मिस्र में आम लोगों के सामने खड़ी आर्थिक चुनौतियों और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के बीच एक लोकप्रिय अमेरिकी कार्टून चरित्र अचानक सरकार विरोधी व्यंग्य का बड़ा माध्यम बन गया है। निकलोडियन के जाने-माने एनिमेटेड किरदार स्पंजबॉब स्क्वेयरपेंट्स के डिजिटल प्रारूप को लेकर इंटरनेट पर एक विशाल व्यंग्यात्मक लहर शुरू हुई है, जिसमें लोग देश की गिरती आर्थिक स्थिति, बढ़ती महंगाई और नागरिक पाबंदियों पर तीखे कटाक्ष कर रहे हैं। फेसबुक पर शुरू हुए इस सिलसिले ने कुछ ही दिनों में लाखों लोगों को जोड़ लिया, जिससे अब यह सुरक्षा एजेंसियों और सत्ता समर्थक हलकों की जांच के दायरे में आ गया है।
समुद्री दुनिया के जरिए जमीन की हकीकत पर तंज
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सोशल मीडिया पर 'कंप्लेंट्स ऑफ द रेजिडेंट्स ऑफ अल-हामूर बॉटम' नाम के एक फेसबुक समूह से हुई थी। अल-हामूर बॉटम दरअसल स्पंजबॉब के काल्पनिक पानी के भीतर बसे घर बिकिनी बॉटम का अरबी नाम है। उपयोगकर्ताओं ने इस समुद्री दुनिया को मिस्र के रोजमर्रा के जीवन के साथ जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से तैयार तस्वीरें और व्यंग्य साझा करने शुरू कर दिए।
इन तस्वीरों में मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी को पैसे के लालची किरदार मिस्टर क्रैब्स के रूप में दिखाया गया। वहीं समुद्र की तलहटी को बेतरतीब तरीके से दौड़ते ऑटो-रिक्शा यानी टुक-टुक से अटा हुआ दर्शाया गया। कुछ तस्वीरों में स्कूल जाने वाली छात्रा मछलियों को आवारा नर मछलियों द्वारा परेशान किए जाने के दृश्य गढ़े गए, जो असल जिंदगी में महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और सुरक्षा की कमी को उजागर करते हैं। अन्य पोस्ट्स के कमेंट बॉक्स में नागरिकों ने कथित रूप से भ्रष्ट मंत्रियों, आसमान छूते मकान के किराए और खस्ताहाल स्वास्थ्य तथा शिक्षा व्यवस्था पर खुलकर नाराजगी जाहिर की।
18 लाख फॉलोअर्स और कानूनी शिकंजा
मात्र दो हफ्तों के भीतर इस फेसबुक समूह से 18 लाख से अधिक लोग जुड़ गए। व्यंग्य का स्तर इतना धारदार था कि एक कार्टून में आंतरिक मंत्रालय के कर्मियों को पानी के भीतर यह चेतावनी देते हुए दिखाया गया कि 'सावधान रहें'। इसके तुरंत बाद, सरकारी स्तर पर जांच और निगरानी की चर्चाओं के बीच इस मुख्य समूह को बंद कर दिया गया।
समूह की प्रशासक होने का दावा करने वाली एक किशोरी ने इंटरनेट पर एक वीडियो जारी कर सफाई दी। उसने स्पष्ट किया कि वह और उसके साथी क्रिएटर उन राजनीतिक पोस्ट्स के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, जो अन्य सदस्यों ने अलग बने ग्रुप्स में साझा की थीं। लेकिन तब तक इस मुद्दे ने बड़ा राजनीतिक रंग ले लिया था।
सरकार समर्थक मीडिया चैनलों और टेलीविजन एंकरों ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड इस वायरल ट्रेंड का फायदा उठा रहा है। उल्लेखनीय है कि 2013 में राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के एक साल के शासन के खिलाफ हुए भारी जनविरोध के बाद मिस्र की सेना ने ब्रदरहुड समर्थित सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। जाने-माने टॉक शो प्रस्तोता तामेर अब्देल मोनाइम ने अपने एक कार्यक्रम में जोर देकर कहा कि अल-हामूर बॉटम का ट्रेंड ब्रदरहुड से जुड़ा है और इसका एकमात्र मकसद भ्रम फैलाना है।
हंसी के पीछे छिपा गहरा दर्द
यद्यपि अत्यधिक संवेदनशील राजनीतिक टिप्पणियों वाली कई पोस्ट्स अब सोशल मीडिया से हटा दी गई हैं, फिर भी इसका लोकप्रिय हिस्सा व्यापक रूप से फैल रहा है। मिस्र की मशहूर हस्तियों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कई ब्रांड्स ने भी अल-हामूर बॉटम से जुड़े AI मीम्स साझा करना शुरू कर दिया।
