राष्ट्रीय राजधानी में लगातार गहराते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई कड़े कदम उठाए गए हैं। 1 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों के प्रवेश को लेकर नए नियम और प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी हो रहे हैं। इस कदम का सीधा असर पड़ोसी राज्यों से आने वाले सामान्य यात्रियों, अंतरराज्यीय परिवहन ऑपरेटरों, व्यावसायिक गतिविधियों और दैनिक यात्रियों पर पड़ने वाला है। ठंड के शुरुआती महीनों में हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब होने लगती है, जिसे थामने के उद्देश्य से यह सख्त कार्ययोजना जमीन पर उतारी जा रही है ताकि अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों को शहर की सीमा में दाखिल होने से रोका जा सके।
प्रवेश के लिए इन वाहनों को मिली है अनुमति
प्रदूषण नियंत्रण उपायों के तहत चुनिंदा वाहन श्रेणियों को ही शहर में आवागमन की छूट दी गई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 29 अक्टूबर को एक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर स्पष्ट किया था कि किन वाहनों को नियमों के दायरे में रहते हुए राजधानी में प्रवेश दिया जाएगा। इन अनुमत श्रेणियों में मुख्य रूप से शामिल हैं
- बीएस-VI उत्सर्जन मानकों का पूरी तरह पालन करने वाले आधुनिक वाहन।
- कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी से संचालित वाहन।
- पूरी तरह से बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी)।
- विभिन्न अनिवार्य सेवाओं और लागू सरकारी छूटों के तहत आने वाले विशेष वाहन।
इन मानकों को पूरा करने वाली गाड़ियों को शहर की सीमा में बिना किसी बाधा के आने-जाने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते उनके पास सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज मौजूद हों।
प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले वाहन और श्रेणियां
सख्ती के इस नए चरण में उन सभी श्रेणियों को चिन्हित किया गया है जो वायु गुणवत्ता को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। बीएस-VI मानक से नीचे की सभी गाड़ियों के साथ-साथ ऐसे सभी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) नहीं है।
इसके अलावा अंतरराज्यीय स्तर पर चलने वाली ऐसी बसें और व्यावसायिक वाहन जो निर्धारित नियमों पर खरे नहीं उतरते, वे भी दिल्ली सीमा में नहीं घुस सकेंगे। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में चलने वाले ट्रैक्टर तथा जुगाड़ वाहनों को भी इस व्यापक पाबंदी का हिस्सा बनाया गया है। दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसी वाणिज्यिक गाड़ियां जो मानकों का उल्लंघन करती पाई जाएंगी, उन्हें सीमाओं पर ही रोक दिया जाएगा।
दिल्ली से बाहर जाने वाले ट्रकों के लिए डायवर्जन योजना
मालवाहक और भारी व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर निगरानी को काफी कड़ा कर दिया गया है। ऐसे सभी गैर-आवश्यक ट्रक जिनका गंतव्य दिल्ली शहर नहीं है और जो केवल रास्ते के तौर पर राजधानी की सड़कों का इस्तेमाल करते थे, उनके सीधे प्रवेश पर पाबंदी रहेगी।
ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने ऐसे सभी भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग अनिवार्य किए हैं। इन ट्रकों को शहर के भीतर आने के बजाय ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हुए अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ना होगा। इस व्यवस्था से न केवल दिल्ली की आंतरिक सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, बल्कि शहर की हवा में भारी उत्सर्जक तत्वों की मात्रा घटाने में भी मदद मिलेगी।
पेट्रोल पंपों पर ईंधन के लिए पीयूसीसी हुआ अनिवार्य
सख्त वाहन पाबंदियों के साथ-साथ एक और अत्यंत महत्वपूर्ण नियम 1 नवंबर से जमीन पर उतर रहा है। दिल्ली के किसी भी ईंधन स्टेशन पर बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) के गाड़ियों को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
यह सख्त नियम केवल पेट्रोल या डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि पेट्रोल पंपों और गैस स्टेशनों पर मिलने वाले पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी—इन चारों प्रकार के ईंधनों पर पूरी तरह लागू होगा। वाहन चालकों को पंप पर अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाने से पहले वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सड़कों पर दौड़ने वाला प्रत्येक वाहन तय सीमा के भीतर ही धुआं छोड़ रहा है।



















