रायपुर में बीमारी ठीक करने के बहाने महिला से 15 तोला सोना और नकदी ऐंठी, 3 फर्जी साधु फरारदिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट अटकने से पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के 6 सदस्य हुए अचेत, परिसर में फूटा गुस्सावृश्चिक राशिफल 1 अक्टूबर: आर्थिक फैसलों में बरतें संयम, रिश्तों में धैर्य और सुनने की आदत से बनेगी बातअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामअजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंकम सामग्री में घर पर बनाएं छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लाल भाजी और आलू की सूखी सब्जीप्रशांत महासागर में अल नीनो के उभार से कमजोर पड़ा मानसून, 2001 के बाद दर्ज हुई चौथी सबसे सूखी स्थितिबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकाकिसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफर
अमेरिका के न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत, भारत में मुसलमानों के बिना हिंदुत्व अधूराभारत
29 अग॰ 2026, 11:13 pm (32 दिन पहले)· 1

अमेरिका के न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत, भारत में मुसलमानों के बिना हिंदुत्व अधूरा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि विविधता के बावजूद पूरी मानवता एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि देश में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है, तो वह हिंदुत्व की बुनियादी भावना को ही नहीं समझता।

न्यूयॉर्क शहर में आयोजित एक बड़े वैश्विक धर्मगुरु सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने धार्मिक विविधता और मानवीय एकता पर अपनी बात रखी। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में विभिन्न परंपराओं के आध्यात्मिक नेता उपस्थित रहे। अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही उपासना के तौर-तरीके और अनुष्ठान अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन परम सत्य और संपूर्ण मानवता केवल एक ही है।

भारत की प्राचीन वैचारिक परंपरा

अपने विचार रखते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय संस्कृति में यह मान्यता सदियों पुरानी है कि रास्ते भले भिन्न हों, पर मनुष्यता हमेशा से एक ही रही है। उन्होंने कहा कि सत्य केवल एक है और मानवता उसी शाश्वत सत्य की एक जीवंत अभिव्यक्ति है। उनके अनुसार, संघ का मुख्य कर्तव्य पूरी दुनिया में जाकर लोगों को यह याद दिलाना है कि बाहरी भिन्नताओं के बाद भी सारा मानव समाज मूल रूप से एक ही सूत्र में बंधा हुआ है।

ये भी पढ़ें

हिंदुत्व और आपसी सामंजस्य पर रुख

संबोधन के एक अहम हिस्से में उन्होंने हिंदुत्व को लेकर वर्षों पहले उठी एक शंका का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में कुछ मुस्लिम नागरिकों ने उनसे संघ के हिंदू राष्ट्र के स्वरूप को लेकर सीधा सवाल किया था। इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमानों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, तो वह व्यक्ति हिंदुत्व के वास्तविक अर्थ से पूरी तरह अनजान है। उन्होंने समझाया कि भारतीय जीवन-दर्शन के अनुसार सत्य तक पहुँचने के मार्ग अनेक हो सकते हैं, किंतु सबका गंतव्य एक ही होता है।

मानव गरिमा और विविधता का सम्मान

उन्होंने आगे कहा कि इंसानों के बीच किसी भी प्रकार का मौलिक अंतर नहीं होना चाहिए तथा हर नागरिक को पूरे सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ जीने का पूरा अधिकार प्राप्त है। उनके मुताबिक, विभिन्नताओं को खुले दिल से स्वीकार करना और फिर भी आपसी सद्भाव बनाए रखना ही हमारी महान परंपरा की असली पहचान है। धर्म और कर्मकांडों के संबंध में चर्चा करते हुए उन्होंने माना कि आध्यात्मिक यात्रा के शुरुआती चरण में अनुशासन और पूजा-पद्धतियाँ सहायक हो सकती हैं, लेकिन धर्म का अंतिम पड़ाव सत्य की प्राप्ति ही है।

ऐतिहासिक चुनौतियाँ और संवाद की अहमियत

इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश ने अनगिनत बाहरी आक्रमणों और विकट परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया है, फिर भी हमारी सभ्यता ने हमेशा वसुधैव कुटुंबकम का संदेश पूरी दुनिया को दिया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत की धरती पर मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ चलाए जा रहे संवाद कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तो केवल एक शुरुआत है, और इसके साथ-साथ सेवा कार्यों को भी पूरी तन्मयता से चलाया जाना चाहिए।