मिस्र की रेडियो प्रस्तोता रबाब कमाल ने अपने फेसबुक फॉलोअर्स से बात करते हुए इस हंसी के पीछे के सच को सामने रखा। उन्होंने कहा, "बिकिनी बॉटम को लेकर हो रही यह हंसी जरूरी नहीं कि खुशी का संकेत हो। लोग इसलिए हंस रहे हैं क्योंकि हालात इतने बेतुके हो चुके हैं कि अब हंसी ही एकमात्र संभव प्रतिक्रिया लगती है।"
11 करोड़ से अधिक की आबादी वाला मिस्र सबसे अधिक आबादी वाला अरब देश है। 2011 के अरब स्प्रिंग के बाद से यह देश सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। मुद्रा के अवमूल्यन के कारण आम नागरिक भारी महंगाई से जूझ रहे हैं, जिससे उनका जीवन स्तर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, क्षेत्रीय अस्थिरता ने स्वेज नहर के राजस्व, पर्यटन और खाड़ी देशों में काम करने वाले मिस्र के नागरिकों से आने वाले धन को गहरा झटका दिया है। ईंधन के दाम लगातार बढ़े हैं और इसी गर्मी में सरकार ने बिजली की दरों में 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है।
कड़ी पाबंदियां और अभिव्यक्ति पर संकट
मिस्र में जब से सीसी के नेतृत्व में सेना दोबारा सत्ता में आई है, सार्वजनिक असहमति के प्रति शासन का रुख बेहद कड़ा हो गया है। सरकार किसी भी प्रकार की अस्थिरता या अपनी सत्ता के प्रति चुनौती से आशंकित रहती है। ऐसे माहौल में स्पंजबॉब और उसके जलीय साथियों का अवास्तविक हास्य युवाओं, विशेष रूप से मिलेनियल्स और जेनरेशन जेड के लिए बिना सीधे टकराव के अपनी बात कहने का जरिया बन गया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के क्षेत्रीय शोधकर्ता महमूद शलाबी ने बताया कि मिस्र की सरकार लंबे समय से ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर शिकंजा कस रही है। उन्होंने कहा कि हजारों लोग केवल इंटरनेट पर अपने विचार व्यक्त करने के कारण वर्षों से बिना मुकदमे के हिरासत में सड़ रहे हैं, क्योंकि उनके विचार सरकार द्वारा मान्य नहीं थे। शलाबी के अनुसार, यह दमन केवल राजनीतिक विरोधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों, धर्म न मानने वालों, एलजीबीटीआई माने जाने वाले लोगों और अस्पष्ट नैतिकता कानूनों के तहत निशाना बनाई जाने वाली महिला सोशल मीडिया क्रिएटर्स तक फैला हुआ है।
हालांकि राष्ट्रपति सीसी बार-बार यह दावा करते हैं कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध हैं और नागरिक अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन इस पर बहुत कम लोग भरोसा करते हैं। पिछले महीने के अंत में राष्ट्रपति ने परोक्ष रूप से इस स्पंजबॉब ट्रेंड की ओर इशारा करते हुए सोशल मीडिया की अराजकता की बात कही थी और कहा था कि सार्वजनिक चर्चाएं राष्ट्रीय चुनौतियों की गंभीरता को समझने में विफल रही हैं।
मिस्र की राज्य सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध या सरकार विरोधी गतिविधियों की सूचना देने को बढ़ावा देती हैं। काहिरा 24 की जानकारी के मुताबिक, एक वकील ने अल-हामूर बॉटम से जुड़े सोशल मीडिया खातों और सामग्री के प्रशासकों, संचालकों, वित्तपोषकों और योगदानकर्ताओं के खिलाफ औपचारिक कानूनी शिकायत दर्ज करा दी है। वकील ने आर्थिक परिस्थितियों और निर्णयों को व्यंग्यात्मक ढंग से चित्रित करने के मामले की जांच की मांग की है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। बढ़ते दबाव को देखते हुए ऐसा लगता है कि मिस्र की पृष्ठभूमि में उतरा यह लोकप्रिय किरदार जल्द ही इंटरनेट से ओझल होने पर मजबूर हो जाएगा।



















