फिल्ममेकर्स जॉन लुकास और स्कॉट मूर की नई रिलीज पर नजर डालें तो स्पा वीकेंड रिव्यू यह साफ कर देता है कि लेखक-निर्देशक की यह जोड़ी अब भी अपने डेढ़ दशक पुराने फॉर्मूले से बाहर नहीं निकल पाई है। वर्ष 2009 में आई द हैंगओवर की मूल पटकथा लिखकर प्रसिद्धि पाने वाली इस जोड़ी ने एक ऐसा सांचा तैयार किया था, जिसमें तीन दोस्त किसी अजीब साथी के साथ मिलकर बेतहाशा शराब पीते हैं और अराजकता फैलाते हैं। इसके बाद उन्होंने 21 एंड ओवर में 21वें जन्मदिन के बहाने, बैड मॉम्स में तनावग्रस्त माताओं के जरिए और ए बैड मॉम्स क्रिसमस में त्योहार के दौरान इसी नुस्खे को बार-बार दोहराया। अब वही घिसा-पिटा ढांचा एक बार फिर पर्दे पर लाया गया है।
कहानी की रूपरेखा और मुख्य किरदार
फिल्म की बुनियादी कहानी बेहद औपचारिक और सतही है। चालीस के दशक में पहुंच चुकीं बचपन की तीन सहेलियां इस बात से परेशान हैं कि वे अब एक-दूसरे के साथ समय नहीं बिता पातीं। इनमें जेक नाम की एक वकील और सिंगल मदर का किरदार लेस्ली मान ने निभाया है, जबकि एना फारिस मेहनती सोफी और मिशेल बुटो गुस्सैल तलाकशुदा कोको के रूप में नजर आती हैं। अचानक बने एक प्लान के तहत वे एक लग्जरी रिजॉर्ट में छुट्टी बिताने का फैसला करती हैं, जिसकी मालकिन एक अजीबोगरीब अंग्रेजी लहजे में बात करती है। परेशानी तब शुरू होती है जब वे गलती से अपनी पुरानी ऑस्ट्रेलियाई दोस्त मेल यानी इसला फिशर को भी न्योता भेज बैठती हैं, जो वहां पहुंचकर पूरे माहौल को भारी उथल-पुथल में बदल देती है।
घिसी-पिटी सोच और कमजोर हास्य
पटकथा में महिलाओं की पसंद को लेकर बेहद संकुचित और पुराने दौर की सोच दिखाई गई है। फिल्म यह मानकर चलती है कि महिलाओं के सुकून का मतलब केवल मेल स्ट्रिपर्स, मड बाथ, ध्यान साधना और भद्दी हरकतें ही हो सकता है। एडम डिमॉस द्वारा निभाया गया योग प्रशिक्षक काई का किरदार नब्बे के दशक के रोमांटिक फॉर्मूलों की याद दिलाता है। एब्स और बालों के स्टाइल के साथ तैयार किया गया यह चरित्र आज के दौर में बिल्कुल अप्रासंगिक लगता है। हास्य पैदा करने के नाम पर लिखे गए दृश्य दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह नाकाम साबित होते हैं।
इसला फिशर का असहज करने वाला किरदार
द हैंगओवर में जैक गैलिफियानाकिस द्वारा निभाए गए एलन के किरदार की तर्ज पर यहां मेल का चरित्र गढ़ा गया है, लेकिन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। एलन अपनी बेवकूफी में भी मासूम और मनोरंजक लगता था, जबकि मेल का बर्ताव बेहद आक्रामक और चिड़चिड़ा करने वाला है। आत्म-जागरूकता से पूरी तरह महरूम यह किरदार केवल तबाही मचाने के मकसद से गढ़ा हुआ दिखता है। गोल्फ बग्गी को बेतरतीब चलाना, रिजॉर्ट में बकरियों को खुला छोड़ देना या ध्यान सत्र के दौरान तेज आवाजें निकालना जैसी हरकतें जबरन ठूंसी हुई लगती हैं। सबसे अजीब बात यह है कि उसके इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को बाकी सहेलियां बिना किसी ठोस वजह के तुरंत माफ भी कर देती हैं।
कलाकारों का अभिनय और अंतिम निष्कर्ष
इस बेहद कमजोर और लचर पटकथा के बावजूद लेस्ली मान, एना फारिस, मिशेल बुटो और इसला फिशर जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियां अपनी कॉमिक टाइमिंग से कुछ पलों में जान फूंकने की कोशिश करती हैं। सिनेमाघरों में किसी बड़े स्टूडियो द्वारा पूरी तरह महिला कलाकारों पर केंद्रित कॉमेडी फिल्म रिलीज करना अपने आप में एक स्वागत योग्य कदम है, और महिलाओं को भी पुरुषों की तरह पर्दे पर बेबाक और अराजक दिखने का पूरा हक है। लेकिन इस तरह की कहानियों को सही मायने में रोचक बनाने के लिए अगली बार इन दोनों निर्देशकों के बजाय किसी नए नजरिए वाले लेखक और निर्देशक की जरूरत महसूस होती है।



















