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होम लोन की EMI तय करने का आसान नियम: सैलरी का कितना हिस्सा किस्त में देना सुरक्षित है?मनी
13 जून 2026, 6:03 pm (93 दिन पहले)· 0

होम लोन की EMI तय करने का आसान नियम: सैलरी का कितना हिस्सा किस्त में देना सुरक्षित है?

घर खरीदते समय बैंक की लोन पात्रता नहीं, बल्कि अपनी भुगतान क्षमता देखना जरूरी है। जानिए वह नियम जो आपकी EMI को आय के 30 प्रतिशत के भीतर रखकर बाकी खर्चों को सुरक्षित रखता है।

अपना घर हर किसी की सबसे बड़ी ख्वाहिशों में से एक होता है, और इसे हकीकत में बदलने के लिए अधिकतर लोग होम लोन का रास्ता चुनते हैं। दिलचस्प बात यह है कि बैंक अक्सर ग्राहक की कमाई देखकर उम्मीद से बड़ा लोन मंजूर कर देता है। यहीं असली पेच है — जरूरी नहीं कि जितना लोन मिल रहा है, उतना लेना आपके लिए फायदेमंद भी हो। फाइनेंशियल जानकार साफ कहते हैं कि घर पसंद करने से पहले यह हिसाब लगाना ज्यादा अहम है कि हर महीने कितनी किस्त आप बिना परेशानी के चुका पाएंगे, क्योंकि एक जल्दबाजी में लिया गया फैसला सालों तक आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

यह कर्ज एक-दो साल का नहीं, दशकों का होता है

होम लोन आम तौर पर 15 से 20 साल, और कई मामलों में उससे भी लंबी अवधि के लिए लिया जाता है। यानी इतने लंबे समय तक हर महीने आपकी सैलरी का एक तय हिस्सा EMI के नाम कटता रहेगा। इसी वजह से सिर्फ इस आधार पर लोन लेना समझदारी नहीं है कि बैंक आपको कितने का पात्र मान रहा है; असली पैमाना आपकी अपनी जरूरत और किस्त लौटाने की वास्तविक ताकत होनी चाहिए।

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किस्त का बोझ कितना हो, यही सबसे बड़ा सवाल

फाइनेंशियल एडवाइजर Ankur Warikoo का मानना है कि होम लोन की EMI किसी भी सूरत में आपकी मासिक आय के 30 प्रतिशत से ऊपर नहीं जानी चाहिए। इसे एक उदाहरण से समझें — अगर आपकी महीने की तनख्वाह 1 लाख रुपये है, तो किस्त करीब 30,000 रुपये तक ही सीमित रहनी चाहिए। यह सीमा बनाए रखने से आपके बाकी जरूरी खर्चों पर आंच नहीं आती और घर का बजट संतुलित बना रहता है।

इन खर्चों को बजट से बाहर मत रखिए

एक परिवार के सामने सिर्फ घर की किस्त ही नहीं होती; कई ऐसे खर्च होते हैं जिन्हें टालना मुमकिन नहीं। बच्चों की स्कूल फीस, हेल्थ इंश्योरेंस, इलाज पर होने वाला खर्च, गाड़ी की EMI, रोजमर्रा का घर-गृहस्थी का खर्च और साथ ही निवेश व बचत — ये सब इसी कमाई से चलते हैं। अगर आय का बड़ा टुकड़ा अकेले होम लोन की किस्त निगल जाएगी, तो इन बाकी जरूरतों को संभालना मुश्किल हो जाएगा।

बड़ा मकान पहले या बच्चों का भविष्य?

विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों की पढ़ाई भविष्य के लिए सबसे कीमती निवेश है। उच्च शिक्षा का खर्च जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए केवल एक बड़ा घर खरीदने की चाह में अपनी हैसियत से ज्यादा कर्ज उठा लेना समझदारी नहीं कही जाएगी। जरूरत हो तो थोड़ा छोटा घर चुना जा सकता है, मगर बच्चों की शिक्षा और परिवार की सुरक्षा के साथ समझौता करना ठीक नहीं।

लोन के लिए हाथ बढ़ाने से पहले यह हिसाब लगाएं

आवेदन करने से पहले एक बार बैठकर अपनी कुल आमदनी, महीने भर के खर्च, मौजूदा बचत और आगे आने वाली वित्तीय जरूरतों का पूरा जोड़-घटाव कर लें। अगर आपकी किस्त आय के 30% के आसपास टिकती है, तो आर्थिक रूप से आपका पलड़ा कहीं ज्यादा मजबूत रहेगा। आखिरी बात गांठ बांध लीजिए — मायने यह नहीं रखता कि बैंक आपको कितना बड़ा लोन देने को तैयार है, मायने सिर्फ यह रखता है कि आप कितनी किस्त बिना किसी मानसिक दबाव के आराम से चुका सकते हैं।

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