अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने जिला स्वास्थ्य सोसायटी पूर्वी सियांग और वाधवानी एआई की साझेदारी में नवजात शिशुओं की जांच को आसान बनाने वाला आधुनिक तकनीकी समाधान पेश किया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर यानी एचबीएनसी सेवाओं को मजबूती देना है। इसके तहत एआई आधारित शिशु मापन ऐप को जमीनी स्तर पर तैनात किया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बिना भारी उपकरणों के नवजातों के शारीरिक विकास की सटीक निगरानी कर सकें।
तीन ब्लॉकों में 123 आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण
इस एआई तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। यह प्रशिक्षण सत्र पूर्वी सियांग के रुक्सिन, पासीघाट और मेबो ब्लॉकों में चलाया गया। इसमें 108 आशा कार्यकर्ताओं और 15 आशा फैसिलिटेटरों ने हिस्सा लिया और मोबाइल एप्लिकेशन के संचालन की व्यावहारिक बारीकियां सीखीं। इनके साथ ही जिला आरसीएच अधिकारी, जिला आशा नोडल अधिकारी, जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर और ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर जैसे प्रमुख प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारी भी इस सत्र का हिस्सा रहे।
15 से 20 सेकंड के वीडियो से मिलेगी नवजात के शरीर की पूरी जानकारी
वाधवानी एआई द्वारा तैयार किया गया यह न्यूबॉर्न एंथ्रोपोमेट्री टूल 42 दिन तक की उम्र वाले नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य ट्रैकिंग के लिए विकसित किया गया है। आशा कार्यकर्ता जब गृह भ्रमण करेंगी, तो वे ऐप के जरिए शिशु का लगभग 15 से 20 सेकंड का एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड करेंगी। यह तकनीकी प्रणाली उस संक्षिप्त वीडियो फुटेज का विश्लेषण करके बच्चे का वजन, लंबाई या कद, सिर की परिधि, छाती का घेरा और बांह के ऊपरी मध्य हिस्से की गोलाई खुद माप लेगी। समुदाय स्तर पर इस तरह की त्वरित डिजिटल जांच से कुपोषण या जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की पहचान बेहद तेजी से हो सकेगी।
डिजिटल रिकॉर्डिंग से एचबीएनसी निगरानी होगी पारदर्शी
इस पहल में केवल शारीरिक माप ही नहीं, बल्कि एचबीएनसी की पूरी रिपोर्टिंग प्रणाली को भी डिजिटल रूप दिया गया है। पहले आशा कार्यकर्ताओं को फाइलों और रजिस्टरों में हाथ से सारा ब्योरा दर्ज करना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और डेटा खोने का खतरा रहता था। अब नई एकीकृत प्रणाली से हर विजिट का ब्योरा तुरंत इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज हो जाएगा। इससे उच्च स्तर पर बैठे प्रोग्राम मैनेजरों और फील्ड अधिकारियों को रियल टाइम डेटा मिलेगा, जिससे स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी और समय पर जरूरी चिकित्सकीय दखल देना संभव हो सकेगा।
पांच जिलों में शुरुआती परीक्षण के बाद अब दो जिलों में विस्तार
राज्य के स्थानीय भौगोलिक हालात और बच्चों की शारीरिक बनावट के अनुकूल बनाने के लिए इस टूल का पहले भी व्यापक परीक्षण किया जा चुका है। इसे नामसाई, पापुम पारे, पूर्वी सियांग, पश्चिम सियांग और चांगलांग जिलों में जमीनी स्तर पर परखा और प्रमाणित किया गया था। इस सफल प्रक्रिया के बाद अब इस एआई टूल को पूर्वी सियांग और पश्चिम सियांग जिलों में बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है, ताकि फील्ड में इसकी सटीकता, इस्तेमाल की सुगमता और स्थानीय स्वीकार्यता का अंतिम मूल्यांकन किया जा सके।


















