व्हिस्की बनाने की सदियों पुरानी परंपरा आमतौर पर स्कॉटलैंड और आयरलैंड की ओक बैरल वाली भट्टियों से पहचानी जाती रही है। हालांकि, फ्रांस में इन 2,000 साल पुरानी तय परंपराओं को दरकिनार करते हुए डिस्टिलेशन की दुनिया में एक अनोखा प्रयोग सामने आया है। स्कॉटलैंड और आयरलैंड की मशहूर डिस्टिलरीज से लगभग 1,000 मील दूर स्थित मेसन लिनेती एक ऐसी स्पिरिट बना रही है, जिसे तैयार करने का तरीका व्हिस्की उद्योग में पहले कभी नहीं देखा गया। यह कंपनी शराब बनाने के लिए नहीं, बल्कि वाइन विज्ञान की तकनीकों को फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरिटी में लागू करके पूरी तरह अलग बनावट और सुगंध वाली व्हिस्की पेश कर रही है।
मेसन लिनेती का यह उत्पाद ताज़ा, मिनरल, फ्लोरल और अलग बनावट से भरपूर स्पिरिट के तौर पर सामने आया है। जून 2025 में इस उत्पादक ने प्रतिष्ठित वर्ल्ड व्हिस्की फोरम की मेजबानी की थी, जिसके बाद से इसके काम करने के अनोखे तरीकों ने पूरी इंडस्ट्री में भारी दिलचस्पी पैदा कर दी है। इसका मुख्य कारण सिर्फ इसका बेहतरीन स्वाद ही नहीं है, बल्कि यह भी है कि लिनेती की उन्नत वैज्ञानिक तकनीक पारंपरिक प्रक्रियाओं के मुकाबले कई साल पहले ही व्हिस्की को बोतल में उतारने लायक बना देती है।
वाइन साइंस और मॉलिक्यूलर प्रयोगों की नींव
मेसन लिनेती के इस खास कॉन्सेप्ट के पीछे मगाली पिकार्ड और उनके पार्टनर व सह-संस्थापक एलेक्स कोस्कुल्युएला का दिमाग है। मगाली पिकार्ड एक केमिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ बोर्डो से एनोलॉजी (दाख रस विज्ञान) में डॉक्टरेट किया है। इस उपक्रम की शुरुआत 2018 में उनके दोस्त जेवियर पायन के साथ हुई थी, जिन्होंने कोस्कुल्युएला के साथ मिलकर वाइन और स्पिरिट्स मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की थी।
महामारी के लॉकडाउन के दौरान जब लोग गेमिंग कंसोल और नेटफ्लिक्स जैसी चीज़ों में समय बिता रहे थे, पिकार्ड ने बैरल बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी डेंपटोस में स्पिरिट्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में हासिल अपने अनुभवों को और तराशा। उनका मकसद व्हिस्की बनाने के लिए ऐसा वैज्ञानिक नजरिया तैयार करना था, जो स्वाद के लिए सिर्फ लकड़ी के बैरल पर निर्भर न रहे। इसके बजाय उन्होंने मॉलिक्यूलर साइंस, सेंसरी एनालिसिस और बड़े पैमाने पर डेटा जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया। उस समय पिकार्ड अपने प्रयोगों का विवरण एक खुली ऑनलाइन लॉगबुक के रूप में भी साझा कर रही थीं।
इन गहन प्रयोगों के बाद पिकार्ड और कोस्कुल्युएला जिस अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचे, वह व्हिस्की उद्योग की आम धारणा से बिल्कुल उलट था। उनका मानना था कि किसी बेहतरीन स्पिरिट की गुणवत्ता बैरल में बिताए सालों से नहीं, बल्कि फर्मेंटेशन प्रक्रिया के दौरान ही तय हो जाती है। अधिकांश व्हिस्की निर्माता हमेशा लकड़ी के पीपे या कास्क की शैली पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन लिनेती का दृष्टिकोण इससे पूरी तरह भिन्न है। उनका लक्ष्य उत्पादन की मात्रा बढ़ाना नहीं, बल्कि व्हिस्की की गुणवत्ता सुधारना है, विशेष रूप से मैच्योरिटी से पहले के चरणों पर काम करना।
