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आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा तंत्र में तेजी जरूरी: सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने दिया BUILD मंत्रभारत
24 सित॰ 2026, 3:25 pm (7 दिन पहले)· 5

आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा तंत्र में तेजी जरूरी: सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने दिया BUILD मंत्र

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने रक्षा प्रक्रियाओं की धीमी गति पर सतर्क करते हुए सैन्य सुधारों और आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने भविष्य के युद्धों के लिए BUILD फ्रेमवर्क पेश किया।

आधुनिक दौर में सैन्य रणनीतियों और युद्धकला के तौर-तरीकों में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने इस बात पर जोर दिया है कि सुरक्षा तंत्र और रक्षा प्रक्रियाओं को इस बदलाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। एक रक्षा सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में सीडीएस ने स्पष्ट रूप से आगाह किया कि युद्ध का चरित्र जितनी तेजी से बदल रहा है, हमारी अनुकूलन क्षमता यानी ढलने की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए देश की रक्षा तैयारियों और प्रक्रियाओं को कहीं अधिक रफ्तार से अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है।

धीमी प्रक्रियाओं को छोड़कर नए सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता

जनरल सुब्रमणि ने भविष्य के सैन्य परिदृश्य पर अपने विचार रखते हुए कहा कि पुरानी और धीमी कार्यप्रणालियों के भरोसे नई जंग नहीं जीती जा सकती। उन्होंने कहा कि तकनीक और कूटनीति के मिश्रण ने पारंपरिक युद्ध के सभी स्थापित नियमों को बदल दिया है। भारतीय सेना और उससे जुड़े सुरक्षा तंत्र को प्रशासनिक या कागजी प्रक्रियाओं की जटिलता से बाहर निकलना होगा। त्वरित निर्णय लेने के साथ-साथ नए जमाने की आधुनिक युद्ध तकनीकों को रक्षा प्रणाली में तेजी से शामिल करना समय की मांग है।

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वैश्विक समीकरणों और तकनीक का सैन्य रणनीतियों पर प्रभाव

मौजूदा समय में दुनिया भू-राजनीतिक, भू-आर्थिक और तकनीकी मोर्चों पर अभूतपूर्व उथल-पुथल की गवाह बन रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहे नए समीकरण अब सीधे तौर पर देशों की सैन्य रणनीतियों को प्रभावित कर रहे हैं। सीडीएस के अनुसार, तकनीक के व्यापक विस्तार ने युद्ध क्षेत्र के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलते माहौल में वही देश बढ़त हासिल करेगा जो अपनी सैन्य प्रक्रियाओं और रणनीतियों को सबसे तेज गति से अपडेट करने में सक्षम होगा।

सीडीएस का 'BUILD' सुरक्षा मंत्र

आधुनिक युद्धकला को आकार देने वाले मुख्य रुझानों को समझाने के लिए जनरल राजा सुब्रमणि ने 'BUILD' शब्द का विशेष खाका पेश किया। उन्होंने इसके पांचों अक्षरों के जरिए पांच महत्वपूर्ण रुझानों को रेखांकित किया

  • B (Badtilay Yuddhkshetra): पहला अक्षर बदलते युद्धक्षेत्र के स्वरूप को दर्शाता है, जो हर पल नया आकार ले रहा है।
  • U (Unpredictable War Economy): दूसरा अक्षर युद्ध की बदलती और अनिश्चित अर्थव्यवस्था को निरूपित करता है।
  • I (Integration of Tech & Data): तीसरा बिंदु आधुनिक युद्ध में तकनीक और डेटा के एकीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है, जो जीत तय करने में निर्णायक साबित हो रहा है।
  • L (Learning Capability): चौथा बिंदु निरंतर सीखने और खुद को ढालने की क्षमता पर केंद्रित है, जो भविष्य की जंग के लिए बेहद जरूरी है।
  • D (Delivery at Scale): अंतिम बिंदु बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधनों की डिलीवरी यानी आपूर्ति क्षमता को दर्शाता है, जो किसी भी देश की रणनीतिक सहनशक्ति तय करती है।

सवाल-जवाब

सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने किस मुख्य मुद्दे पर चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध का स्वरूप बदलने की रफ्तार हमारी अनुकूलन क्षमता से अधिक तेज है, इसलिए रक्षा तंत्र को तेजी से अपग्रेड करना होगा।
सीडीएस द्वारा दिया गया 'BUILD' मंत्र क्या है?
BUILD का मतलब Battlefield (बदलते युद्धक्षेत्र), Unpredictable Economy (युद्ध अर्थव्यवस्था), Integration (तकनीक-डेटा एकीकरण), Learning (सीखने की क्षमता) और Delivery (बड़े पैमाने पर आपूर्ति क्षमता) से है।
आधुनिक युद्ध में सफलता के लिए सीडीएस ने क्या जरूरी बताया?
उन्होंने धीमी कागजी प्रक्रियाओं को छोड़कर त्वरित फैसले लेने और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने को जरूरी बताया।
युद्ध में बढ़त हासिल करने के लिए क्या आवश्यक है?
बढ़त वही देश बनाएगा जो अपनी सैन्य प्रक्रियाओं और रणनीतियों को सबसे तेज गति से अपडेट करेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·6 दिन पहले

जनरल सुब्रमणि का यह कहना बिल्कुल सही है कि पुरानी और धीमी कागजी प्रक्रियाओं के भरोसे अब काम नहीं चलने वाला। जब तक डिफेंस सिस्टम खुद तेज नहीं होगा, तकनीक का कोई फायदा नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

लाल फीताशाही और कागजी कार्रवाई हमारी सुरक्षा तैयारियों में हमेशा से बड़ी रुकावट रही है, जिसे सीडीएस ने भी माना है। लेकिन सवाल यह है कि इस सुस्त सिस्टम को रातों-रात बदलने के लिए सरकार के पास आखिर क्या ठोस प्लान है?

Neha Verma@neha-verma·6 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है। जब मैं पिछले साल एक डिफेंस इवेंट में गई थी, तब भी यही चर्चा थी कि लाल फीताशाही कैसे सब धीमा कर देती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

लाल फीताशाही और कागजी कार्रवाई हमारी सुरक्षा तैयारियों में हमेशा से बड़ी रुकावट रहे हैं। जब अपराधी और विदेशी ताकतें आधुनिक तकनीक अपना रही हैं, तो हमारी रक्षा खरीद और फैसले भी उसी रफ्तार से होने चाहिए, वरना किसी बड़े संकट के वक्त भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा। जैसे शेयर बाजार और क्रिप्टो में जरा सी देरी से बड़ा नुकसान हो जाता है, वैसे ही रक्षा खरीद में लाल फीताशाही देश के लिए बहुत भारी पड़ सकती है।

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