बढ़ते बिजली बिलों और गर्मियों में बार-बार होने वाली कटौती से राहत पाने के लिए अपने मकान की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना एक बेहद व्यावहारिक समाधान बनकर उभरा है। जब उपभोक्ता अपने मकान की खुली छत पर सौर पैनल लगाते हैं, तो वे अपनी जरूरत की बिजली खुद तैयार कर सकते हैं। इससे न केवल हर महीने आने वाले भारी भरकम बिजली बिलों का बोझ खत्म होता है, बल्कि ग्रिड पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाती है। हालांकि, अधिकांश मकान मालिकों के मन में यह उलझन रहती है कि उनके पास उपलब्ध जमीन के हिसाब से छत पर कितने किलोवाट का सिस्टम लगाया जा सकता है, उससे रोजाना कितनी यूनिट बिजली का उत्पादन होगा और क्या उससे एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर या गीजर जैसे भारी बिजली उपकरण निर्बाध रूप से चलाए जा सकते हैं या नहीं।
छत का क्षेत्रफल और उपयोगी जगह का गणित
शहरी और कस्बाई इलाकों में सौ वर्ग गज के आवासीय भूखंड बेहद आम हैं। ऐसे मकानों की छत पर सौर पैनल लगाने से पहले वास्तविक उपयोगी क्षेत्रफल को समझना जरूरी होता है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी के अनुसार, किसी दो मंजिला इमारत में सौर ऊर्जा से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होना काफी हद तक वहां रहने वाले परिवार के उपभोग के तरीके पर निर्भर करता है। सौ वर्ग गज का भूखंड लगभग 83 वर्ग मीटर के बराबर होता है। छत पर पानी की टंकियों, सीढ़ियों के मचान, मुंडेर और आसपास के निर्माण के कारण बनने वाले छायादार क्षेत्र को यदि अलग कर दिया जाए, तो औसतन 0.7 का रूफटॉप उपलब्धता गुणांक लागू होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि सौ वर्ग गज के मकान में वास्तविक तौर पर सोलर पैनल लगाने के लिए लगभग 55 से 58 वर्ग मीटर खुली धूप वाली जगह ही उपलब्ध हो पाती है।
कितनी क्षमता का सोलर प्लांट लग सकता है
सौर ऊर्जा तकनीक के स्थापित मानकों के मुताबिक, एक किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए लगभग 10 वर्ग मीटर छायामुक्त जगह की आवश्यकता पड़ती है। इस गणित के अनुसार, सौ वर्ग गज के मकान की छत पर उपलब्ध 55 से 58 वर्ग मीटर जगह में आसानी से 4 से 5 किलोवाट भार का सोलर सिस्टम स्थापित किया जा सकता है। यह क्षमता मध्यम और बड़े परिवारों की सामान्य घरेलू बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी संतुलित मानी जाती है। भावना त्यागी स्पष्ट करती हैं कि अच्छी धूप की परिस्थिति में यह सिस्टम हर दिन लगभग 16 से 20 यूनिट बिजली पैदा करने में सक्षम होता है। यह उत्पादन पूरे घर की दैनिक मांग का एक बड़ा हिस्सा संभाल सकता है, हालांकि अंतिम परिणाम इस बात पर तय होगा कि घर में कितने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हैं और उन्हें दिनभर में कितने घंटे चलाया जाता है।
दैनिक बिजली उत्पादन और मौसम का असर
