देश के विभिन्न राज्यों और दूर-दराज के इलाकों से लाखों युवा एक बेहतर करियर और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में औद्योगिक शहर नोएडा का रुख करते हैं। हालांकि, यहां बसने के बाद दैनिक जीवन का खर्च उठाना और वित्तीय संतुलन बनाए रखना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। महीने की शुरुआत में मिलने वाली तनख्वाह मकान के किराए, भोजन, आवागमन और घर भेजे जाने वाले पैसों में बहुत तेजी से निकल जाती है। इस वजह से 15-40 हजार रुपये प्रति माह कमाने वाले अधिकांश कर्मचारी महीने के उत्तरार्ध में गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करने के लिए मजबूर हैं।
15 तारीख के बाद शुरू होता है किस्तों और कटौती का दौर
बिहार के मूल निवासी और नोएडा में कॉर्पोरेट क्षेत्र में कार्यरत मयंक सिंह का कहना है कि निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति महीने की 15 तारीख के बाद काफी नाजुक हो जाती है। जब 1 तारीख को खाते में वेतन आता है, तो शुरुआती दो हफ्ते किसी तरह आसानी से कट जाते हैं। लेकिन 15 तारीख बीतते ही दैनिक खर्चों के लिए बजट को अत्यधिक सीमित करना पड़ता है और बाकी बचा महीना किस्तों व छोटी-छोटी कटौती के सहारे गुजारना पड़ता है। 15,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये तक की मासिक आय वाले युवाओं के लिए यह स्थिति सबसे अधिक कष्टदायक बनी हुई है।
महंगाई की दोहरी मार: आटा, तेल और कमरों के किराए आसमान पर
नोएडा निवासी अतुल यादव का मानना है कि सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हर गतिविधि के लिए पैसे की जरूरत होती है और यही वजह है कि महीने के अंत तक सैलरी का पता ही नहीं चलता। बाजार में चीनी 65 रुपये प्रति किलो, सरसों का तेल 200 रुपये प्रति लीटर और आटा 40 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी नए रिकॉर्ड बना रही हैं। गरीब वर्ग को सरकारी राशन योजना का सहारा मिल जाता है, लेकिन 15,000, 20,000 या 30,000 रुपये की नौकरी करने वाला मध्यम वर्ग बिना किसी मदद के पिस रहा है। नोएडा में एक अकेला स्वतंत्र कमरा किराए पर लेने के लिए कम से कम 10,000 रुपये चुकाने पड़ते हैं, जिससे बचा हुआ वेतन घरेलू खर्च चलाने के लिए नाकाफी साबित होता है।
संपत्ति के सपने दूर, किस्तों पर आईफोन और गाड़ियों से संतोष
विगत 15 वर्षों से नोएडा में रह रहे बिहार निवासी विकास झा के अनुसार, खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर रसोई गैस और ईंधन की दरों में हुई बढ़ोतरी कभी वापस नीचे नहीं आती। बढ़ती महंगाई के कारण मध्यम वर्ग के लिए नोएडा जैसे बड़े शहरों में अपना फ्लैट, मकान या जमीन खरीदना लगभग असंभव हो गया है। स्थायी संपत्ति न बना पाने की निराशा में लोग किस्तों पर आईफोन जैसे महंगे गैजेट और वाहन खरीदकर छोटी-छोटी खुशियों में संतोष तलाश रहे हैं। आज की स्थिति यह है कि नोएडा में बैंक एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) कराने वाले लोगों का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है क्योंकि बचत के लिए पैसे ही नहीं बचते।
पांच वर्षों में 15 साल से अधिक बढ़ी महंगाई
कई सालों से नोएडा में निवास कर रहे सुधीर रॉय बताते हैं कि 30,000 से 40,000 रुपये कमाने वाले लोग भी महीने के अंत में बिल्कुल खाली हाथ रह जाते हैं। आय में मामूली बढ़ोतरी की तुलना में दैनिक आवश्यकता की चीजों के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। एक बार किसी वस्तु या सेवा का मूल्य बढ़ जाने के बाद वह कभी कम नहीं होता, जिससे निचले और मध्यम वर्ग के लिए महीने के अंतिम दिनों में नकद रुपयों का संकट खड़ा हो जाता है। उनका आकलन है कि पिछले 4 से 5 सालों के भीतर जितनी तेजी से महंगाई बढ़ी है, उतनी बीते 15 वर्षों में भी देखने को नहीं मिली थी।



















