अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की दरों में जुलाई 2026 के दौरान 24 प्रतिशत तक का जोरदार उछाल देखा गया है। इसके बावजूद 1 अगस्त 2026 को भारत के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में काफी हद तक स्थिरता बनी हुई है, हालांकि विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों और मालभाड़े के कारण दरों में मामूली बदलाव दर्ज किया गया है। वैश्विक बाजार में पैदा हुई इस अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 84,084 करोड़ रुपये के बजट वाली 'समुद्र मंथन' यानी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
तेल बाजार के जानकारों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों के कारण ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड के दाम कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों और आयातकों के लिए यह स्थिति आयात बिल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। सरकार की नई महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र से तेल और गैस की खोज को गति देना है ताकि विदेशी कच्चे तेल पर देश की निर्भरता को समय रहते घटाया जा सके।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की ताजा दरें
1 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बिना किसी बदलाव के 102.12 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 111.21 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा। इसके विपरीत तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में पेट्रोल की दर 9 पैसे बढ़कर 108.87 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। हरियाणा के गुड़गांव में पेट्रोल 22 पैसे महंगा होकर 102.97 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया, जबकि उत्तर प्रदेश के नोएडा में 7 पैसे की राहत के साथ यह 101.89 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में शनिवार को पेट्रोल के दाम में 75 पैसे की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिससे नया भाव 111.78 रुपये प्रति लीटर हो गया।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल के दाम में 82 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 101.86 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। इसके विपरीत बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 1.30 रुपये महंगा होकर 114.67 रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू गया। केरल के तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल की कीमत में 23 पैसे का इजाफा देखा गया, जहां नया दाम 115.49 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।
डीजल की बात करें तो दिल्ली में यह 95.20 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 99.82 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 97.83 रुपये प्रति लीटर के पुराने स्तर पर ही कायम है। हालांकि चेन्नई, गुड़गांव, बेंगलुरु, पटना और तिरुवनंतपुरम में डीजल की दरों में कुछ पैसों की बढ़त दर्ज की गई है। तेलंगाना के हैदराबाद, ओडिशा के भुवनेश्वर, बिहार के पटना और केरल के तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में डीजल की खुदरा दरें अब भी 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बनी हुई हैं। दूसरी तरफ नोएडा और लखनऊ में डीजल मामूली रूप से सस्ता हुआ है।
जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में 23.5% की रिकॉर्ड तेजी
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में जुलाई 2026 का महीना कच्चे तेल के लिए अत्यधिक उतार-चढ़ाव भरा रहा। अमेरिका के डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल की कीमत जुलाई के दौरान लगभग 23.5 प्रतिशत बढ़कर महीने के अंत में 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड में भी लगभग 23 प्रतिशत का उछाल आया और यह महीने के समापन पर 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। मार्च के बाद से कच्चे तेल में दर्ज की गई यह अब तक की सबसे तेज मासिक बढ़त है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में इस तेजी की मुख्य वजह मध्य पूर्व में रणनीतिक जलमार्गों पर बढ़ता सैन्य तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं हैं। ईरान ने यह दावा किया है कि उसने अमेरिका के सैन्य जहाजों की सुरक्षा में गुजर रहे दो तेल टैंकरों पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हमला किया है, यद्यपि पश्चिमी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने अभी इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए तनाव, लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों तथा ईरान समर्थित समूहों पर सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई ने समुद्री व्यापार मार्गों के लिए जोखिम काफी बढ़ा दिया है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में आई कमी ने भी कीमतों को ऊपर धकेलने का काम किया है।
इसके अलावा रूस के काला सागर स्थित तेल निर्यात बुनियादी ढांचे के आसपास हुए हमलों ने यूरोपीय रिफाइनरियों के लिए चिंता पैदा कर दी है। विशेष रूप से कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (सीपीसी) टर्मिनल के पास सैन्य गतिविधियों से कजाकिस्तान के कच्चे तेल के निर्यात में रुकावट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सीपीसी प्रबंधन ने परिचालन जारी रखने का फैसला लिया है, लेकिन आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता बाजार को लगातार समर्थन दे रही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल की तेजी का असर
रेटिंग एजेंसी केयरएज की शोध रिपोर्ट के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की दरें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर भारत के चालू खाता घाटे (कैड) पर पड़ेगा। कच्चे तेल का आयात महंगा होने से देश का व्यापार घाटा चौड़ा होगा और भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ेगा। इससे घरेलू बाजार में ईंधन और माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिससे व्यापक मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर में तेजी आने की पूरी संभावना है।
विशेष रूप से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति को लेकर भारत की संवेदनशीलता बहुत अधिक है, क्योंकि देश अपनी रसोई गैस और प्राकृतिक गैस की जरूरत के बड़े हिस्से के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री परिवहन पर निर्भर है। कच्चे माल की लागत बढ़ने, समुद्री बीमा और मालभाड़े की दरों में इजाफा होने तथा कार्यशील पूंजी की आवश्यकता बढ़ने के कारण आयात पर निर्भर भारतीय कंपनियों के लाभ मार्जिन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन' योजना को मंजूरी
वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल झटकों से निपटने के लिए भारत सरकार ने 31 जुलाई को एक ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना यानी 'समुद्र मंथन' को मंजूरी दे दी है। इस योजना का कार्यान्वयन वित्त वर्ष 2030-31 तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार समुद्र मंथन योजना से देश के समुद्री क्षेत्रों में 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समकक्ष (एमएमटीओई) से अधिक के नए तेल और गैस भंडारों की खोज होने का अनुमान है। इस योजना के माध्यम से भारत के तटीय और गहरे समुद्री इलाकों में अन्वेषण गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे घरेलू स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन बढ़ेगा। इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों के तहत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह योजना अपतटीय अन्वेषण की पूरी मूल्य श्रृंखला को कवर करती है। इसके तहत आधुनिक भूकंपीय आंकड़ों का व्यापक अधिग्रहण, प्रसंस्करण और विश्लेषण किया जाएगा। गहरे और अति-गहरे पानी में त्वरित खोजात्मक ड्रिलिंग के साथ-साथ नए बेसिनों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग को अंजाम दिया जाएगा। योजना में साझा उत्पादन और निकासी बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ एकीकृत तेल एवं गैस विनिर्माण व सेवा क्षेत्र स्थापित करने का प्रावधान है। डिजिटल प्रबंधन, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए भारत को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी की गई है।


















