भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेष शनिवार को विशेष विमान से अरुणाचल प्रदेश लाए गए, जहां तीन प्रमुख बौद्ध केंद्रों पर तीन सप्ताह तक चलने वाली एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। नई दिल्ली से लाई गईं इन पावन अस्थियों की अगवानी मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तवांग एयरफोर्स स्टेशन पर की। इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं और पर्यटकों को पवित्र अवशेषों के दर्शन करने और समृद्ध बौद्ध परंपराओं को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करना है।
तवांग से नामसाई तक दर्शन का पूरा कार्यक्रम
इस तीन हफ्ते की प्रदर्शनी की शुरुआत तवांग वॉर मेमोरियल से होगी। ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से यानी तवांग मठ में 31 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन रखा गया है। तवांग में श्रद्धालुओं के दर्शन के बाद इस पावन संग्रह को बोमडिला ले जाया जाएगा, जिसके बाद अंतिम चरण में यह नामसाई पहुंचेगा। इन तीनों बौद्ध केंद्रों पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश और दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
भारतीय वायुसेना का आभार और पारंपरिक अनुष्ठान
अवशेषों के सकुशल आगमन पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भारतीय वायुसेना की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी से सीमांत राज्य तक इन पवित्र अवशेषों को सुरक्षित पहुंचाने में वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी से पहले तवांग मठ में कई पारंपरिक बौद्ध अनुष्ठान संपन्न किए गए। पेमा खांडू ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उन्होंने गादेन नामग्याल ल्हात्से में आयोजित पारंपरिक अनुष्ठानों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
इन अनुष्ठानों में पवित्र अवशेषों के शुद्धिकरण के लिए किया जाने वाला थ्रिसोल, नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए आयोजित रामने, तथा अवशेषों के संरक्षण और मंगल कामना के लिए किया जाने वाला मंडल तेनसुंग शामिल रहा। इन सभी वैदिक और पारंपरिक प्रक्रियाओं के जरिए आयोजन की सफलता और आध्यात्मिक गरिमा सुनिश्चित की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश और शांति का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस प्रदर्शनी के लिए अपनी शुभकामनाएं भेजीं और देश की बौद्ध विरासत में अरुणाचल प्रदेश के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के संदेश के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह संदेश भारत के सभ्यतागत इतिहास पर बौद्ध परंपराओं के स्थायी प्रभाव को रेखांकित करता है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस अवसर को राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे जाकर शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश देती हैं। उन्होंने देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं को इस प्रदर्शनी में शामिल होने का निमंत्रण दिया और उम्मीद जताई कि इन पवित्र अवशेषों के दर्शन से लोगों में आपसी समझ और सद्भावना और गहरी होगी।























