शेयर बाजार में सुस्त और सतर्क माहौल के बीच एलीटकोन इंटरनेशनल के शेयरों में गुरुवार को एक मजबूत वापसी देखने को मिली। इस पेनी स्टॉक में अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर के आसपास अचानक लिवाली का दौर शुरू हो गया, जिससे निवेशकों का ध्यान इस काउंटर की तरफ आकर्षित हुआ। दस रुपये से कम कीमत पर कारोबार करने वाले इस शेयर ने सत्र के दौरान अच्छी बढ़त हासिल की।
कारोबार के दौरान शेयर की चाल
कारोबार की शुरुआत में एलीटकोन इंटरनेशनल का शेयर 7.08 रुपये पर खुला, जो उस दिन का निचला स्तर भी था। इसके बाद काउंटर पर खरीदारी का दबाव बढ़ा और शेयर ने इंट्राडे ट्रेड के दौरान 7.82 रुपये के उच्च स्तर को छुआ। सत्र के अंत में यह 3:30 बजे 7.77 रुपये के भाव पर बंद हुआ।
लगातार उतार-चढ़ाव और हालिया दबाव
यह पेनी स्टॉक लंबे समय से काफी उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। इसके पिछले एक महीने, तीन महीने, छह महीने और एक साल के प्रदर्शन को देखें तो इस काउंटर पर लगातार बिकवाली का भारी दबाव बना रहा है। ऐसे में गुरुवार को आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत भरी जरूर रही है।
भविष्य की चाल और तकनीकी पहलू
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अत्यधिक कमजोर पेनी शेयरों में लंबी अवधि की मंदी के बाद अचानक आई तेजी किसी बड़े रुझान बदलाव का पक्का संकेत नहीं होती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह शेयर अपने हालिया निचले स्तर से ऊपर टिक पाता है और आगे भी अपनी इस रफ्तार को कायम रख सकता है।
भारतीय शेयर बाजार का व्यापक परिदृश्य
एलीटकोन इंटरनेशनल में आई यह रिकवरी ऐसे समय में आई जब भारतीय शेयर बाजार का समग्र रुझान मिलाजुला बना हुआ था। शुरुआती कारोबार के दौरान घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों पर लगातार दबाव देखा गया क्योंकि निवेशक कच्चे तेल के वैश्विक दामों, भू-राजनीतिक गतिविधियों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों पर पैनी नजर बनाए हुए थे।
सेंसेक्स और निफ्टी 50 का प्रदर्शन
शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स बाद में संभल गया और 147 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,910.96 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी हरे निशान में लौट आया और करीब 63 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,494.95 के स्तर को छूने में कामयाब रहा।
कमोडिटी बाजार और वैश्विक कारक
व्यापक सूचकांकों में सुधार के बावजूद वैश्विक जिंस बाजारों और मौद्रिक नीतियों में हो रहे बदलावों के प्रति बाजार की संवेदनशीलता बनी रही, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल छाया रहा।
कच्चे तेल की कीमतें और भारत पर असर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड का भाव गुरुवार को लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि सत्र के दौरान कीमतों में हल्की नरमी जरूर आई, लेकिन वे उच्च स्तर पर बनी रहीं, जिससे भारतीय निवेशकों की नजरें ऊर्जा लागत पर टिकी रहीं।
भारत के संदर्भ में महंगे कच्चे तेल का असर काफी व्यापक होता है क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से घरेलू महंगाई दर और रुपये की चाल पर दबाव बढ़ सकता है, साथ ही विभिन्न उद्योगों की लागत और उनके मुनाफे के मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है।



















