अमेरिकी श्रम बाजार के अचानक सुस्त पड़ने के संकेतों ने वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़त पर रोक लगा दी है, जिससे ब्रिटिश पाउंड को निचले स्तरों से जोरदार सहारा मिला है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में जारी ताजा आर्थिक आंकड़ों में रोजगार सृजन की रफ्तार बेहद धीमी दर्ज की गई, जिसने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों को लगभग पूरी तरह धराशायी कर दिया। इस पृष्ठभूमि में पाउंड स्टर्लिंग में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.41 प्रतिशत से अधिक की मजबूती देखने को मिली।
रोजगार के कमजोर आंकड़ों ने बदला बाजार का रुख
सितंबर महीने की गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों के अनुमानों से काफी पीछे रह गई। आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सितंबर के दौरान कार्यबल में केवल 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार 90,000 नई भर्तियों की उम्मीद कर रहा था। इस सुस्ती का सीधा असर बेरोजगारी के पैमाने पर दिखाई दिया और बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके अलावा अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों में भी बड़ा संशोधन किया गया, जहां पहले बताए गए 1,62,000 के आंकड़े को घटाकर 1,33,000 कर दिया गया। श्रम बाजार की इस कमजोरी ने केंद्रीय बैंक की तरफ से आक्रामक नीति अपनाने की संभावना को काफी कम कर दिया है, जिसके चलते अक्टूबर बैठक में दरों को यथावत रखने की संभावना उछलकर 79 प्रतिशत तक पहुंच गई।
बॉन्ड यील्ड और तकनीकी स्तरों की स्थिति
कमजोर रोजगार वृद्धि के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में स्थिरता देखी गई। लंबी अवधि के यील्ड कर्व में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया, जबकि 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट का यील्ड करीब डेढ़ आधार अंक बढ़कर 5.256 प्रतिशत पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ब्रिटिश पाउंड 1.3200 के दैनिक निचले स्तर से पलटते हुए 1.3250 तक चढ़ गया, जबकि दिन के कारोबार में यह 1.3225 के आसपास स्थिर रहने की कोशिश करता दिखा। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में यह जोड़ी 1.32 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.33 की तुलना में 0.26 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच बना हुआ है।
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो पाउंड और डॉलर की इस जोड़ी में निकट अवधि का रुख अभी भी सतर्कता भरा बना हुआ है। हाजिर भाव 1.3453 के आसपास स्थित साधारण मूविंग एवरेज के समूह और ऊपर मौजूद कई ट्रेंड लाइन स्तरों के नीचे अटका है। मूल्य के लिए पहला अवरोध 1.3313 के आसपास बनी अवरोही ट्रेंड लाइन पर मौजूद है। वहीं 14 अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 33.9 पर दर्ज किया गया, जबकि लाइव डेटा में यह 32 के आसपास दिखाई दे रहा है। यह स्तर ओवरसोल्ड सीमा के बिल्कुल नजदीक है, जो यह संकेत देता है कि गिरावट का दबाव भले ही हावी हो, लेकिन अब बिकवाली की गति में ठहराव आ रहा है। मूविंग एवरेज में 50 दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज 200 दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज से नीचे रहने के कारण तकनीकी रूप से डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है।
ब्रिटेन का परिदृश्य और अन्य मुद्राओं की हलचल
ब्रिटेन के आर्थिक कैलेंडर में शुक्रवार को कोई बड़ा आधिकारिक डेटा शामिल नहीं था, लेकिन बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा मौद्रिक सख्ती जारी रहने की उम्मीदों ने स्टर्लिंग को लगातार आधार प्रदान किया। इसके साथ ही नीति निर्माताओं के आगामी भाषणों से पहले मुद्रा को स्थिरता मिली। इस बीच मैनचेस्टर के राजनीतिक पटल से जुड़ी चर्चाओं ने भी ध्यान आकर्षित किया, जहां एंडी बर्नहैम द्वारा ब्रिटेन के दोबारा यूरोपीय संघ में शामिल होने की संभावना का संकेत देने के बाद इस विषय पर चर्चा तेज हो गई। बर्नहैम ने 2016 के जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में अभियान चलाया था। सप्ताह के प्रदर्शन की बात करें तो ब्रिटिश पाउंड अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत रहा और विशेष रूप से यूरो के मुकाबले इसने सबसे शानदार प्रदर्शन दर्ज किया।
दूसरी ओर वैश्विक बाजारों में डॉलर की व्यापक नरमी का असर अन्य मुद्रा जोड़ों पर भी दिखा। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सुधरकर 0.6950 की ओर बढ़ा। व्यापारियों ने गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट से पहले 17 महीने के उच्चतम स्तर से डॉलर में मुनाफावसूली की, जबकि वैश्विक यील्ड और मुद्रास्फीति के दबाव के बीच ऑस्ट्रेलिया में नवंबर में संभावित दर वृद्धि की उम्मीदों ने स्थानीय मुद्रा का साथ दिया। जापानी येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के करीब नई दिशा तलाशने में जुटा रहा, जहां टोक्यो सीपीआई के उम्मीद से अधिक गर्म रहने और डॉलर में बिकवाली के कारण यह अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे आ गया।
कमोडिटी, ऊर्जा संकट और क्रिप्टो बाजार का रुख
कमोडिटी बाजार में सोने ने पेरोल रिपोर्ट के बाद 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार तेजी दिखाई, लेकिन वह इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सका और सप्ताह के अंत तक फिसलकर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया। अमेरिकी डॉलर पर बने नए बिकवाली दबाव के बावजूद निवेशकों द्वारा आंकड़ों के गहरे आकलन से सोने की चाल अनिश्चित बनी रही। वहीं यूरो और डॉलर की जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 तक गिरी थी, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरोप के ऊर्जा संकट, बढ़ते बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने यूरो पर भारी दबाव बनाए रखा है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में शुक्रवार को व्यापक सुधार देखने को मिला। बिटकॉइन 86,000 डॉलर के ऊपर निकलकर बाजार की अगुवाई करता दिखा, जबकि एथेरियम ने मजबूत रुख दोहराते हुए 2,700 डॉलर के पार कदम रखा, जहां 2,800 डॉलर का स्तर तात्कालिक रुकावट बना हुआ है। रिपल की कीमत 1.54 डॉलर के आसपास मंडराती रही। आने वाले समय में ऊर्जा संकट और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के साथ-साथ फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों के मिनट्स, आईएसएम सर्विसेज पीएमआई, अमेरिकी ट्रेजरी की नीलामी, कनाडा में रोजगार के आंकड़े, जापान में वेतन वृद्धि और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मिनट्स पर बाजार प्रतिभागियों की पैनी नजर रहेगी।

















