फिल्म बैड एप्पल्स का रिव्यू (2026) करते हुए यह साफ नजर आता है कि एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की जिंदगी कितनी तनावपूर्ण हो सकती है। स्वीडिश फिल्म निर्माता जोनातन एट्ज़लर ने अपनी पहली अंग्रेजी फीचर फिल्म के जरिए ब्रिटेन की स्कूली व्यवस्था पर एक तीखा और मनोरंजक व्यंग्य कसा है। कहानी के केंद्र में मारिया नाम की एक निष्ठावान शिक्षिका है, जिसका किरदार साओर्से रोनन ने निभाया है। मारिया बच्चों का भविष्य संवारने का सपना देखती है, लेकिन उसकी पूरी ऊर्जा और समय डैनी नाम के एक बेहद हिंसक और अनियंत्रित छात्र को संभालने में ही खत्म हो जाता है। डैनी की लगातार हरकतों और गुस्से के कारण पूरी क्लास अव्यवस्था की गिरफ्त में रहती है, जिससे बाकी बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ता है।
सिस्टम की अनदेखी और तनावपूर्ण माहौल
कक्षा में लगातार बढ़ते तनाव के बीच मारिया को स्कूल प्रशासन से कोई सहारा नहीं मिलता। स्कूल का हेडटीचर उसकी रोजमर्रा की परेशानियों को नजरअंदाज करता है, जबकि दखलअंदाजी करने वाले अभिभावक शिक्षकों के हर छोटे-बड़े फैसले पर सवाल खड़े करते हैं। स्थिति तब बेहद गंभीर रूप ले लेती है जब डैनी से जुड़े एक हिंसक झगड़े में एक दूसरे छात्र की हड्डी टूट जाती है। इस हादसे के बाद व्यवस्था की लाचारी देखकर मारिया ऐसा कदम उठाने का फैसला करती है जिसकी कोई भी सामान्य पाठ्यचर्या इजाजत नहीं दे सकती।
तहखाने में विशेष क्लास और अप्रत्याशित राहत
डैनी के आतंक से आजिज आकर मारिया उसे अपने घर के अंधेरे तहखाने में बंद कर देती है, ताकि उसे अकेले में खास तरीके से सुधारा जा सके। यह कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ है, लेकिन असली विडंबना इसके बाद सामने आती है। जब डैनी स्कूल नहीं पहुंचता, तो बाकी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में कोई घबराहट नहीं होती, बल्कि सभी चैन की सांस लेते हैं। पूरा कस्बा उस बच्चे के अचानक गायब होने पर सवाल उठाने के बजाय खामोश रहना पसंद करता है, जिससे समाज की गहरी संवेदनहीनता उजागर होती है।
स्क्रीनप्ले और कॉमेडी का संतुलन
पटकथा लेखक जेस ओ'केन ने कहानी को बेहद चुटीले और धारदार अंदाज में लिखा है। फिल्म की शुरुआत एक सेब तोड़ने वाले प्लांट के दृश्य से होती है, जो इस पुरानी कहावत की ओर इशारा करती है कि एक सड़ा हुआ सेब पूरी टोकरी को खराब कर देता है। हालांकि यह रूपक बहुत सीधा लगता है, लेकिन कहानी के भीतर छिपा गहरा व्यंग्य और हास्य दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। यह एक ऐसी प्रफुल्लित करने वाली कॉमेडी है जो अपनी सीमाओं को लांघकर दर्शकों को हंसाने का दम रखती है।
कलाकारों का बेहतरीन अभिनय
फिल्म के तीसरे हिस्से में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो तर्क की सीमाओं को चुनौती देते हैं, लेकिन साओर्से रोनन का संवेदनशील अभिनय पूरी कहानी को हकीकत से जोड़े रखता है। रोनन के बारे में एक समीक्षक ने कहा कि इन दिनों उन्हें ऐतिहासिक परिधानों से बाहर देखना दुर्लभ है, और उन्हें हास्य भूमिका में देखना काफी ताज़ा और रोमांचक लगता है। रोनन के भीतर की हताशा और बेबसी साफ झलकती है, फिर भी उनके किरदार के प्रति सहानुभूति बनी रहती है क्योंकि वह अपने छात्रों का भला चाहती हैं। बाल कलाकार एडी वॉलर ने डैनी के रूप में खौफनाक लेकिन भीतर से कोमल बच्चे का किरदार बखूबी निभाया है। वहीं निया ब्राउन ने पॉलीन नाम की होनहार छात्रा के रोल में बेहतरीन काम किया है, जिसकी अति-उत्साही आदतें मारिया की योजनाओं को बिगाड़ने का खतरा पैदा करती हैं।



















