सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मंगलवार शाम पवित्र शहर मक्का के दक्षिणी क्षेत्र में हवा में ही एक हूती ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी है। इस्लामी आस्था के सबसे मुकद्दस केंद्र और हज यात्रा के मुख्य स्थल मक्का की दिशा में हुए इस कथित हमले की सऊदी गठबंधन ने कड़े शब्दों में निंदा की है। गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने पवित्र स्थल के करीब इस तरह की सैन्य गतिविधि को बेहद शर्मनाक हरकत करार देते हुए चेतावनी दी कि उनकी सेनाएं आतंकवादी हूती मिलिशिया और उनके शत्रुतापूर्ण कृत्यों के खिलाफ आवश्यक व सख्त निवारक कदम उठाने में कोई संकोच नहीं करेंगी। मंगलवार को इस घटनाक्रम के बीच सऊदी प्रशासन ने मक्का और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर जेद्दा सहित कई पश्चिमी इलाकों में प्रोजेक्टाइल के संभावित खतरे को देखते हुए संक्षिप्त सुरक्षा अलर्ट भी जारी किए थे।
पवित्र स्थलों पर खतरे का हूती गुट ने किया खंडन
यमन के अधिकांश पश्चिमी हिस्से पर काबिज ईरान समर्थित हूती सशस्त्र समूह ने मक्का को निशाना बनाने के दावे को पूरी तरह खारिज किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने सऊदी अरब पर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने और झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यमन की तरफ से पवित्र स्थलों को रत्ती भर भी कोई खतरा नहीं है। सरिया ने स्पष्ट किया कि उनके सैन्य अभियान केवल तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाते हैं, जिनका मुकद्दस मजहबी मुकामों से कोई ताल्लुक नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि हूतियों ने बीते सप्ताह अपने नियंत्रण वाले इलाके पर सऊदी अरब द्वारा किए गए 450 से अधिक हवाई हमलों के जवाब में सऊदी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। हूती प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि उनके लड़ाकों ने मारिब प्रांत के ऊपर एक सऊदी लड़ाकू विमान को मार गिराया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा परामर्श
पवित्र शहर मक्का और मदीना प्रांत के निकटवर्ती क्षेत्रों में सैन्य खतरे की खबरों पर 57 देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने मक्का और मदीना प्रांत, जहां इस्लाम का दूसरा सबसे पवित्र स्थल स्थित है, पर हमलों को अस्वीकार्य और असहनीय उल्लंघन बताया। दूसरी ओर, सुरक्षा हालात की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा पर पुनर्विचार करने की एक औपचारिक एडवाइजरी जारी की है। अमेरिकी राजनयिक मिशन ने आगाह किया कि हूती हमलों में शहरों, नागरिक बुनियादी ढांचे, हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों, राजनयिक परिसरों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया है, जिससे वहां सुरक्षा जोखिम काफी बढ़ गया है।
बाब अल-मंदाब और लाल सागर में बदलता शक्ति संतुलन
जमीनी हालात पर नजर डालें तो हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी समर्थित सरकार समर्थक बलों को पीछे धकेलते हुए यमन के लाल सागर तट के बड़े भूभाग पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। पिछले सप्ताह हूतियों ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में स्थित पेरीम द्वीप पर कब्जा कर लिया था। बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है, जो लाल सागर और स्वेज नहर के जरिए एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री शिपिंग मार्ग का दक्षिणी सिरा है। हालांकि हूतियों ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए कोई सीधा खतरा पैदा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह साफ कर दिया कि वे सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे।
ऊर्जा सुरक्षा और तेल परिवहन पर गहराता संकट
सऊदी अरब के लिए लाल सागर का समुद्री गलियारा जीवनरेखा बन चुका है, विशेष रूप से तब से जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। इस भू-राजनीतिक अवरोध के बाद सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए पूरी तरह से लाल सागर मार्ग पर निर्भर हो गया था। संकट तब और गहरा गया जब सऊदी अरब की बेहद महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद बंद करना पड़ा। यह पाइपलाइन खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाने का काम कर रही थी। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों को जिम्मेदार ठहराया है। तकनीकी जानकारों का आकलन है कि इस पाइपलाइन की मरम्मत करने और उसे पूरी तरह बहाल करने में एक महीने से अधिक का समय लग सकता है, हालांकि अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने मंगलवार को उम्मीद जताई कि कुछ ही दिनों के भीतर इस पाइपलाइन से तेल का प्रवाह फिर से शुरू हो जाना चाहिए।
राजनयिक रस्साकशी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने व्यक्तिगत तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई करने का आग्रह किया है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल अमेरिकी सेना को सीधे संघर्ष में झोंकने से इनकार किया है और इसके बदले खुफिया जानकारी तथा टारगेट पहचानने में सहायता देने की पेशकश की है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के सिलसिले में सऊदी अरब और यमन गणराज्य की सरकार के साथ निरंतर बातचीत कर रहा है।
इसी बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में यमन की सरकार और सऊदी अरब दोनों ने हूतियों के खिलाफ अधिक निर्णायक और सख्त कदम उठाने की जोरदार मांग की। दोनों पक्षों ने हूतियों पर आरोप लगाया कि वे आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य का रास्ता रोक रहे हैं। सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने इस बात पर पूर्ण सहमति जताई कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में किसी भी बड़े व्यवधान को रोकने के लिए लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता को हर हाल में सुरक्षित और निर्बाध रखा जाना चाहिए।
गंभीर मानवीय त्रासदी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सैन्य संघर्ष का सबसे खौफनाक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के आंकड़ों के मुताबिक, हूतियों और सरकार समर्थक सुरक्षा बलों के बीच छिड़ी इस हालिया जंग के कारण यमन में 90,000 से अधिक लोग बेघर होकर विस्थापित हो चुके हैं। संस्था की महानिदेशक एमी पोप ने पिछले सप्ताह चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस विनाशकारी संघर्ष में कई परिवारों को दूसरी या तीसरी बार पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और अब उनके पास जीवनयापन के लिए कुछ भी नहीं बचा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी रविवार को आंकड़े जारी कर बताया कि अगस्त की शुरुआत से अब तक कम से कम 500 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें से 297 लोग सिर्फ पिछले सप्ताह की हिंसा में मारे गए।
यमन का यह खूनी गृहयुद्ध साल 2014 में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से तत्कालीन सरकार को बेदखल कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। यह संघर्ष 2015 में तब बहुत बड़े पैमाने पर भड़क उठा, जब सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब देशों के गठबंधन ने सरकार के शासन को बहाल करने के लिए सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस पूरे संघर्ष में अब तक 150,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और इसने दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है, जहां 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को किसी न किसी रूप में मानवीय सहायता की सख्त आवश्यकता है। दोनों पक्षों के बीच बना चार साल पुराना अनौपचारिक संघर्षविराम जुलाई में उस समय पूरी तरह चरमरा गया जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध की घोषणा कर दी और सऊदी हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं व लाल सागर में तेल टैंकरों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले शुरू कर दिए। हूतियों ने अपने इन हमलों को अपने क्षेत्रों के बंदरगाहों व हवाई अड्डों पर सऊदी अरब द्वारा की गई नाकेबंदी और सना हवाई अड्डे पर सऊदी हवाई हमले का सीधा प्रतिशोध बताया था।



















