ईरान के साथ जारी व्यापक सैन्य टकराव के बीच अमेरिका के सैन्य शस्त्रागार पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है, जिससे महत्वपूर्ण युद्धक गोला-बारूद के भंडार में गंभीर कमी दर्ज की गई है। रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की एक स्वतंत्र निगरानी समीक्षा ने इस बात की पुष्टि की है कि लगातार अभियानों के कारण रणनीतिक स्तर पर हथियारों की कमी पैदा हो गई है और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। यह आधिकारिक आकलन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस रुख के ठीक विपरीत सामने आया है, जिसमें वे अमेरिकी सैन्य संसाधनों में किसी भी प्रकार के अभाव से लगातार इनकार करते रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक तौर पर यह दोहराते रहे हैं कि अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का भंडार व्यावहारिक रूप से असीमित है और किसी भी कमी की चर्चा को पूरी तरह आधारहीन करार देते रहे हैं। हालांकि, रक्षा विभाग के स्वतंत्र निगरानी तंत्र द्वारा जुटाए गए वित्तीय और परिचालन आंकड़े एक अलग ही जमीनी हकीकत पेश करते हैं। जांच से पता चलता है कि रक्षा तंत्र तेजी से उन महत्वपूर्ण प्रणालियों को खाली कर रहा है जो न केवल आक्रामक हमलों के लिए बल्कि रक्षात्मक सुरक्षा छतरी के लिए भी आवश्यक हैं।
हथियारों पर भारी भरकम खर्च और रणनीतिक भंडार पर दबाव
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से लेकर 30 जून की अवधि के दौरान अमेरिका ने इस युद्ध पर कुल 33.4 अरब डॉलर खर्च किए, जो ब्रिटिश मुद्रा में लगभग 24.7 अरब पाउंड के बराबर है। इस भारी भरकम बजट में से 22 अरब डॉलर से अधिक की राशि केवल गोला-बारूद और मिसाइल प्रणालियों की खरीद और तैनाती पर खर्च की गई। इस अंधाधुंध खपत के चलते अब पेंटागन को रणनीतिक इन्वेंट्री संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसे आधिकारिक रिपोर्ट में स्ट्रेटेजिक इन्वेंट्री शॉर्टफॉल के रूप में रेखांकित किया गया है।
सैन्य गोपनीयता के नियमों के कारण सामान्य तौर पर इस प्रकार के हथियारों के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाते, लेकिन इस रिपोर्ट ने पहली बार अमेरिकी सैन्य भंडार की वास्तविक स्थिति की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष झलक प्रदान की है। युद्ध के मैदान में अमेरिकी बलों ने लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली जमीनी मिसाइलों के साथ-साथ आने वाले ईरानी हमलों को हवा में ही ध्वस्त करने वाली वायु रक्षा मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। मैसाचुसेट्स स्थित रेथियॉन के मुख्यालय में तैयार की जाने वाली पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली का इस संघर्ष में विशेष रूप से अत्यधिक दोहन हुआ है।
इंटरसेप्टर मिसाइलों का घटता स्तर और विनिर्माण में अड़चनें
हथियारों के इस संकट पर केवल आंतरिक निगरानी रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र रणनीतिक अध्ययन भी चिंता जता चुके हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज यानी सीएसआईएस के जुलाई के अंत में आए एक आकलन ने संकेत दिया था कि पैट्रियट मिसाइलों और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस यानी थाड जैसी उन्नत इंटरसेप्टर प्रणालियों का भंडार आधे से भी अधिक घट चुका है। इन मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को निष्प्रभावी करने के लिए किया गया था।
इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट ने सुरक्षा कारणों से यह तो स्पष्ट नहीं किया कि अब कितनी मिसाइलें और हथियार शेष बचे हैं, लेकिन इसने विनिर्माण क्षेत्र में आपूर्ति की बाधाओं को स्पष्ट तौर पर उजागर किया है। रक्षा विनिर्माण आधार यानी इंडस्ट्रियल बेस इन मिसाइलों के तेजी से पुनः उत्पादन की मांग को पूरा करने में भारी अड़चनों से जूझ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए रक्षा विभाग अब खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और विनिर्माण अवधि को कम करने के प्रयासों में जुटा है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
प्रशासनिक दावों और रक्षा नेतृत्व के बयानों में विरोधाभास
इस संकट के बीच रक्षा प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व और स्वतंत्र निगरानी निष्कर्षों में गहरा मतभेद देखने को मिला है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 4 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए गोला-बारूद की कमी से संबंधित समाचारों को पूरी तरह गलत बताया था। इसी क्रम में 3 सितंबर को ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका के पास गोला-बारूद की असीमित आपूर्ति मौजूद है और देश किसी भी तरह की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए लगातार भंडार जुटा रहा है।
दूसरी ओर, वित्तीय आंकड़ों का लेखा-जोखा बताता है कि युद्ध केवल हथियारों की खपत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उपकरणों का भारी नुकसान भी हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न अभियानों और परिस्थितियों में 3.7 अरब डॉलर के सैन्य उपकरण नष्ट हुए हैं, जबकि अन्य गतिविधियों पर 7.4 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च दर्ज किया गया है।
विमानों और ड्रोनों का नुकसान तथा बदलता राजनीतिक परिदृश्य
नुकसान की सूची में केवल पारंपरिक साजो-सामान ही नहीं, बल्कि अमेरिका के सबसे उन्नत हथियार भी शामिल हैं। युद्ध के दौरान अमेरिका ने चार एफ-15ई लड़ाकू जेट, एक अत्यंत परिष्कृत एफ-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर और 30 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन विभिन्न परिस्थितियों में गंवा दिए हैं। इतने बड़े पैमाने पर आधुनिक सैन्य संपत्तियों का नष्ट होना तकनीकी और वित्तीय दोनों मोर्चों पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से हमले शुरू किए थे, तब ट्रंप ने बार-बार यह भरोसा जताया था कि यह संघर्ष कुछ ही हफ्तों के भीतर समाप्त हो जाएगा। हालांकि, समय बीतने के साथ उनका रुख बदलता दिखा है और हाल ही में उन्होंने यह संकेत दिया कि यह सैन्य अभियान अमेरिका में होने वाले नवंबर मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद तक खिंच सकता है।
इस लंबे खिंचते युद्ध को लेकर अमेरिकी जनता के भीतर असंतोष भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। सितंबर की शुरुआत में जारी रॉयटर्स और इप्सॉस के एक संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 23 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि ईरान के साथ शत्रुता शुरू होने से पहले की तुलना में आज अमेरिका मजबूत स्थिति में है। यहां तक कि रिपब्लिकन पार्टी के मतदाताओं में भी केवल आधे लोग ही इस बात से सहमत दिखे कि युद्ध ने अमेरिका की स्थिति को सुधारा है, जिससे आगामी चुनावों से पहले युद्ध की घरेलू लोकप्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



















