भारतीय शेयर बाजार के मंगलवार के कारोबारी सत्र में रक्षा और एयरोस्पेस से जुड़े शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों ने बढ़त की अगुवाई की। इस तेजी के दौर में निजी कंपनियों के स्टॉक्स में निवेशकों ने खासा उत्साह दिखाया, जहां कई प्रमुख कंपनियों के शेयर दिन के कारोबार में 10 प्रतिशत तक उछल गए। इस पूरे घटनाक्रम में रेमंड के शेयरों में दर्ज की गई तेजी सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली रही, जिसने अपने मजबूत कारोबारी प्रदर्शन और आगामी रणनीतिक योजनाओं के दम पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
रेमंड के शेयरों का कारोबारी प्रदर्शन और नया 52-हफ्ते का रिकॉर्ड
मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान रेमंड के शेयरों में शुरुआत से ही जोरदार लिवाली देखने को मिली। कंपनी का शेयर 1,090 रुपये के भाव पर खुला और दिन के कारोबार के दौरान इसने 1,089.95 रुपये का निचला स्तर तथा 1,193.40 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ। यह 1,193.40 रुपये का स्तर कंपनी के लिए 52-हफ्ते का नया उच्चतम स्तर साबित हुआ। सत्र के अंत में 22 सितंबर को दोपहर 3:30 बजे शेयर 1,117 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इस तरह पिछले कारोबारी बंद के मुकाबले इसमें 32.05 रुपये यानी 2.95 प्रतिशत की ठोस बढ़त दर्ज की गई।
बाजार के व्यापक रुझान को देखें तो यह तेजी पूरे रक्षा क्षेत्र में देखने को मिली। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स मंगलवार को 54.65 अंक अथवा 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 9,471.55 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि सूचकांक की तुलना में निजी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों ने कहीं अधिक आक्रामक प्रदर्शन दिखाया। इस तेजी में रेमंड के अलावा यूनिमेक एयरोस्पेस एंड मैन्युफैक्चरिंग, अपोलो माइक्रो सिस्टम्स और एकस जैसी कंपनियां प्रमुख लाभार्थियों में शामिल रहीं, जिनके शेयरों में इंट्राडे के दौरान 10 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया।
मल्टीबैगर रिटर्न और पिछले महीनों में शेयरों की रफ्तार
रेमंड के शेयर पिछले कुछ समय से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और इस नई तेजी ने कंपनी के मजबूत सफर में एक और नया अध्याय जोड़ दिया है। मंगलवार को सामने आए बाजार आंकड़ों के मुताबिक, रेमंड के शेयर ने पिछले एक महीने के भीतर लगभग 76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। वहीं साल 2026 में साल की शुरुआत से लेकर अब तक यानी साल-दर-तारीख आधार पर इस शेयर में 166 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है, जिससे यह शेयर 2026 के लिए एक मजबूत मल्टीबैगर स्टॉक की श्रेणी में शुमार हो चुका है।
यदि पिछले छह महीनों के समयावधि पर नजर डाली जाए तो यह बढ़त और भी प्रभावशाली नजर आती है। पिछले छह महीनों के दौरान इस शेयर में 200 प्रतिशत से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि इस काउंटर में निवेशकों की दिलचस्पी कितनी तेजी से बढ़ी है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि रेमंड की एयरोस्पेस और डिफेंस विनिर्माण में बढ़ती सक्रियता और हाल के कॉरपोरेट घटनाक्रमों ने निवेशकों के भरोसे को काफी मजबूत किया है।
एयरोस्पेस विंग को मिले 33 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर्स
रेमंड की रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी सीधे तौर पर उसके एयरोस्पेस बिजनेस से जुड़ी है, जो विशेष विनिर्माण के क्षेत्र में अपने पैर तेजी से पसार रहा है। कंपनी के इस एयरोस्पेस डिवीजन ने हाल ही में भारत के एक प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा संगठन से लगभग 33 करोड़ रुपये के बहु-कार्यक्रम ऑर्डर हासिल किए हैं। इन ऑर्डर्स के तहत विशेष मशीनिंग, एयरोस्पेस कास्टिंग्स, संरचनात्मक घटक और जटिल असेंबलियों का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना के लिए उत्पादन कार्य 2026 और 2027 के दौरान विभिन्न चरणों में शुरू होने की उम्मीद है, जिससे कंपनी के राजस्व में लगातार मजबूती आने की संभावना है।
फंड जुटाने की योजना और मिनर्वा वेंचर्स फंड को वारंट जारी करने का प्रस्ताव
कंपनी के शेयरों में आई इस हलचल के पीछे प्रस्तावित फंड जुटाने की प्रक्रिया भी एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट उत्प्रेरक बनकर उभरी है। रेमंड ने तरजीही आधार पर वारंट जारी करने के लिए शेयरधारकों से मंजूरी लेने के वास्ते असाधारण आम बैठक बुलाई है। कंपनी द्वारा जारी किए गए नोटिस के अनुसार, यह असाधारण आम बैठक 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जानी है। इस बैठक में 645 रुपये प्रति वारंट के भाव पर कुल 33,28,686 वारंट जारी करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, प्रत्येक वारंट एक पूर्ण चुकता रेमंड इक्विटी शेयर में परिवर्तनीय होगा। यदि सभी प्रस्तावित वारंट इक्विटी शेयरों में तब्दील हो जाते हैं, तो मिनर्वा वेंचर्स फंड को लगभग 33.28 लाख शेयर प्राप्त होंगे। पूर्ण रूप से डाइल्यूटेड आधार पर यह हिस्सेदारी कंपनी के कुल इक्विटी आधार के लगभग 4.35 प्रतिशत के बराबर होगी। इस रणनीतिक पूंजी विस्तार और नए ऑर्डर्स के सहारे कंपनी अपनी विनिर्माण क्षमता और रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।



















