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लगातार आठ हफ्तों की गिरावट से शेयर बाजार बेहाल, जानिए इस दौर में अपनी एसआईपी चालू रखें या बढ़ाएं निवेशमनी
2 अक्तू॰ 2026, 3:12 am (20 मिनट पहले)· 0

लगातार आठ हफ्तों की गिरावट से शेयर बाजार बेहाल, जानिए इस दौर में अपनी एसआईपी चालू रखें या बढ़ाएं निवेश

निफ्टी 50 में लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बीच निवेशकों के सामने एसआईपी जारी रखने या नई पूंजी लगाने को लेकर असमंजस बना हुआ है। बाजार के ताजा आंकड़ों और रणनीतियों पर समझिए पूरा विश्लेषण।

घरेलू शेयर बाजार में लगातार दबाव गहराता जा रहा है, जहां प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 ने लगातार आठवें हफ्ते कमजोरी दर्ज की है। वैश्विक स्तर पर विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली, कच्चे तेल के दामों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़ी आशंकाओं ने दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली का माहौल बना दिया है। ऐसे मुश्किल दौर में अपनी पूंजी को घटते देख म्यूचुअल फंड निवेशक इस उधेड़बुन में हैं कि वे अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी को रोक दें, यथावत चालू रखें या फिर गिरे हुए स्तरों पर निवेश को और बढ़ा दें।

गुरुवार के कारोबारी सत्र में भारी गिरावट और बाजार पूंजीकरण को झटका

सप्ताह के कारोबारी दिन गुरुवार, 1 अक्टूबर को निफ्टी 50 लगभग 198 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर बीएसई सेंसेक्स तकरीबन 570 अंकों के नुकसान के साथ 71,909.70 पर आ गया। सत्र के दौरान अस्थिरता का आलम यह रहा कि निफ्टी गिरकर 22,200 के करीब इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया था, जबकि सेंसेक्स में दिन के दौरान 1,200 से अधिक अंकों का गोता देखा गया था।

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इस जोरदार बिकवाली के चलते एक ही दिन में निवेशकों के लगभग 8.7 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण स्वाहा हो गया। बाजार में घबराहट और उतार-चढ़ाव को मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स भी इस दौरान 16 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया, जो साफ दर्शाता है कि कारोबारी हलकों में अनिश्चितता किस कदर हावी हो चुकी है।

रिकॉर्ड स्तर से फिसलन और व्यक्तिगत शेयरों में गहरी मार

ताजा गिरावट के बाद निफ्टी 50 अब जनवरी 2026 के अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड उच्च स्तर 26,373.20 से करीब 15 प्रतिशत नीचे आ चुका है। तकनीकी परिभाषा के मुताबिक भले ही मुख्य सूचकांक अभी औपचारिक मंदी यानी बेयर मार्केट के दायरे में न पहुंचा हो, लेकिन व्यक्तिगत शेयरों के स्तर पर यह करेक्शन कहीं अधिक क्रूर रहा है। निफ्टी 500 बास्केट में शामिल 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर अपने-अपने रिकॉर्ड स्तरों से कम से कम 30 प्रतिशत नीचे फिसल चुके हैं, जिसके कारण अधिकांश खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो गहरे लाल निशान में तब्दील हो चुके हैं।

एसआईपी और रुपये की औसत लागत का मूल गणित

बाजार की चाल चाहे जो भी हो, एक अनुशासित एसआईपी निवेशकों को हर महीने या नियमित अंतराल पर एक तय रकम निवेश करने की सुविधा देती है। जब शेयर बाजार गिरता है और म्यूचुअल फंड योजनाओं की एनएवी नीचे आती है, तब उसी बंधी हुई रकम में निवेशकों को ज्यादा यूनिट्स अलॉट होती हैं। इस वित्तीय प्रक्रिया को रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है, जो समय के साथ निवेशक की कुल खरीद लागत को कम करने में मददगार साबित होती है।

इंक्रेड मनी में म्यूचुअल फंड के सीईओ नितिन अग्रवाल के अनुसार, बाजार में गिरावट का यह दौर निवेशकों के धैर्य की परीक्षा लेता है और जो इस असहजता को झेलते हैं, बाजार अंततः उन्हें ही पुरस्कृत करता है। नितिन अग्रवाल ने कहा, "You are not losing money on your SIP, you are buying more units at lower prices. That is not a problem; that is the mechanism working as intended."

हालांकि निवेशकों को यह बात भी भली-भांति समझनी चाहिए कि रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग कभी भी गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करती और न ही नुकसान को पूरी तरह रोक सकती है। अगर बाजार में सुस्ती या मंदी लंबे समय तक खिंचती है, तो पोर्टफोलियो का मूल्य और भी घट सकता है। इसलिए निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर ही कोई कदम उठाना चाहिए।

क्या चालू एसआईपी को बनाए रखना समझदारी है?

जिन निवेशकों के पास नियमित आय का स्रोत है, जिन्होंने आपात स्थिति के लिए पर्याप्त इमरजेंसी फंड तैयार कर रखा है और जिनका निवेश क्षितिज दीर्घावधि का है, उनके लिए मौजूदा एसआईपी जारी रखना अनुशासन का सर्वोत्तम प्रमाण है। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव या गिरावट के डर से निवेश रोकना भविष्य के बड़े कॉर्पस को चोट पहुंचा सकता है। नियमित निवेश की बदौलत मुश्किल समय में खरीदी गई सस्ती यूनिट्स बाजार में सुधार आने पर सबसे तेज गति से मुनाफा बनाती हैं।

क्या मौजूदा स्तरों पर निवेश की रकम बढ़ानी चाहिए?