फर्मेंटेशन का अनूठा तरीका और कंक्रीट के अंडे
मेसन लिनेती की पूरी वैज्ञानिक फर्मेंटेशन प्रक्रिया उस खास जगह पर पूरी होती है जिसे एग बॉक्स कहा जाता है। यह एक विशाल हॉल है, जिसमें सात भीमकाय कंक्रीट के अंडाकार फर्मेटर्स छत तक खड़े दिखाई देते हैं। आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले स्टेनलेस स्टील के मुकाबले कंक्रीट काफी मोटा होता है, जिसकी वजह से तापमान पर बेहद सटीक नियंत्रण रखना संभव हो पाता है। इसके अलावा, इन अंडाकार संरचनाओं के भीतर कोई आंतरिक उभार या कोने नहीं होते, जिससे खमीर उठने के दौरान तरल पदार्थ का बहाव और मथना काफी बेहतर तरीके से होता है।
फर्मेंटेशन शुरू होने से पहले ऑर्गेनिक फ्रेंच जौ को ठंडे पानी में भिगोया जाता है, ताकि उसके ब्राइट और ताज़ा फ्लेवर बाहर आ सकें। इसके बाद सात दिनों तक चलने वाली एक लंबी फर्मेंटेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो स्कॉच के सामान्य दो से तीन दिनों की तुलना में काफी लंबी है। इसके साथ ही इसमें लीज एजिंग की तकनीक जोड़ी जाती है, जिसमें वाश को दो हफ़्तों तक फर्मेंटेशन प्रक्रिया की मृत खमीर कोशिकाओं के संपर्क में रखा जाता है। यह वही प्रक्रिया है जिसे शैंपेन या शारदोने जैसी वाइन बनाने में अपनाया जाता है, जिससे तरल में फ्लोरल और फ्रूटी सुगंध गहरी होती है।
पिकार्ड ने इसमें मैलोलैक्टिक फर्मेंटेशन की तकनीक भी शामिल की है। यह वाइन बनाने का एक सेकेंडरी प्रोसेस है, जहां लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया तीखे मैलिक एसिड को नरम और मलाईदार लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं। स्कॉच उत्पादन में सख्त नियमों के कारण ऐसी प्रक्रिया की अनुमति नहीं है, लेकिन यूरोपीय संघ के कानून इस तरह के बदलाव की छूट देते हैं। वाइन में यह प्रक्रिया तरल को मुलायम टेक्सचर देती है, लेकिन लिनेती की व्हिस्की में क्रीमी अहसास के साथ-साथ यह स्वाद को देर तक टिकने वाला और फ्लोरल बना देती है।
कम समय, कम बर्बादी और एंजल्स शेयर की बचत
बैरल में जाने से पहले के इन सभी प्रयासों का लाभ सिर्फ खास स्वाद तक सीमित नहीं है। हालांकि मेसन लिनेती की प्री-मैच्योरिटी प्रक्रिया में आम डिस्टिलरीज से कुछ हफ्ते अधिक लगते हैं, लेकिन यह बैरल में लगने वाले दो से चार साल के समय की बचत कर देती है। यही वजह है कि लिनेती की अपेक्षाकृत कम उम्र की व्हिस्की कई साल पुरानी सिंगल माल्ट स्कॉच को सीधी टक्कर देती है।
इसके अलावा, कम समय में तैयार होने से कंपनी को वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान से भी राहत मिलती है। बैरल में उम्र बढ़ने के दौरान जो व्हिस्की लकड़ी के छिद्रों से प्राकृतिक रूप से वाष्पीकृत होकर उड़ जाती है, उसे व्हिस्की की भाषा में एंजल्स शेयर कहा जाता है। हर साल लगभग 2 प्रतिशत व्हिस्की हवा में उड़ जाती है, जिसका मतलब है कि 10 साल बाद मिलने वाले अंतिम वॉल्यूम के लिए लगभग 20 प्रतिशत अधिक उत्पादन करना पड़ता है। ऐसे में तीन साल के भीतर संतुलित और स्वादिष्ट उत्पाद तैयार कर लेने से कच्चे माल, गोदाम की जगह और भारी ऊर्जा की बचत होती है।
