यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के साथ-साथ लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंजाम देने का दावा किया है। शनिवार को राजधानी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीकी इलाके से काले धुएं का एक विशाल गुबार आसमान की तरफ उठता देखा गया, जो संभवतः वहां मौजूद ईंधन भंडारण टैंकों से निकल रहा था। यह दृश्य सामने आने से कुछ ही घंटे पहले रियाद के नागरिकों को हवाई हमले की चेतावनी जारी की गई थी और स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई थी। दोनों पक्षों के बीच हालिया सैन्य टकराव बढ़ने के बाद पहली बार आम नागरिकों को इस तरह का सुरक्षा अलर्ट भेजा गया था।
हमलों के बाद रियाद में सायरन और धमाकों की गूंज
सऊदी सिविल डिफेंस की तरफ से रात के वक्त राजधानी रियाद और देश के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में मोबाइल फोन पर आपातकालीन संदेश भेजे गए थे, जिनमें नागरिकों को संभावित खतरे से आगाह किया गया था। बाद में शनिवार सुबह स्थिति सामान्य घोषित करते हुए आल-क्लियर संदेश भी जारी किया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और हुए नुकसान पर सऊदी अरब के आधिकारिक अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
अलर्ट जारी होने के कुछ ही देर बाद राजधानी के विभिन्न हिस्सों में सिलसिलेवार तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। उत्तरी रियाद में रहने वाले 27 वर्षीय एक स्थानीय निवासी ने बताया कि खतरे का सायरन बजने के बाद उनके मकान की खिड़कियां बुरी तरह कांपने लगीं। उन्होंने कहा कि यह मंजर बेहद डरावना था और किसी को भी राजधानी के बीचों-बीच इस स्तर के हमले की आशंका नहीं थी। इस बीच, घटनास्थल पर मौजूद पत्रकारों ने देखा कि दमकल कर्मी सरकारी तेल कंपनी अरामको के एक जले हुए ईंधन टैंक की लपटों को बुझाने की लगातार कोशिश कर रहे थे।
सैन्य प्रवक्ता का दावा और अरामको के ठिकानों पर प्रहार
इंटरनेट पर साझा किए गए एक विस्तृत बयान में हूती सेना के प्रवक्ता याह्या अल-सरिया ने सैन्य कार्रवाई का ब्योरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रियाद में मौजूद संवेदनशील सरकारी और सुरक्षा ठिकानों तथा लाल सागर तट पर स्थित यानबु शहर में सऊदी अरामको तेल और गैस कंपनी की उत्पादन सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए भारी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और मानवरहित ड्रोन तैनात किए गए थे।
प्रवक्ता याह्या अल-सरिया ने इन हमलों को यमन की राजधानी सना को निशाना बनाने की सऊदी अरब की कथित आपराधिक कार्रवाइयों का सीधा जवाब करार दिया। प्रवक्ता ने पहले यह आरोप भी लगाया था कि पिछले सप्ताह के दौरान सऊदी अरब ने यमन के अलग-अलग क्षेत्रों में 300 से अधिक हवाई हमले किए हैं। हूती लड़ाके लंबे समय से सऊदी अरब समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ गृहयुद्ध लड़ रहे हैं और हाल के महीनों में उन्होंने सऊदी सीमा के अंदर कई बार ड्रोन और रॉकेट दागे हैं। इसी हफ्ते संगठन ने यमन के हवाई क्षेत्र में सऊदी अरब का एक लड़ाकू विमान मार गिराने का दावा भी किया था।
जमीनी मोर्चे पर भीषण संघर्ष और 48 मौतें
सीमा पार हवाई हमलों के साथ-साथ यमन के जमीनी मोर्चों पर भी दोनों गुटों के बीच भीषण खूनी संघर्ष जारी है। यमन गृहयुद्ध में आमने-सामने खड़ी दोनों सेनाओं से जुड़े सैन्य सूत्रों के अनुसार, शनिवार को हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 48 लोगों की जान चली गई।
हूती संगठन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि इस लड़ाई में उनके 31 लड़ाके मारे गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, यमन सरकार से जुड़े सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि शनिवार को हुए इस भीषण संग्राम में उनके 17 सैनिकों की मौत हो गई। यह ताजा हताहत आंकड़ा दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच सुलह के प्रयास पूरी तरह नाकाम हो चुके हैं और टकराव लगातार जानलेवा मोड़ ले रहा है।
लाल सागर में समुद्री नाकेबंदी और रणनीतिक बंदरगाहों पर कब्जा
ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के अलावा हूती विद्रोहियों ने समुद्री व्यापार मार्गों पर भी अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली है। विद्रोही गुट ने हाल ही में सामरिक रूप से बेहद अहम मोखा बंदरगाह शहर और पेरीम द्वीप पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह पूरा जलमार्ग लाल सागर का मुख्य प्रवेश द्वार है, जिसका इस्तेमाल खाड़ी देश एशिया और यूरोप के बाजारों में कच्चे तेल के निर्यात के लिए करते हैं।
हूती संगठन का कहना है कि उनकी यह नौसैनिक नाकेबंदी उत्तर-पश्चिमी यमन के हूती-नियंत्रित बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सऊदी अरब द्वारा थोपी गई नाकेबंदी का सीधा प्रतिशोध है। जब से अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन लगभग ठप हुआ है, तब से सऊदी तेल टैंकर और मालवाहक जहाज अपने अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए लाल सागर के इसी समुद्री मार्ग पर पूरी तरह निर्भर हो चुके हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में गहराती अनिश्चितता
सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे और समुद्री परिवहन मार्गों पर लगातार बढ़ते हमलों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंताएं अत्यधिक बढ़ा दी हैं। इस गंभीर भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति शृंखला बुरी तरह चरमरा गई है। अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख दिग्गज कंपनी जेपी मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी इस युद्ध के चलते कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर पड़ने वाले असर का सटीक अनुमान लगाना असंभव होता जा रहा है। जेपी मॉर्गन ने निवेशकों को भेजे अपने एक असाधारण शोध नोट में स्वीकार किया कि मौजूदा हालात इतने जटिल और अप्रत्याशित हो चुके हैं कि इस युद्ध के अंतिम परिणाम और तेल बाजार पर इसके प्रभाव का कोई भी वित्तीय मॉडल तैयार नहीं किया जा सकता।





















