सैलरी का पहला चेक हाथ में आते ही कुछ आदतें तय कर देती हैं कि आपकी आगे की जिंदगी पैसों को लेकर आसान रहेगी या मुश्किल। इसके लिए कोई भारी-भरकम कैलकुलेशन नहीं करनी पड़ती, बस सात आसान फॉर्मूले याद रखने होते हैं। ये फॉर्मूले उतने ही काम के हैं जितने नौकरी के पहले साल में, उतने ही रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर भी।
50/30/20 फॉर्मूला सबसे पहले अपनाएं
नौकरी लगते ही और सैलरी आते ही सबसे पहला नियम यही अपनाना चाहिए। 50/30/20 का यह फॉर्मूला शुरुआत में ही नहीं बल्कि पूरी जिंदगी वित्तीय आजादी का एहसास कराता रहता है। इसके मुताबिक कमाई का 50 फीसदी जरूरी खर्चों पर और 30 फीसदी शौक व ख्वाहिशों पर खर्च किया जा सकता है। लेकिन इससे पहले 20 फीसदी रकम निवेश या बचत में डालना बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए।
रिटायरमेंट के लिए 4% वाला नियम
करियर शुरू होते ही रिटायरमेंट की प्लानिंग भी शुरू कर देनी चाहिए। 4 फीसदी का यह नियम बताता है कि रिटायरमेंट पर जो भी कॉर्पस तैयार होता है, उसमें से पहले साल सिर्फ 4 फीसदी हिस्सा ही निकाला जाना चाहिए। यह निकासी महंगाई दर के हिसाब से हर साल थोड़ी बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर रिटायरमेंट कॉर्पस 1 करोड़ रुपये का बनता है तो पहले साल की निकासी महज 4 लाख रुपये तक ही सीमित रखनी चाहिए।
इमरजेंसी फंड को नजरअंदाज न करें
फाइनेंस का शायद सबसे जरूरी नियम यही है कि कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड हमेशा तैयार रखा जाए। मुसीबत कभी बताकर नहीं आती और आज के माहौल में नौकरी अचानक चली जाए तो हालात बिगड़ते देर नहीं लगती। ऐसे में अचानक फंसने के बजाय जरूरी खर्चों, मेडिकल इमरजेंसी और किसी भी अचानक आई जरूरत को पूरा करने लायक फंड पास में होना चाहिए।
किराया या होम लोन कमाई के 1/3 से ज्यादा न हो
चाहे आप किराए के घर में रहते हों या घर खरीदने-बनाने के लिए लोन लिया हो, एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि यह खर्च महीने की कमाई के 33 फीसदी से ज्यादा न हो। हाउसिंग कॉस्ट या किराया कमाई के करीब एक तिहाई तक सीमित रहे तो बाकी खर्चों और भविष्य की प्लानिंग पर कोई असर नहीं पड़ता।
लग्जरी पर खर्च तो 2x इन्वेस्टिंग रूल भी अपनाएं
लग्जरी किसे पसंद नहीं और ब्रांडेड चीजों का बढ़ता क्रेज युवाओं को सबसे ज्यादा खींचता है। लेकिन 2x इन्वेस्टिंग रूल कहता है कि लग्जरी पर जितना पैसा खर्च किया जाए, उतना ही निवेश में भी लगाया जाए। मसलन 10 हजार रुपये का ब्रांडेड जूता खरीदा है तो 10 हजार रुपये निवेश भी करने होंगे। मतलब शौक पर खर्च तभी करें जब भविष्य के लिए उतनी ही रकम बचाई जा सके।
कार खरीदते वक्त 20/4/10 का नियम याद रखें
नौकरी लगते ही और हाथ में पैसा आते ही ज्यादातर लोगों की पहली जरूरत कार खरीदना बनती है। फाइनेंस का 20/4/10 नियम कार खरीदने के लिए तीन शर्तें रखता है। पहली, कार खरीदते समय कम से कम 20 फीसदी डाउन पेमेंट किया जाए। दूसरी, अगर लोन लेकर फाइनेंस कराया जा रहा है तो कार लोन की अवधि तय सीमा से ज्यादा न हो। तीसरी, कार पर खर्च होने वाली कुल रकम महीने की कमाई के सिर्फ 10 फीसदी तक ही सीमित रहे।
रूल ऑफ 72 बताएगा पैसा कब होगा दोगुना
इन सभी फॉर्मूलों में रूल ऑफ 72 को सबसे अहम माना जाता है। कोई भी निवेश करने से पहले यह नियम तुरंत बता देता है कि लगाया गया पैसा कितने समय में दोगुना होगा। इसके लिए 72 को उम्मीद किए जा रहे रिटर्न से भाग दिया जाता है, जिससे पैसा दोगुना होने में लगने वाले सालों की संख्या पता चल जाती है। जैसे अगर किसी निवेश प्लान पर 12 फीसदी रिटर्न मिल रहा है तो 72 को 12 से भाग देने पर पता चलता है कि यह रकम सिर्फ 6 साल में दोगुनी हो जाएगी।



