डेटा साइंस, वित्तीय संकट और नए बाज़ार में दस्तक
वाइन तकनीकों के अलावा पिकार्ड और कोस्कुल्युएला के काम की दूसरी सबसे बड़ी रीढ़ डेटा विश्लेषण है। प्रत्येक उत्पादित बैच के लिए लगभग 10,000 लाइनों वाली एक्सेल फाइलें तैयार की जाती हैं। ब्रूइंग के दौरान तापमान, समय, पंप की ट्रांसफर क्षमता और जोड़े गए पानी की मात्रा दर्ज होती है। फर्मेंटेशन के दौरान हर 20 मिनट पर समय और तापमान नोट किया जाता है, जबकि स्टिल्स के लिए एबीवी, तापमान और गति पर नज़र रखी जाती है। सुधारों को सटीक रूप से ट्रैक करने के लिए एक बार में केवल एक ही पैरामीटर बदला जाता है। फर्मेंटेशन के प्रोजेक्ट पर अलग-अलग सैंपल से दो हफ़्तों में डेटा मिल जाता है, जबकि मैच्योरिटी पर तीन साल पहले शुरू किए गए अध्ययन के परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
डेटा साइंस की इस लंबी प्रक्रिया के साथ-साथ कंपनी को गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। पिछले साल जुलाई में लिनेती को तब दिवालिया प्रक्रिया में जाना पड़ा, जब उसके मुख्य वाइन-उत्पादक निवेशक ने हाथ खींच लिए थे। हालांकि, हालात बिगड़ने से पहले ही कंपनी को एक अज्ञात फ्रांसीसी निवेशक मिल गया, जिन्होंने लग्जरी उद्योग से अपनी संपत्ति बनाई थी। इस नई पूंजी के सहारे हाल ही में मेसन लिनेती की व्हिस्की पहली बार यूके में आम बिक्री के लिए उपलब्ध हुई है, जबकि 2028 में इसे अमेरिका में पेश करने की योजना है।
लॉन्च की गई श्रृंखला में एक कोर एक्सप्रेशन कैलिबर नंबर 1 शामिल है, जिसके साथ दो सीमित संस्करण कॉम्प्लिकेशन्स भी पेश किए गए हैं, जिनके नाम लक्जरी घड़ी निर्माण की दुनिया से प्रेरित हैं। 47.7 प्रतिशत एबीवी वाली कैलिबर नंबर 1 सिंगल माल्ट 70 सीएल (लगभग 23.7 फ्लूइड आउंस) के लिए £50 (लगभग $67) की कीमत पर उपलब्ध है। इसे ब्रांड के डीएनए के रूप में परिष्कृत और जटिल बताया गया है। वहीं एक्स-बॉर्बन कास्क में तैयार कॉम्प्लिकेशन नंबर 1 केवल 850 बोतलों तक सीमित है, जो पूरी तरह मैलोलैक्टिक फर्मेंटेशन पर केंद्रित है। ओलोरोसो शेरी कास्क से प्रभावित कॉम्प्लिकेशन नंबर 2 मात्र 750 बोतलों में उपलब्ध है। साढ़े तीन साल पुरानी होने के बावजूद ये सभी उत्पाद कहीं अधिक परिपक्व स्वाद देते हैं।
व्हिस्की समीक्षक और पूर्व संपादक बेकी पास्किन का कहना है कि यह प्रयोग दशकों में इस उद्योग का सबसे बड़ा नवाचार है और दुनिया भर के अन्य निर्माता भी इन तकनीकों को अपना सकते हैं। इसी तरह, 14 पुस्तकों के लेखक और वर्ल्ड व्हिस्की फोरम के डेव ब्रूम ने आणविक स्तर पर लकड़ी, हवा और स्पिरिट के इस तालमेल को क्रांतिकारी बताते हुए मेसन लिनेती को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण डिस्टिलरीज में से एक करार दिया है।



















