मिजोरम में शुक्रवार को SUMAN रोडमैप 2030 का शुभारंभ किया गया। इस व्यापक योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, ताकि माताओं और नवजात शिशुओं की होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को पूरी तरह से रोका जा सके।
राज्य स्तर पर समीक्षा बैठक में हुई शुरुआत
इस नई पहल की शुरुआत आइजोल में आयोजित रिप्रोडक्टिव, मैटरनल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हेल्थ कार्यक्रम की एक राज्य-स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान की गई। राज्य की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री लालरिनपुईई ने इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। यह रोडमैप केंद्र सरकार की सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पहल का एक हिस्सा है, जिसे मूल रूप से साल 2019 में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल की गारंटी देने के लिए शुरू किया गया था।
लक्ष्य और अधिकारियों की भूमिका
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लालरिनपुईई ने कहा कि यह कदम माताओं और नवजात शिशुओं की रक्षा के प्रति सरकार के मजबूत संकल्प को दर्शाता है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और अधिक मजबूती मिलेगी और मिजोरम की हर महिला को सम्मान के साथ मातृत्व का अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य का लक्ष्य साल 2030 तक मातृ मृत्यु दर को प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम लाना है। साथ ही नवजात और बाल मृत्यु दर में और अधिक गिरावट दर्ज करते हुए रोकी जा सकने वाली मौतों को खत्म करना है। स्वास्थ्य मंत्री ने जिला अधिकारियों, कार्यक्रम अधिकारियों और स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों से आग्रह किया कि वे मातृ और नवजात स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने सरकारी विभागों, विभिन्न संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया।
स्वास्थ्य सचिव द्वारा साझा की गई प्रगति
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव लालजारमावीई ने राज्य में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साल 2025-26 के दौरान संस्थागत प्रसव का आंकड़ा लगभग 93 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसके अलावा करीब 81 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान ही प्रसव पूर्व देखभाल के लिए अपना पंजीकरण करवा लिया था। स्वास्थ्य सचिव ने सभी अधिकारियों से अपील की कि वे इस बैठक के निष्कर्षों को ठोस उपायों में बदलें और राज्य तथा जिला दोनों स्तरों पर प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित करें ताकि स्वास्थ्य परिणामों में और सुधार लाया जा सके।


















