किसी ऐसे देश की जटिल और गहरी दास्तान को पर्दे पर उतारना जो आज भी अपने अतीत के साए से जूझ रहा है, अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है। स्पेन के लोकप्रिय लेखन और निर्देशन करने वाले जोड़े लॉस हाविस यानी हावियर काल्वो और हावियर एंब्रोसी ने इस मुश्किल काम को बेहद संवेदनशीलता के साथ पूरा किया है। उनकी यह फिल्म सीधे दर्शकों के दिलों को छूती है और उन्हें व्यक्तिगत, राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर झकझोर कर रख देती है। ला बोला नेग्रा रिव्यू (2026) के इस दौर में यह फिल्म अपनी एक अलग और खास पहचान बनाती है, जो दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है।
अलग-अलग कालखंडों और किरदारों की बुनी गई दास्तान
यह कहानी मुख्य रूप से तीन अलग-अलग सालों यानी 1932, 1937 और 2017 के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में तीन समलैंगिक पुरुषों की जिंदगियों को दिखाया गया है, जिनके बीच का रिश्ता लगभग तीन घंटे लंबे इस सफर के काफी आगे बढ़ने पर जाकर पूरी तरह साफ होता है। साल 1932 वाले हिस्से में कार्लोस की कहानी है, जिसे मिलो क्विफेस ने निभाया है। वह ग्रेनेडा के एक खास क्लब की सदस्यता पाना चाहता है, लेकिन उसकी समलैंगिकता को लेकर समाज में तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें उड़ रही हैं। इसके बाद स्पेनिश गृहयुद्ध के दौर में हमारी मुलाकात सेबस्टियन से होती है, जो इस फिल्म की असली धड़कन साबित होते हैं। बार्सिलोना के संगीतकार गिटारिकाडेलफुएंटे इस फिल्म के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं और पहले ही प्रयास में उनका काम बेहद शानदार और दिल जीतने वाला है। फिल्म के लिए उनके द्वारा गाया गया ओरिजिनल गाना 'ला निएवे' एक परीकथा जैसी अद्भुत अनुभूति कराता है।
सिनेमा प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक संदर्भों का अनूठा मेल
इस कहानी की कड़ियां तब आपस में जुड़ती हैं जब अल्बर्टो की एंट्री होती है, जिसे कार्लोस गोंजालेज ने पर्दे पर उतारा है। अल्बर्टो एक पूर्व नाटककार और इतिहासकार है, जिसे एक रहस्यमयी खत मिलने के बाद अपने ही परिवार के इतिहास को खंगालने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसके बाद जो वाकया सामने आता है, वह बेहद असरदार और काव्यात्मक गाथा है। यह फिल्म इस बात को बहुत अच्छे से समझती है कि कैसे व्यक्तिगत इच्छाएं किसी देश की कला और उसके भाग्य दोनों को नया आकार देती हैं। लॉस हाविस सिनेमा के बहुत बड़े प्रेमी हैं, और उनकी फिल्म में Apocalypse Now से लेकर Come And See और Titanic तक कई क्लासिक फिल्मों के प्रभाव साफ झलकते हैं। वे इतिहास, नाटक और शुद्ध मनोरंजन के बीच एक बहुत बारीक संतुलन बनाते हैं।
दिग्गज कलाकारों का अभिनय और भावनात्मक अंत
फिल्म में पेनेलोप क्रूज़ और ग्लेन क्लोज जैसे दिग्गज कलाकारों की छोटी लेकिन बेहद सधी हुई और उद्देश्यपूर्ण भूमिकाएं देखने को मिलती हैं। हालांकि, फिल्म की अत्यधिक गंभीरता कई बार दर्शकों को थोड़ी असहज महसूस करा सकती है। इसकी कहानी के सभी हिस्से अंत में इतने करीने से जुड़ जाते हैं कि वे कई अन्य ऐतिहासिक महाकाव्यों की बेकाबू जटिलता के मुकाबले थोड़े कृत्रिम लग सकते हैं। इसके बावजूद, जब फिल्म अपने चरम और अत्यधिक भावनात्मक पड़ाव पर पहुंचती है, तो इसकी सुंदरता और गहराई का अहसास पूरी शिद्दत के साथ दिल पर असर छोड़ता है।
























