हॉलीवुड स्टार ब्रैड पिट की नई सर्वाइवल एडवेंचर फिल्म हार्ट ऑफ द बीस्ट का यह हार्ट ऑफ द बीस्ट रिव्यू एक अनोखे रिश्ते की पड़ताल करता है। कहानी की शुरुआत में ही निर्देशक डेविड आयर दर्शकों को एक तरह से आश्वस्त कर देते हैं कि जिस कुत्ते की दास्तान पर्दे पर दिखाई जाने वाली है, वह हर मुश्किल से बच निकलेगा। फिल्म अपने शुरुआती दृश्यों में ही यह स्पष्ट कर देती है कि वह जानवर पूरी तरह सुरक्षित है। इसके बावजूद अगले 100 मिनट तक चलने वाली यह थ्रिलर दर्शकों को लगातार इस चिंता और तनाव में बांधे रखती है कि कहीं आगे कोई अनहोनी न घट जाए।
अलास्का की वीरान वादियों में जिंदगी की जंग
फिल्म की पटकथा की शुरुआत एक सुनसान सड़क पर अकेले खड़े ओडिन नाम के जर्मन शेफर्ड से होती है, जिसका किरदार उबर नाम के श्वान ने निभाया है। जब एक वैन उसके नजदीक पहुंचती है और उसका चालक उससे मिलने आगे बढ़ता है, तभी कहानी एक हफ्ते पीछे चली जाती है। यहां दर्शक देखते हैं कि ओडिन एक छोटे विमान के कॉकपिट में अपने मालिक जेम्स के बगल में बैठा है। जेम्स का किरदार ब्रैड पिट ने निभाया है, जो अलास्का के बर्फीले और बीहड़ पहाड़ों में कैंपिंग के लिए उड़ान भर रहे हैं। जेम्स अमेरिकी सेना के स्पेशल फोर्सेज से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और ओडिन उनका रिटायर हो चुका सैन्य श्वान है। दोनों पहले भी ऐसी यात्राएं करते रहे हैं और इन कठिन परिस्थितियों के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित हैं।
सैन्य सेवा छोड़ने के बाद जेम्स के शरीर और मन पर कई गहरे जख्म हैं, जिसके चलते वह एकांत में रहना पसंद करते हैं। दूसरी ओर, ओडिन भी युद्ध की विभीषिका झेल चुका है, जिसका एक पैर कृत्रिम यानी प्रोस्थेटिक है और वह पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के कारण बुरे सपनों से जूझता है। ये दोनों केवल साथी नहीं बल्कि गहरे दोस्त हैं। घर लौटते वक्त जेम्स को अचानक दिल का दौरा पड़ता है, जिसके चलते उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। दोनों सभ्यता से कोसों दूर एक अनजान और वीरान जगह पर फंस जाते हैं, जहां जिंदा रहने के लिए वे पूरी तरह एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
थ्रिलर और भावनाओं का बेहतरीन संतुलन
इस हादसे के बाद फिल्म जानी-पहचानी दिशा में आगे बढ़ती है, जहां जेम्स और ओडिन उफनती नदियों, जंगली जानवरों और खतरनाक ढलानों से एक-दूसरे की जान बचाते नजर आते हैं। हालांकि कहानी की यह राह काफी हद तक अनुमानित है, लेकिन यह फिल्म की कमजोरी नहीं बनती। फिल्म अपने हर दृश्य के साथ भावनात्मक असर पैदा करती है और दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है।
निर्देशक डेविड आयर ने इससे पहले कई एक्शन से भरपूर फिल्में बनाई हैं, जिनमें जेसन स्टेथम की फिल्में भी शामिल हैं। वे एक मजबूत एडवेंचर थ्रिलर गढ़ने में माहिर हैं और इस बार उन्होंने एक्शन के बीच भावनात्मक पलों को भी खूबसूरती से उभारा है। कैमरन अलेक्जेंडर द्वारा लिखी गई पटकथा दोनों किरदारों के बीच बहादुरी को बराबरी से बांटती है। जब जेम्स को दिल का दौरा पड़ता है, तो ओडिन उन्हें होश में लाने का भरसक प्रयास करता है, वहीं क्रैश के बाद जेम्स घायल ओडिन की देखभाल करते हैं। यह केवल एक वफादार जानवर की कहानी नहीं है, बल्कि दोनों ओर से एक-दूसरे की रक्षा करने का एक गहरा बंधन है।
कलाकारों का अभिनय और निर्देशन की बारीकियां
फिल्म में जे.के. सिमंस की भी एक संक्षिप्त भूमिका है, जो एक अन्य साहसी खोजी के रूप में सामने आते हैं और कहानी के कुछ पहलुओं को स्पष्ट करते हैं। उनके अलावा एक अन्य संक्षिप्त सहयोगी किरदार भी है, लेकिन पूरी फिल्म मुख्य रूप से केवल दो ही किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। एक तरह से यह इंसान और कुत्ते के बीच का दोतरफा सफर है। ब्रैड पिट ने अकेले संवाद बोलते हुए भी एक बेहद जीवंत और संवेदनशील संबंध पर्दे पर उतारा है। दूसरी ओर, उबर के हाव-भाव को इस तरह से संपादित किया गया है जिससे लगता है कि श्वान वास्तव में सोच-विचार कर रहा है।
डेविड आयर ने केवल एक-दो मौकों पर ही श्वान के मानवीयकरण की अति की है, विशेष रूप से कुत्ते के बुरे सपने वाला दृश्य थोड़ा अजीब लगता है। इसके बावजूद वे कहानी में आवश्यक मासूमियत और आकर्षण बनाए रखने में सफल रहे हैं। हालांकि दर्शक पहले से जानते हैं कि अंत में क्या होने वाला है, फिर भी निर्देशक ऐसा सस्पेंस पैदा करते हैं कि दर्शक लगातार दोनों के लिए दुआएं मांगते रहते हैं। जानवरों से लगाव रखने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म आंसुओं से भरी और बेहद मार्मिक साबित होती है।


















