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कार लोन बकाया रहने पर बैंक कब जब्त कर सकता है आपकी गाड़ी, जानें RBI का नियममनी
7 जुल॰ 2026, 11:00 am (45 दिन पहले)· 2

कार लोन बकाया रहने पर बैंक कब जब्त कर सकता है आपकी गाड़ी, जानें RBI का नियम

RBI के नियमों के मुताबिक सिर्फ एक-दो EMI मिस होने पर बैंक कार लोन की गाड़ी जब्त नहीं कर सकता, इसके लिए लगातार तीन किस्तें बाउंस होना और तय कानूनी नोटिस प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है.

लोन लेकर कार खरीदने वाले बहुत से लोगों के मन में एक ही डर रहता है, अगर किसी महीने ईएमआई मिस हो गई तो क्या बैंक वाले सीधे गाड़ी उठा ले जाएंगे. नौकरी छूटना, बिजनेस में नुकसान या घर में अचानक आई बीमारी, ऐसी वजहों से कई बार लोग समय पर कार लोन की किस्त नहीं भर पाते और उसके बाद रिकवरी एजेंट के फोन या घर पर दस्तक की खबर सुनकर घबरा जाते हैं. जबकि हकीकत यह है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसके लिए साफ नियम बना रखे हैं और एक या दो किस्त बाउंस होने भर से कोई बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी गाड़ी को छू भी नहीं सकती.

कब बैंक गाड़ी जब्त करने की स्थिति में आता है

RBI के नियमों के मुताबिक बैंक तभी गाड़ी उठाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है जब लगातार तीन ईएमआई बाउंस हो चुकी हों या फिर किस्त चुकाए हुए पूरे 90 दिन बीत चुके हों. इससे पहले किसी भी हाल में गाड़ी जब्त करना नियमों के खिलाफ माना जाता है. इतना ही नहीं, यह शर्त पूरी होने के बाद भी बैंक सीधे रिकवरी एजेंट भेजकर गाड़ी नहीं उठा सकता, उसे एक तय कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

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पहले डिमांड नोटिस, फिर प्री-पजेशन नोटिस

तीन किस्तें मिस होने के बाद भी बैंक का पहला कदम गाड़ी उठाना नहीं बल्कि एक ऑफिशियल डिमांड नोटिस भेजना होता है. इस नोटिस में बकाया रकम चुकाने के लिए ग्राहक को पूरे 60 दिन का समय दिया जाता है. अगर इन 60 दिनों में भी कर्जदार पैसों का इंतजाम नहीं कर पाता, तभी बैंक अगला कदम उठा सकता है, यानी एक प्री-पजेशन नोटिस जारी करना, जिसमें साफ लिखा होता है कि गाड़ी अब बैंक अपने कब्जे में लेने जा रहा है. अगर इन दोनों नोटिसों के बिना कोई गाड़ी उठाने पहुंच जाए, तो वह कार्रवाई पूरी तरह गैर-कानूनी मानी जाएगी और कर्जदार इसके खिलाफ शिकायत भी कर सकता है.

रिकवरी एजेंट भी मनमानी नहीं कर सकते

कई बार कर्जदारों की शिकायत रहती है कि रिकवरी एजेंट धमकाने या डराने की कोशिश करते हैं, जबकि यह पूरी तरह गैर-कानूनी हरकत है. RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक कोई भी रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद न तो फोन कर सकता है और न ही ग्राहक के घर जा सकता है. इसके अलावा एजेंट किसी भी सूरत में गाली-गलौज, हाथापाई या मानसिक तौर पर परेशान करने वाला व्यवहार नहीं कर सकते. अगर घर पर कोई रिकवरी एजेंट आता है, तो ग्राहक को हक है कि वह उससे उसका पहचान पत्र और बैंक की तरफ से जारी अथॉराइजेशन लेटर मांगे. अगर कोई एजेंट जबरदस्ती गाड़ी की चाबी छीनने की कोशिश करता है, तो कर्जदार सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है.

गाड़ी जब्त होने के बाद भी वापस पाने का मौका

अगर सारे नोटिस मिलने के बाद भी कर्जदार बकाया राशि नहीं चुका पाता और बैंक गाड़ी अपने कब्जे में ले लेता है, तब भी कहानी वहीं खत्म नहीं होती. गाड़ी को नीलाम करने या बेचने से पहले बैंक को एक और नोटिस, यानी प्री-सेल नोटिस भेजना अनिवार्य है. यही वह आखिरी मौका होता है जब कर्जदार बकाया रकम चुकाकर अपनी गाड़ी वापस ले सकता है.

नीलामी में ज्यादा पैसा मिला तो हक किसका

अगर कर्जदार इस आखिरी मौके पर भी पैसे नहीं जुटा पाता और बैंक को कार नीलाम करनी पड़ती है, तो बैंक मनमानी कीमत पर गाड़ी नहीं बेच सकता, उसे कार की सही मार्केट वैल्यू के हिसाब से ही नीलामी करनी होती है. अगर नीलामी में गाड़ी बकाया लोन राशि से ज्यादा कीमत में बिकती है, तो यह अतिरिक्त पैसा बैंक का हक नहीं बल्कि कर्जदार का हक माना जाता है और वह इसे वापस पाने का दावा कर सकता है.

आम कर्जदारों के लिए क्यों जरूरी है यह जानकारी

ज्यादातर कर्जदार इन नियमों की जानकारी न होने के चलते ही रिकवरी एजेंट के दबाव में आ जाते हैं और कई बार बिना किसी लीगल नोटिस के भी अपनी गाड़ी खो बैठते हैं. जबकि नियम साफ हैं, यानी सिर्फ एक-दो किस्त की देरी पर घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि लगातार तीन किस्तें चूकने या 90 दिन की देरी की स्थिति में भी बैंक को डिमांड नोटिस, 60 दिन की मोहलत और प्री-पजेशन नोटिस जैसी कानूनी प्रक्रिया अपनानी ही होगी.

सवाल-जवाब

कितनी EMI मिस होने पर बैंक गाड़ी जब्त कर सकता है?
लगातार तीन EMI बाउंस होने या किस्त भरे 90 दिन बीत जाने पर ही बैंक गाड़ी जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है.
क्या बैंक बिना नोटिस के गाड़ी उठा सकता है?
नहीं, बैंक को पहले 60 दिन की मोहलत वाला डिमांड नोटिस और फिर प्री-पजेशन नोटिस भेजना जरूरी है, इसके बिना गाड़ी उठाना गैर-कानूनी माना जाता है.
रिकवरी एजेंट किस समय घर आ सकते हैं?
RBI के नियमों के मुताबिक रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद न फोन कर सकते हैं, न घर आ सकते हैं.
क्या जब्त हो चुकी गाड़ी वापस मिल सकती है?
हां, नीलामी से पहले बैंक प्री-सेल नोटिस भेजता है, जिसमें बकाया रकम चुकाकर गाड़ी वापस पाई जा सकती है.
नीलामी में लोन राशि से ज्यादा पैसा मिलने पर क्या होता है?
अगर नीलामी की रकम बकाया लोन से ज्यादा होती है तो अतिरिक्त राशि पर कर्जदार का हक होता है और वह उसे वापस पा सकता है.
अगर रिकवरी एजेंट जबरदस्ती चाबी छीनने की कोशिश करे तो क्या करें?
कर्जदार सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है, क्योंकि जबरदस्ती चाबी छीनना गैर-कानूनी है.
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