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संयुक्त राष्ट्र ने मिजोरम की स्ट्रॉबेरी किसान मारी लालरिथंगी को वैश्विक मंच पर किया सम्मानितमिजोरम
16 अक्तू॰ 2026, 5:01 pm (2 घंटे पहले)· 0

संयुक्त राष्ट्र ने मिजोरम की स्ट्रॉबेरी किसान मारी लालरिथंगी को वैश्विक मंच पर किया सम्मानित

मिजोरम के लोंगत्लाइ जिले की पूर्व शिक्षिका मारी लालरिथंगी को स्ट्रॉबेरी की सफल खेती और मूल्य संवर्धन के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने सम्मानित किया है।

म्यांमार सीमा के पास बसे मिजोरम के एक छोटे से गांव की पूर्व निजी स्कूल शिक्षिका ने स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य संस्था ने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में दिए गए उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा है। 35 वर्षीय मारी जेडटी लालरिथंगी लोंगत्लाइ जिले के सांगाउ गांव की रहने वाली हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन ने महिला किसान अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2026 के सिलसिले में दुनिया भर की प्रेरक महिलाओं को चुना, जिसमें लालरिथंगी को भी जगह मिली है। इस वैश्विक सूची में शामिल होने वाली वह पहली मिजो महिला बनी हैं। इस चयन प्रक्रिया में 131 मुल्कों से 600 से अधिक नामांकन आए थे, जिनमें से भारत की दो महिलाओं को स्थान प्राप्त हुआ। 15 अक्टूबर को रोम स्थित मुख्यालय में आयोजित वर्ल्ड फूड फोरम के दौरान उन्हें औपचारिक रूप से यह उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जताई और अपने सफर में सहयोग देने वाले हर व्यक्ति, अपने परिवार और ईश्वर के प्रति आभार प्रकट किया।

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सरकारी नौकरी की चाह छोड़ चुनी खेती की राह

लालरिथंगी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लगीं और साथ ही सरकारी सेवा में चयन के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही थीं। कई प्रयासों के बावजूद जब सरकारी नौकरी में सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने महसूस किया कि आजीविका और वित्तीय आत्मनिर्भरता पाने के लिए सिर्फ सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं है। उन्होंने अपनी शिक्षा का व्यावहारिक उपयोग करते हुए दूसरे क्षेत्रों में कदम रखने का फैसला किया।

साल 2024 में उन्होंने पास के सियाहा जिले में स्ट्रॉबेरी की सफल पैदावार के बारे में सुना। इससे प्रेरित होकर उन्होंने खुद इस फल की पैदावार करने की योजना बनाई। कृषि क्षेत्र की औपचारिक डिग्री या पूर्व अनुभव न होने के कारण उन्होंने आधुनिक तौर-तरीके सीखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। उन्होंने यू-ट्यूब पर उपलब्ध कृषि संबंधी वीडियो देखे और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे किसानों से सीधे संपर्क कर तकनीक समझी।

1,000 पौधों से शुरू हुआ कारोबार, आय 10 लाख पार

उन्होंने अपने गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित कृषि भूमि पर शुरुआती प्रयोग के तौर पर 1,000 स्ट्रॉबेरी के पौधे रोपे। शुरुआती फसल में मिली कामयाबी से उनका हौसला बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाते हुए दो हेक्टेयर में 10,000 से अधिक पौधे लगा दिए। इस काम ने उन्हें पहले ही साल लगभग 1.5 लाख रुपये की आमदनी दी। साल 2025 तक उनकी यह कमाई बढ़कर 10 लाख रुपये से अधिक हो गई।

ताजे फल स्थानीय बाजारों में बेचने के अलावा उन्होंने फसल के मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान दिया। उन्होंने स्ट्रॉबेरी से वाइन और कैंडी तैयार करना शुरू किया और उन्हें स्थानीय बाजारों में बेचा, जिससे उनके मुनाफे में काफी इजाफा हुआ।

