देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर मंतर पर 20 जुलाई 2026 को आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस राजनीतिक और सुरक्षात्मक विवाद को तब नया मोड़ मिला जब प्रदर्शन में शामिल 25 वर्षीय युवा शेख इरशाद मंसूरी की चिकित्सीय जांच से जुड़ा दस्तावेज सार्वजनिक हुआ। इस मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने शल्य चिकित्सा यानी सर्जरी के जरिए पीड़ित के चेहरे और गर्दन के प्रभावित हिस्सों से धातु के कण अर्थात छर्रे बाहर निकाले हैं। हालांकि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन चलाए जाने के दावों का लगातार खंडन किया जा रहा है, लेकिन अस्पताल के इस नए खुलासे के बाद प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के आरोपों को काफी बल मिलता दिख रहा है।
चिकित्सीय रिपोर्ट और छर्रे निकलने का दावा
संसद मार्ग के निकट हुए इस उग्र प्रदर्शन के बाद 25 साल के प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी को गंभीर अवस्था में नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने मंसूरी के चेहरे और गर्दन पर लगी गंभीर चोटों की जांच की और आपातकालीन ऑपरेशन का फैसला लिया। सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने उनके शरीर के भीतर गहराई में धंसे हुए मेटलिक फॉरेन बॉडीज यानी धातु के बाहरी कणों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। सर्जरी संपन्न होने के बाद डॉक्टरों ने निकाले गए इन धातु के छर्रों को फोरेंसिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है।
यद्यपि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है कि ये धातु के कण किस विशिष्ट हथियार से दागे गए थे या इन्हें चलाने के लिए कौन जिम्मेदार था, लेकिन इलाज करने वाले डॉक्टरों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जख्मों की प्रकृति पेलेट जैसे घातक गोला-बारूद के प्रयोग की ओर ही इशारा करती है। इस मेडिकल दस्तावेज के सामने आने के बाद आंदोलनकारी समूहों ने अपने इस दावे को दोहराया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर प्रतिबंधित या अत्यधिक घातक हथियारों का प्रयोग किया गया था।
घटनाक्रम और पीड़ित की आपबीती
पीड़ित प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी ने घटना वाले दिन का ब्योरा देते हुए बताया कि 20 जुलाई 2026 को जब संसद भवन की तरफ मार्च निकाला जा रहा था, तब उन्होंने एक सुरक्षाकर्मी को अपनी ओर सीधे हथियार तानते हुए देखा था। खुद को संभावित खतरे से बचाने के लिए वे तुरंत पीछे मुड़े और भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन उसी क्षण एक तेज धमाके जैसी वस्तु उनके चेहरे और गर्दन से आ टकराई। इसके बाद वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में हुई जटिल सर्जरी के पश्चात हालांकि मंसूरी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, लेकिन उनके चेहरे पर अब भी गहरे जख्म और चोट के स्पष्ट निशान मौजूद हैं।
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के झंडे तले सैकड़ों युवा और छात्र अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। स्थिति को बेकाबू होते देख वहां तैनात दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए। इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार झड़प हुई, जिसमें कई आंदोलनकारी गंभीर रूप से जख्मी हो गए। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन का दावा है कि उग्र भीड़ को संभालने की कोशिश में उनके भी कई अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए थे। पिछले कुछ दिनों के भीतर कई अन्य चोटिल प्रदर्शनकारियों ने भी अपने मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं, जिनमें शरीर में धातु के कण मिलने और 'पैलेट इंजरी मार्क्स' का जिक्र होने की बात कही गई है।
सरकार और पुलिस का रुख तथा कानूनी लड़ाई
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन या किसी भी प्रकार की गोलीबारी की बात से साफ इनकार किया है। सरकार की ओर से संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में आधिकारिक बयान जारी कर यह स्पष्ट किया गया कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने केवल मानक भीड़-नियंत्रण नियमावली का पालन किया था। सरकारी वक्तव्य के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए केवल आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया था और किसी भी प्रदर्शनकारी पर गोलियां या पैलेट नहीं चलाए गए थे।
सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के इस मामले की गूंज अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के बाद शेख इरशाद मंसूरी सहित कई पीड़ितों ने उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं में सुरक्षा बलों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। नई मेडिकल रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अब सभी की नजरें उच्चतम न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई और इस मामले में होने वाली आधिकारिक जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।



