मौजूदा एसआईपी को जारी रखने के अलावा कई निवेशक यह भी सोच रहे हैं कि क्या अतिरिक्त पूंजी झोंकने का यह सही समय है। जानकारों का मानना है कि इसके लिए व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति का अलग से आकलन किया जाना चाहिए।

नितिन अग्रवाल का कहना है कि जिनके पास अधिशेष पूंजी मौजूद है, पर्याप्त इमरजेंसी फंड सुरक्षित है और जिनका निवेश का नजरिया कम से कम पांच साल या उससे अधिक का है, उनके लिए आठ हफ्ते की गिरावट कोई संकट नहीं बल्कि एक शानदार प्रवेश अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार कभी भी दोनों दिशाओं में सीधी रेखा में नहीं चलते, इसलिए आठ हफ्ते की लगातार गिरावट का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि नौवां हफ्ता भी नकारात्मक ही रहेगा।

बाजार में मचे घमासान के पीछे के प्रमुख कारण

शेयर बाजार में पिछले दो महीनों से जारी इस तेज गिरावट के तार कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़े हुए हैं

  • अमेरिका और ईरान का टकराव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव और अनिर्णायक राजनयिक बातचीत वैश्विक बाजारों में निरंतर अनिश्चितता और भारी अस्थिरता पैदा कर रही है।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय इक्विटी से लगातार धन निकाल रहे हैं। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों के दौरान एफपीआई ने भारतीय इक्विटी से लगभग 2.50 ट्रिलियन रुपये निकाले हैं, जबकि इसी अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 6.28 ट्रिलियन रुपये का निवेश किया। सितंबर के महीने में ही विदेशी निवेशकों ने एक्सचेंजों के जरिए 45,536 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिसमें से 20,128 करोड़ रुपये की निकासी केवल दो कारोबारी सत्रों में की गई। इस निकासी का सबसे गहरा असर लार्ज-कैप शेयरों पर देखा गया है।
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अमेरिकी बॉन्ड पर आकर्षक प्रतिफल मिलने की वजह से विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों के शेयर कम आकर्षक हो गए हैं।
  • रुपये में कमजोरी और घरेलू यील्ड: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 96.50 रुपये के स्तर तक गिर गया है। इसके साथ ही भारत की 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड भी बढ़कर 7.1 प्रतिशत के पार निकल गई है।
  • सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का डर: महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच बाजार प्रतिभागी सख्त मौद्रिक नीति को लेकर चिंतित हैं। अक्टूबर की नीतिगत बैठक में संभावित ब्याज दर वृद्धि की आशंकाओं ने भी 1 अक्टूबर को बिकवाली के दबाव को तेज किया है।

करेक्शन के समय निवेशक अक्सर करते हैं ये तीन बड़ी गलतियां

गिरावट के दौर में भावनात्मक दबाव में आकर निवेशक अक्सर ऐसे फैसले ले बैठते हैं जो उनके वित्तीय भविष्य को नुकसान पहुंचाते हैं। नितिन अग्रवाल ने निवेशकों की तीन सबसे आम गलतियों को रेखांकित किया है।

उनके अनुसार, पहली सबसे बड़ी गलती एसआईपी को बीच में ही रोक देना है। एसआईपी की ताकत रुपये की औसत लागत से आती है और यह तंत्र तभी काम करता है जब आप मंदी के समय भी बाजार में बने रहें। दूसरी गलती पोर्टफोलियो को बार-बार और हर दिन जांचना है। गिरावट के दौरान रोजाना एनएवी देखना केवल घबराहट बढ़ाता है, जबकि मासिक आधार पर पोर्टफोलियो देखने वाला निवेशक कम भावुक निर्णय लेता है।

तीसरी गलती का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार से बाहर निकलने के बाद दोबारा प्रवेश करने के लिए सही समय का इंतजार करना घातक साबित होता है। जो निवेशक करेक्शन के दौरान बिकवाली करके बाहर निकल जाते हैं, वे लगभग हमेशा वापसी करने में बहुत देर कर देते हैं। नितिन अग्रवाल के मुताबिक, सफल निवेशक वे नहीं होते जो बाजार के सबसे निचले स्तर का सटीक अनुमान लगाते हैं, बल्कि वे होते हैं जो घबराहट में महंगी गलतियां करने से बचते हैं।

छुट्टी का लंबा सप्ताहांत और रणनीतिक समीक्षा का मौका

गांधी जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहेगा। इसके चलते निवेशकों को तीन दिन का लंबा सप्ताहांत मिलेगा, जिसमें वे बिना किसी कारोबारी हलचल के अपने पोर्टफोलियो की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर सकते हैं और अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं की जांच कर सकते हैं। शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग अब सोमवार, 5 अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी।

सवाल-जवाब

निफ्टी 50 अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से कितना गिर चुका है?
निफ्टी 50 जनवरी 2026 के अपने 26,373.20 के रिकॉर्ड इंट्राडे उच्च स्तर से लगभग 15 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
गुरुवार 1 अक्टूबर को बाजार पूंजीकरण को कितना नुकसान हुआ?
1 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली के दौरान निवेशकों के लगभग 8.7 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण इंट्राडे स्वाहा हो गया।
क्या बाजार गिरावट के समय एसआईपी बंद कर देनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के समय एसआईपी बंद करना सबसे नुकसानदेह फैसला है, क्योंकि इस दौर में रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग के जरिए कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।
2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कितनी बिकवाली की है?
साल 2026 के पहले नौ महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.50 ट्रिलियन रुपये की निकासी की है।
गांधी जयंती के बाद शेयर बाजार में कारोबार कब शुरू होगा?
शुक्रवार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की छुट्टी के बाद शेयर बाजारों में सामान्य ट्रेडिंग सोमवार 5 अक्टूबर से शुरू होगी।
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