भारत में भौगोलिक दृष्टि से साल के अधिकांश महीनों में प्रतिदिन औसतन 4 से 5 घंटे की तेज धूप मिलती है। इस धूप के आधार पर गर्मियों के मौसम में 4 किलोवाट का सोलर सिस्टम रोजाना 16 से 20 यूनिट बिजली बनाता है, जबकि 5 किलोवाट क्षमता का बड़ा सिस्टम 20 से 25 यूनिट प्रतिदिन तक बिजली उत्पादन कर लेता है। यदि पैनलों की गुणवत्ता उच्च स्तर की हो और उन्हें दक्षिण दिशा की ओर सही कोण पर स्थापित किया गया हो, तो बिजली उत्पादन की यह मात्रा और भी बेहतर हो सकती है। इसके विपरीत, सर्दियों के दिनों में धूप की तीव्रता कम होने और दिन छोटे होने के कारण सौर बिजली का उत्पादन घटकर लगभग आधा रह जाता है। वहीं बारिश और घने बादलों वाले मौसम में सोलर पैनलों से मिलने वाली बिजली में 30 से 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की जाती है, जिसके लिए उपभोक्ताओं को पहले से तैयार रहना चाहिए।
परिवार के आकार और मंजिलों के अनुसार पर्याप्तता
चार से पांच किलोवाट का यह सौर ऊर्जा सिस्टम 6 से 10 सदस्यों वाले संयुक्त या बड़े परिवार की रोजमर्रा की ऊर्जा जरूरतों को संभालने के लिए पर्याप्त माना जाता है। सौ वर्ग गज के भूखंड पर बने दो से तीन बीएचके या एक छोटे चार बीएचके मकान, जो दो मंजिलों में बंटा हो, के लिए यह उत्पादन काफी अनुकूल साबित होता है। ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उपभोक्ता ने अपने सिस्टम के साथ बैटरी बैकअप जोड़ा है या नहीं। यदि सौर पैनलों के साथ बैटरी स्टोरेज लगाया गया है, तो दिन में जमा हुई अतिरिक्त बिजली से रात के समय भी उपकरणों को बिना किसी रुकावट के चलाया जा सकता है। इसके विपरीत, यदि सिस्टम बिना बैटरी का है, तो दिन में तो पैनलों से सीधी और भरपूर बिजली मिलती रहेगी, लेकिन शाम ढलने और रात के समय घर की आपूर्ति के लिए मुख्य ग्रिड या सामान्य घरेलू इन्वर्टर पर निर्भर रहना होगा।
कौन से घरेलू उपकरण कितने समय तक चल सकते हैं
गर्मियों के मौसम में जब दिन के समय धूप पूरी तरह खिली रहती है, तो 4 से 5 किलोवाट के सोलर सिस्टम से पैदा होने वाली बिजली से एक साथ कई भारी और सामान्य उपकरण संचालित किए जा सकते हैं। इस क्षमता के सिस्टम से डेढ़ टन का एक एयर कंडीशनर रोजाना करीब 6 से 8 घंटे तक आराम से चलाया जा सकता है। इसके अलावा 3 से 4 डेजर्ट कूलर 10 से 12 घंटे, 8 से 12 सीलिंग पंखे पूरे दिन, 15 से 20 एलईडी बल्ब पूरे दिन और रात, तथा 1 या 2 रेफ्रिजरेटर 24 घंटे लगातार चालू रखे जा सकते हैं। कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन और मनोरंजन के लिए टेलीविजन को रोजाना 3 से 4 घंटे चलाया जा सकता है, जबकि पानी गर्म करने वाला गीजर दिन में एक बार लगभग 1 घंटे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार यह क्षमता पूरे घर के दैनिक लोड को वहन करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
दो एसी वाले घरों के लिए विकल्प और ग्रिड की व्यवस्था
जिस घर में एक साथ दो एयर कंडीशनर चलाने की आवश्यकता होती है, उस परिवार के लिए 5 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम सबसे उपयुक्त विकल्प साबित होता है। हालांकि चौबीसों घंटे सौर ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए सोलर पैनल के साथ बैटरी बैंक लगाना सबसे सुविधाजनक तरीका है, लेकिन इससे परियोजना की प्रारंभिक लागत काफी बढ़ जाती है। इसका एक किफायती विकल्प नेट मीटरिंग प्रणाली है। नेट मीटरिंग के तहत दिन के समय उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त बिजली को सरकारी ग्रिड में भेज दिया जाता है और रात के समय ग्रिड से बिजली ले ली जाती है। महीने के अंत में कुल आयात और निर्यात का समायोजन करके बिल तैयार होता है, जिससे भारी बिजली बिलों से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है।

