पारिवारिक तालमेल और पहले मिले सम्मान

तीन बच्चों की मां होने के कारण घर-परिवार और खेतों की जिम्मेदारियों को एक साथ संभालना आसान नहीं था। दिन भर घरेलू कामकाज निपटाने के बाद वह देर रात तक खेती की बारीकियों का अध्ययन करती थीं। छोटे बच्चों की देखभाल और उन्हें स्तनपान कराते समय भी वह सीखने के लिए समय निकालती थीं। उनके पति सांगाउ के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। पति और ससुराल वालों ने उन्हें पूरा सहयोग दिया और सप्ताहांत में दोनों मिलकर खेतों पर काम करते थे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले इस सम्मान से पहले भी उन्हें राज्य में सराहा जा चुका था। मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 के आयोजन में उन्हें लोंगत्लाइ जिले की सर्वश्रेष्ठ किसान का खिताब दिया गया था, जिसने उनके इस सफर को मजबूती दी। उन्होंने अपनी इस प्रगति में मिजोरम के बागवानी विभाग से मिली सहायता को भी महत्वपूर्ण बताया।

सवाल-जवाब

मारी लालरिथंगी कौन हैं और उन्हें किस लिए जाना जाता है?
वह मिजोरम के लोंगत्लाइ जिले के सांगाउ गांव की रहने वाली एक किसान और पूर्व शिक्षिका हैं, जिन्हें स्ट्रॉबेरी की सफल खेती के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने सम्मानित किया है।
उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या सम्मान दिया गया है?
उन्हें खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा महिला किसान अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2026 के अंतर्गत कृषि-खाद्य प्रणाली और ग्रामीण विकास की 100 नायिकाओं की सूची में शामिल किया गया है।
स्ट्रॉबेरी की खेती से उनकी सालाना आय कितनी रही है?
शुरुआती वर्ष में उनकी आय लगभग 1.5 लाख रुपये थी, जो साल 2025 में बढ़कर 10 लाख रुपये से अधिक हो गई।
खेती की शुरुआत में उन्होंने कितने पौधे लगाए थे और अब उनका दायरा कितना है?
उन्होंने 1,000 पौधों से शुरुआत की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर दो हेक्टेयर भूमि में 10,000 से अधिक पौधों तक फैलाया।
ताजे स्ट्रॉबेरी के अलावा वह कौन से उत्पाद तैयार करती हैं?
वह फसल के मूल्य संवर्धन के तहत स्ट्रॉबेरी से कैंडी और वाइन तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेचती हैं।
बिना किसी कृषि डिग्री के उन्होंने खेती की तकनीक कैसे सीखी?
उन्होंने यू-ट्यूब वीडियो देखकर और साथी किसानों से व्यावहारिक जानकारी जुटाकर खेती के तरीके सीखे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·35 मिनट पहले

मिजोरम की इस बेटी ने कमाल कर दिया। जब मैं कुछ साल पहले आइजोल गया था, तब वहाँ के युवाओं में सरकारी नौकरी का गजब क्रेज देखा था। मारी ने लीक से हटकर जो रास्ता चुना, वह हम सबके लिए प्रेरणा है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·35 मिनट पहले

रविकेश, सरकारी नौकरी का क्रेज तो हर जगह है, पर मारी ने सिर्फ यूट्यूब से खेती सीखकर इतना बड़ा मुकाम कैसे हासिल कर लिया? थोड़ा अजीब लगता है कि बिना किसी शुरुआती अनुभव के कोई रातों-रात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक जाए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 मिनट पहले

मिजोरम के उस छोटे से गांव में घूमते हुए मैंने देखा था कि वहां के किसानों के लिए सरकारी नौकरी ही सब कुछ हुआ करती थी। मारी ने जो राह चुनी है, वह वाकई हिम्मत की बात है। बिना किसी कृषि पृष्ठभूमि के यूट्यूब से सीखकर आज उन्होंने रोम तक का सफर तय कर लिया, यह देखकर बहुत खुशी हुई।

Arjun Mehta@arjun-mehta·58 मिनट पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। सरकारी नौकरी के पीछे भागने की बजाय ऐसा आत्मनिर्भर कदम उठाना और संसद की नीतियों का ज़मीनी असर दिखना वाकई कमाल है!

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