रिटायरमेंट के बाद अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने और टैक्स की देनदारी कुछ कम करने के इरादे से बहुत से लोग गृहिणी पत्नी के नाम पर बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खुलवा देते हैं। योजना सीधी लगती है, लेकिन उलझन तब शुरू होती है जब उसी FD के ब्याज पर बैंक TDS काट लेता है। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि बैंक ने जो टैक्स काटा, उसका क्लेम आखिर किसके नाम पर बनेगा, पति के या पत्नी के।
आय किसकी मानी जाएगी, यह क्लबिंग नियम तय करता है
इनकम टैक्स के नियम इस सवाल का जवाब बिल्कुल साफ कर देते हैं। अगर पैसा असल में पति का है और वह पत्नी के नाम पर निवेश किया गया है, तो उस निवेश पर मिलने वाला ब्याज पत्नी की नहीं, बल्कि पति की ही आय गिना जाता है। इसे ही कानून की भाषा में क्लबिंग प्रोविजंस कहते हैं, यानी पत्नी के नाम मिली यह ब्याज आय जुड़कर पति की कुल आय का हिस्सा बन जाती है।
क्या पत्नी TDS रुकवाने वाला फॉर्म दे सकती हैं?
TrendKia से बातचीत में टैक्स और निवेश एक्सपर्ट बलवंत जैन ने इस पहलू को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स कानून में कुछ शर्तों के साथ ऐसा घोषणा-पत्र जमा करने की छूट है, जिसके बाद बैंक TDS नहीं काटता। सीनियर सिटीजन को यह सुविधा तभी मिलती है जब उनकी कुल आय पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती।
लेकिन यहीं असली पेच है। इस स्थिति में पत्नी को FD की वास्तविक टैक्सपेयर नहीं माना जाएगा। FD भले ही उनके नाम पर खुली हो, पर ब्याज की आमदनी क्लबिंग प्रावधानों के चलते पति की आय में ही गिनी जाती है। इसी वजह से पत्नी ऐसा कोई फॉर्म जमा नहीं कर सकतीं, जिससे TDS की कटौती रोकी जा सके।
तो कटा हुआ TDS वापस कैसे आएगा?
घबराने की कोई जरूरत नहीं है, यह रकम कहीं डूबती नहीं। बैंक ने जो TDS काटा है, उसका क्लेम पति अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय कर सकते हैं। ITR फॉर्म में इसके लिए एक खास विकल्प मौजूद रहता है।
तरीका सीधा है। रिटर्न भरते वक्त उस ब्याज की पूरी रकम को अपनी कुल आय में दिखाएं और पत्नी का PAN नंबर पूरी सावधानी से, बिल्कुल सही दर्ज करें। जैसे ही यह जानकारी सही-सही दर्ज होती है, बैंक की ओर से काटा गया TDS सीधे पति के टैक्स अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है और रिफंड का रास्ता खुल जाता है।













