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तुएनसांग में लगातार बारिश और भूस्खलन से गिरा डीटीओ भवन, पहले ही खाली कराने से बची जानेंनागालैंड
27 अग॰ 2026, 1:21 pm (1 घंटे पहले)· 2

तुएनसांग में लगातार बारिश और भूस्खलन से गिरा डीटीओ भवन, पहले ही खाली कराने से बची जानें

नगालैंड के तुएनसांग जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूधंसाव के कारण जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) की इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई। समय रहते इमारत खाली करा लेने से एक बड़ा हादसा टल गया।

नगालैंड के तुएनसांग जिले में मूसलाधार मानसून बारिश के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसी क्रम में गुरुवार सुबह पोस्ट ऑफिस वार्ड स्थित जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) की पूरी इमारत भूस्खलन की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो गई। राहत की बात यह रही कि जिला प्रशासन ने पहले ही इस ढांचे के ढहने की आशंका को देखते हुए इसे खाली करा लिया था, जिससे किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई।

खतरे को देखते हुए जारी हुआ था आपात्कालीन आदेश

इमारत के गिरने की घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि भारी बारिश के चलते इसके ढांचे को पहले ही अत्यधिक नुकसान पहुंच चुका था। 23 जुलाई 2026 को तुएनसांग की उपायुक्त और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अध्यक्ष लिथ्रोंगला टोंगपी रुत्सा ने एक विस्तृत ढांचागत और तकनीकी आकलन के बाद आपात्कालीन डिमोलिशन आदेश जारी किया था। इस जांच में स्पष्ट पाया गया था कि लगातार हो रही बारिश ने इमारत की नींव और दीवारों को असुरक्षित बना दिया है।

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आदेश का पालन करते हुए 24 जुलाई से ही डीटीओ कार्यालय को अगले आदेश तक के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इस बंदी के कारण वाहन से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण सेवाएं रोक दी गई थीं। इनमें नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, वाहनों का पंजीकरण, कर संग्रहण और परमिट संबंधी सभी प्रशासनिक कार्य शामिल थे। प्रशासन के इस त्वरित कदम से वहां काम करने वाले कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।

प्रतिदिन 6 से 8 इंच धंस रही थी जमीन

डीटीओ परिसर और उसके आसपास के इलाके में स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई थी। आधिकारिक सर्वेक्षणों और आकलन के अनुसार, डीटीओ क्षेत्र के आसपास की जमीन रोजाना लगभग 6 से 8 इंच की गति से नीचे धंस रही थी। जमीन के इस लगातार खिसकने और धंसने की वजह से आसपास की अन्य संरचनाओं और रिहाइशी मकानों पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा था।

खतरे को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी आवास) के तहत आपदा प्रतिक्रिया बल को आपात्कालीन डिमोलिशन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। जिस समय जमीन धंसने की प्रक्रिया जारी थी, उसी दौरान असुरक्षित ढांचे को नियंत्रित तरीके से ध्वस्त करने का कार्य चल रहा था। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए प्रशासन ने आम जनता और अनधिकृत व्यक्तियों के उस क्षेत्र में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले भी प्रभावित क्षेत्र में दो अन्य खतरनाक इमारतों को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका था।

49 परिवारों की निकासी और राहत कार्य

नगालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनएसडीएमए) द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, 19 जुलाई से चलाए जा रहे बचाव अभियान के तहत अब तक कुल 49 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। इन विस्थापित परिवारों में से 44 परिवार सीधे डीटीओ भवन के ठीक नीचे स्थित निचले इलाकों में रह रहे थे, जबकि 5 परिवार पोस्ट ऑफिस वार्ड और बाज़ार ए वार्ड के प्रभावित हिस्सों से थे।

विस्थापित हुए लोगों को आश्रय देने के लिए तुएनसांग टाउन हॉल में आपात्कालीन राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में प्रभावित परिवारों को भोजन, सुरक्षित रहने की जगह और अन्य जरूरी सहायता मुहैया कराई जा रही है। तुएनसांग में मानसून के कारण व्यापक नुकसान हुआ है, जहां लगातार भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है।

सवाल-जवाब

तुएनसांग में डीटीओ भवन क्यों गिर गया?
लगातार मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन और रोजाना 6 से 8 इंच जमीन धंसने से इमारत की नींव कमजोर हो गई और वह ढह गई।
क्या इस घटना में कोई हताहत हुआ है?
नहीं, जिला प्रशासन ने इमारत को पहले ही असुरक्षित घोषित कर 24 जुलाई से खाली करा लिया था, इसलिए हादसे में कोई घायल या हताहत नहीं हुआ।
डीटीओ कार्यालय बंद होने से कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित हुई हैं?
डीटीओ बंद होने से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, वाहन पंजीकरण, टैक्स संग्रह और वाहनों के परमिट संबंधी सभी सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।
प्रभावित क्षेत्र से कितने लोगों को निकाला गया है?
एनएसडीएमए के अनुसार 19 जुलाई से अब तक 49 परिवारों को निकाला गया है, जिनमें से 44 परिवार डीटीओ भवन के नीचे के इलाके में रह रहे थे।
विस्थापित परिवारों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
प्रभावित परिवारों को ठहराने और आपातकालीन सहायता प्रदान करने के लिए तुएनसांग टाउन हॉल में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 मिनट पहले

तुएनसांग की इस घटना से प्रशासनिक सतर्कता और आपदा प्रबंधन की सक्रियता का स्पष्ट प्रमाण मिलता है। समय पर जारी किए गए आपात्कालीन डिमोलिशन आदेश और 49 परिवारों की सुरक्षित निकासी ने एक बड़ी मानवीय त्रासदी को टाल दिया। हालांकि, प्रतिदिन छह से आठ इंच की दर से हो रहा भूधंसाव इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में भू-तकनीकी और संरचनात्मक सुरक्षा की एक दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े प्रशासनिक और आवासीय नुकसान को रोका जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·58 मिनट पहले

यह घटना न केवल पूर्वोत्तर राज्यों में भारी मानसूनी बारिश के बढ़ते भू-जोखिम को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित भौगोलिक दबाव पहाड़ी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहे हैं। जिला प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन अब केंद्र और राज्य स्तर पर ऐसी भू-तकनीकी रणनीतियों की सख्त जरूरत है जो इस तरह के भूधंसाव से स्थायी रूप से निपट सकें।

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