मर्चेंट नेवी में अपनी सेवाएं दे रहे भारतीय नाविक सुरेश पटनाला के निधन के बाद उनके परिवार को एक गहरा वित्तीय और मानसिक झटका लगा है। ऑन-बोर्ड ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले नाविक के परिजनों द्वारा किए गए बीमा क्लेम को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने खारिज कर दिया है। कंपनी के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और सीफेरर समुदाय में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पीड़ित परिवार का कहना है कि संकट की इस घड़ी में बीमा कंपनी द्वारा सहायता देने से इनकार करना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
घटना की पृष्ठभूमि और पीड़ित परिवार का संकट
सुरेश पटनाला मर्चेंट नेवी में ऑन-बोर्ड कार्यरत थे और हाल ही में अमेरिकी नौसेना से जुड़ी एक घटना के दौरान उनकी जान चली गई थी। यह दुर्घटना लाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण माहौल के दौरान हुई। सुरेश के अचानक चले जाने से उनके पीछे उनकी पत्नी और एक छोटा बच्चा रह गए हैं। परिवार पूरी तरह से सुरेश की कमाई और उनके द्वारा ली गई बीमा पॉलिसी पर ही निर्भर था। मुश्किल समय में अपने परिजनों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही उन्होंने यह बीमा कवर खरीदा था, लेकिन अब क्लेम खारिज होने से परिवार के सामने भविष्य का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बीमा कंपनी की दलील और क्लेम खारिज होने की वजह
बीमा क्लेम को अस्वीकार करते हुए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने तर्क दिया है कि यह दुखद हादसा एक युद्ध या तनावग्रस्त क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। कंपनी की पॉलिसी शर्तों के तहत युद्ध क्षेत्र में होने वाले हादसों को क्लेम से बाहर रखा जाता है। हालांकि, नाविक के परिवार और समर्थकों का कहना है कि सुरेश किसी सैन्य संघर्ष या युद्ध की कार्रवाई में शामिल नहीं थे। वह केवल अपने पेशे के तहत एक मर्चेंट नेवी कर्मचारी के रूप में नियमित नौवहन ड्यूटी पूरी कर रहे थे। ऐसे में तकनीकी आधार बनाकर बीमा राशि देने से मना करना न्यायसंगत नहीं है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा और एमडी को टैग कर सवाल
बीमा कंपनी के इस रुख के सामने आने के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। आम लोगों और मर्चेंट नेवी से जुड़े कर्मचारियों ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव मंत्री को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूज़र्स का तर्क है कि जब पूरा देश एक कर्तव्यनिष्ठ नाविक के निधन पर शोक मना रहा है, तब बीमा कंपनी का तकनीकी पेंच फंसाकर क्लेम खारिज कर देना अमानवीय है।
नियामक संस्थाओं से हस्तक्षेप और तुरंत भुगतान की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीफेरर समुदाय और आम जनता ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के शीर्ष प्रबंधन से मामले पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने का अनुरोध किया है। लोगों की मांग है कि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ित परिवार को तुरंत बीमा राशि का भुगतान किया जाए। इसके साथ ही, बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था आईआरडीएआई और नौवहन महानिदेशालय से भी इस विवाद में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की गई है, ताकि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले नाविक के आश्रितों को न्याय मिल सके।



















