, तो गुरुवार को बातचीत का अगला दौर फिर से शुरू किया जा सकता है।
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, ईरान और ओमान के वार्ताकारों द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब इस समझौते को औपचारिक रूप से लागू करने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोज्तबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। यह प्रस्तावित समझौता एक अस्थाई व्यवस्था होगी, जिसके लागू होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर रुकी हुई वार्ता दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है।
अमरीकी शर्तें और कच्चे तेल के बाजार पर असर
इस कूटनीतिक प्रगति के बीच अमेरिका ने अपना रुख स्पष्ट रखा है। अमेरिका ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह ऐसी किसी भी व्यवस्था का समर्थन नहीं करेगा, जिसमें ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण मिले या वह वहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा शुल्क अथवा कोई अन्य शुल्क वसूले।
जलडमरूमध्य के खुलने की संभावनाओं की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में शुरुआती चरण में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। हालांकि, बाद में बाजार में कीमतें फिर से संभल गईं और बुधवार को ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। हालांकि यह कीमत युद्ध के चरम समय की तुलना में अभी भी काफी कम बनी हुई है।



















