म्यांमार सीमा के पास बसे मिजोरम के एक छोटे से गांव की पूर्व निजी स्कूल शिक्षिका ने स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य संस्था ने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में दिए गए उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा है। 35 वर्षीय मारी जेडटी लालरिथंगी लोंगत्लाइ जिले के सांगाउ गांव की रहने वाली हैं।
खाद्य एवं कृषि संगठन ने महिला किसान अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2026 के सिलसिले में दुनिया भर की प्रेरक महिलाओं को चुना, जिसमें लालरिथंगी को भी जगह मिली है। इस वैश्विक सूची में शामिल होने वाली वह पहली मिजो महिला बनी हैं। इस चयन प्रक्रिया में 131 मुल्कों से 600 से अधिक नामांकन आए थे, जिनमें से भारत की दो महिलाओं को स्थान प्राप्त हुआ। 15 अक्टूबर को रोम स्थित मुख्यालय में आयोजित वर्ल्ड फूड फोरम के दौरान उन्हें औपचारिक रूप से यह उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जताई और अपने सफर में सहयोग देने वाले हर व्यक्ति, अपने परिवार और ईश्वर के प्रति आभार प्रकट किया।
सरकारी नौकरी की चाह छोड़ चुनी खेती की राह
लालरिथंगी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लगीं और साथ ही सरकारी सेवा में चयन के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही थीं। कई प्रयासों के बावजूद जब सरकारी नौकरी में सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने महसूस किया कि आजीविका और वित्तीय आत्मनिर्भरता पाने के लिए सिर्फ सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं है। उन्होंने अपनी शिक्षा का व्यावहारिक उपयोग करते हुए दूसरे क्षेत्रों में कदम रखने का फैसला किया।
साल 2024 में उन्होंने पास के सियाहा जिले में स्ट्रॉबेरी की सफल पैदावार के बारे में सुना। इससे प्रेरित होकर उन्होंने खुद इस फल की पैदावार करने की योजना बनाई। कृषि क्षेत्र की औपचारिक डिग्री या पूर्व अनुभव न होने के कारण उन्होंने आधुनिक तौर-तरीके सीखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। उन्होंने यू-ट्यूब पर उपलब्ध कृषि संबंधी वीडियो देखे और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे किसानों से सीधे संपर्क कर तकनीक समझी।
1,000 पौधों से शुरू हुआ कारोबार, आय 10 लाख पार
उन्होंने अपने गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित कृषि भूमि पर शुरुआती प्रयोग के तौर पर 1,000 स्ट्रॉबेरी के पौधे रोपे। शुरुआती फसल में मिली कामयाबी से उनका हौसला बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाते हुए दो हेक्टेयर में 10,000 से अधिक पौधे लगा दिए। इस काम ने उन्हें पहले ही साल लगभग 1.5 लाख रुपये की आमदनी दी। साल 2025 तक उनकी यह कमाई बढ़कर 10 लाख रुपये से अधिक हो गई।
ताजे फल स्थानीय बाजारों में बेचने के अलावा उन्होंने फसल के मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान दिया। उन्होंने स्ट्रॉबेरी से वाइन और कैंडी तैयार करना शुरू किया और उन्हें स्थानीय बाजारों में बेचा, जिससे उनके मुनाफे में काफी इजाफा हुआ।
पारिवारिक तालमेल और पहले मिले सम्मान
तीन बच्चों की मां होने के कारण घर-परिवार और खेतों की जिम्मेदारियों को एक साथ संभालना आसान नहीं था। दिन भर घरेलू कामकाज निपटाने के बाद वह देर रात तक खेती की बारीकियों का अध्ययन करती थीं। छोटे बच्चों की देखभाल और उन्हें स्तनपान कराते समय भी वह सीखने के लिए समय निकालती थीं। उनके पति सांगाउ के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। पति और ससुराल वालों ने उन्हें पूरा सहयोग दिया और सप्ताहांत में दोनों मिलकर खेतों पर काम करते थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले इस सम्मान से पहले भी उन्हें राज्य में सराहा जा चुका था। मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 के आयोजन में उन्हें लोंगत्लाइ जिले की सर्वश्रेष्ठ किसान का खिताब दिया गया था, जिसने उनके इस सफर को मजबूती दी। उन्होंने अपनी इस प्रगति में मिजोरम के बागवानी विभाग से मिली सहायता को भी महत्वपूर्ण बताया।






















