घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार, 25 सितंबर को रेमंड के शेयरों में तेज मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके चलते स्टॉक गिरावट के साथ बंद हुआ। व्यापक स्तर पर रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की जा रही थी, लेकिन इसके उलट रेमंड के शेयरों पर बिकवाली का दबाव हावी रहा। बाजार बंद होने पर कंपनी का शेयर 20.85 रुपये यानी 1.73 प्रतिशत टूटकर 1,183 रुपये के भाव पर आ गया। कारोबार के दौरान शेयर ने एक समय 1,223.85 रुपये के उच्च स्तर को छुआ था। पिछले कुछ महीनों में जोरदार तेजी दर्ज करने के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा भुनाए जाने और कंपनी के एयरोस्पेस तथा डिफेंस कारोबार में हो रहे विस्तार पर पैनी नजर रखे जाने के बीच यह उतार-चढ़ाव सामने आया है।
डिफेंस इंडेक्स के मुकाबले शेयर की अलग चाल
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में रेमंड की गिरावट व्यापक रक्षा क्षेत्र से बिल्कुल जुदा रही। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स कारोबार के दौरान करीब 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 9,401.65 के आसपास बना हुआ था। पूरे डिफेंस सेक्टर में गिरावट न होने और अकेले रेमंड में कमजोरी आने से साफ संकेत मिलता है कि यह पूरे रक्षा उद्योग की बिकवाली नहीं, बल्कि भारी बढ़त के बाद शेयर विशेष में आई मुनाफावसूली है। बाजार विश्लेषक इस अंतर को अहम मान रहे हैं क्योंकि हाल के समय में निवेशकों ने इस कंपनी को केवल कपड़ा निर्माता के रूप में नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर की उभरती ताकत के तौर पर आंका है।
सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव भरा कारोबार
कारोबारी दिन की शुरुआत में रेमंड का शेयर 1,208.90 रुपये पर खुला था। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का रुझान दिखा और शेयर चढ़कर 1,223.85 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि जैसे-जैसे कारोबारी दिन आगे बढ़ा, ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ता चला गया। दोपहर बाद के सत्र में बिकवाली तेज होने से स्टॉक गिरकर 1,172 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक लुढ़क गया। अंततः कुछ संभलकर यह 1,183 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इस प्रकार दिन के उच्च स्तर से शेयर में 40 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न
शुक्रवार को आई दैनिक गिरावट के बावजूद रेमंड ने विभिन्न समयावधियों में निवेशकों को असाधारण रिटर्न देकर मल्टीबैगर का दर्जा हासिल किया है। अगर हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक हफ्ते में यह शेयर करीब 10 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं बीते एक महीने में निवेशकों को लगभग 70 प्रतिशत का मुनाफा मिला है। तीन महीने के दायरे में स्टॉक ने 84 प्रतिशत की छलांग लगाई है, जबकि पिछले छह महीनों में इसने 214 प्रतिशत का जबर्दस्त रिटर्न दिया है। एक साल के आधार पर भी शेयर लगभग 74 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज कर चुका है। इस लगातार तेजी की वजह से ही अब निवेशक थोड़े सतर्क होकर मुनाफावसूली करते दिख रहे हैं।
एयरोस्पेस और डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट से मिला सहारा
कंपनी के प्रति निवेशकों के भारी आकर्षण की मुख्य वजह रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में इसका तेजी से बढ़ता दखल है। रेमंड की एयरोस्पेस और डिफेंस सब्सिडियरी कंपनी जेके मैनी ग्लोबल एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारत के एक प्रमुख मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) से जुड़े टेंडर में सफलता हासिल की है। इस प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत यह सब्सिडियरी एक प्रमुख स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए विंग स्ट्रक्चर और सेंटर फ्यूजलेज स्ट्रक्चर की असेंबलिंग का काम करेगी।
यह अनुबंध रेमंड के एयरोस्पेस बिजनेस को एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग के उच्च मूल्य वर्ग में ले जाने की क्षमता रखता है। पहले कंपनी मुख्य रूप से प्रिसिजन कंपोनेंट्स तक सीमित थी, लेकिन अब यह बड़े विमान स्ट्रक्चर की असेंबली की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। यह विस्तार मैनी प्रिसिजन प्रोडक्ट्स के अधिग्रहण के बाद संभव हुआ है, जिसने समूह की मौजूदगी को एयरोस्पेस, डिफेंस, टूल्स और ऑटो कंपोनेंट्स तक व्यापक बना दिया है।
मूल्यांकन और भविष्य की चुनौतियों पर विश्लेषकों की राय
विभवंगल अनुकूलकर प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ मौर्य ने कहा, "रेमंड की आक्रामक वापसी इंजीनियरिंग और एयरोस्पेस में इसकी संभावनाओं पर बाजार के बढ़ते भरोसे की बदौलत हुई है। हालांकि सकारात्मक आय और विकास क्षमता कहानी को समर्थन देती है, लेकिन इतनी बड़ी बढ़त के बाद अल्पावधि में अर्निंग्स बुकिंग और अस्थिरता की संभावना पूरी तरह वाजिब है।"
कंपनी के मौजूदा मूल्यांकन को लेकर सिद्धार्थ मौर्य ने आगे कहा, "मौजूदा मूल्यांकन को देखते हुए यह देखना बाकी है कि क्या कंपनी अपने वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए पर्याप्त कमाई और नकदी प्रवाह वृद्धि पैदा कर सकती है। मध्यम अवधि में, एयरोस्पेस में सफल निष्पादन और ऑर्डर स्केलिंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।" विश्लेषकों का मानना है कि ऑर्डर हासिल करने के बाद अब समय पर डिलीवरी और मार्जिन बनाए रखना कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।


