सेवा कार्य और भ्रांतियों का निवारण

मोहन भागवत ने इस बात का दावा किया कि संघ की ओर से चलाए जाने वाले सेवा अभियानों में कभी किसी प्रकार का पक्षपात नहीं किया जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन के कार्यों को लेकर अक्सर समाज में गलत धारणाएँ और भ्रामक नैरेटिव फैला दिए जाते हैं, लेकिन जब लोग खुद करीब आकर जमीनी हकीकत देखते हैं तो वे भ्रम तुरंत दूर हो जाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संघ प्रचार-प्रसार से दूर रहकर धरातल पर काम करने में अधिक विश्वास रखता है।

राजनीति की भूमिका और जनमत का प्रभाव

अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने समकालीन राजनीति और जनता की राय के अंतर्संबंधों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में राजनेता हमेशा जनभावनाओं से संचालित होते हैं और आम राय के विरुद्ध जाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता। यदि वैश्विक स्तर पर संघर्षों को रोकना है और सकारात्मक बदलाव लाने हैं, तो राजनीतिक तंत्र को भी प्रभावित करना होगा, बशर्ते वह प्रभाव सत्ता के बजाय जनहित के लिए हो। उन्होंने चेताया कि आज की राजनीति में स्वार्थ की भावना बढ़ गई है, जिससे उबरकर हम और हमारा की भावना को अपनाना ही एकमात्र समाधान है।

सवाल-जवाब

मोहन भागवत ने यह सम्मेलन कहाँ संबोधित किया?
उन्होंने न्यूयॉर्क में आयोजित 'एक विश्व: एक मानवता धर्मगुरुओं के सम्मेलन' में यह संबोधन दिया।
हिंदुत्व और मुसलमानों को लेकर मोहन भागवत ने क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है, तो वह हिंदुत्व की मूल भावना को नहीं समझता।
मोहन भागवत ने 2018 की किस घटना का जिक्र किया?
उन्होंने बताया कि 2018 में कुछ मुस्लिम लोगों ने उनसे संघ के हिंदू राष्ट्र के विचार को लेकर सवाल किया था।
भारत में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ संवाद पर उन्होंने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि संवाद पहला कदम है, लेकिन सेवा कार्यों को संवाद के साथ-साथ चलाया जाना चाहिए और इसमें कोई भेदभाव नहीं होता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·32 दिन पहले

यह वक्तव्य वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक कूटनीति और वैचारिक संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जब आरएसएस प्रमुख जैसे वरिष्ठ वैचारिक नेता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समावेशी राष्ट्रवाद और विविधता की बात रखते हैं, तो इसका असर प्रवासी भारतीयों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माण हलकों में वैचारिक बहसों पर पड़ता है। आगे यह देखना होगा कि इस तरह के बयानों से ज़मीनी स्तर पर सामाजिक ताने-बाने और ध्रुवीकरण की राजनीति पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·32 दिन पहले

संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैचारिक और राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। अमेरिका की धरती से दिया गया यह संदेश न केवल वैश्विक स्तर पर हिंदुत्व की एक समावेशी छवि पेश करता है, बल्कि देश के भीतर अल्पसंख्यक समुदायों के साथ संवाद की रणनीति को भी एक नई दिशा देता है। आने वाले समय में इसका सीधा असर घरेलू राजनीतिक समीकरणों और ध्रुवीकरण की बहसों पर पड़ सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर 'हिंदू राष्ट्र' की परिभाषा को लेकर संघ के वैचारिक रुख को स्पष्ट करता है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·32 दिन पहले

अर्जुन मेहता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक मंच से दिया गया यह संदेश कूटनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यधिक संवेदनशील है। पश्चिमी देशों में भारतीय डायस्पोरा और मानवाधिकार संगठनों के बीच भारत के सामाजिक ताने-बाने को लेकर अक्सर बहसें होती हैं। ऐसे में, अमेरिकी जमीन से समावेशी हिंदुत्व और सह-अस्तित्व की बात करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को प्रभावित करने की एक रणनीतिक कूटनीति के रूप में देखा जा सकता है, जिससे प्रवासी भारतीयों के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की वैचारिक छवि और आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। अमेरिका में दिए गए इस संदेश का सीधा असर प्रवासी भारतीयों और वैश्विक मंचों पर भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की बहस पर पड़ेगा। आगामी दिनों में इस बयान से घरेलू राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण और संवाद के नए दौर की शुरुआत होने की पूरी संभावना है, जिस पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के दृष्टिकोण से पैनी नजर रखनी होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

मोहन भागवत का यह बयान वैश्विक स्तर पर भारत के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक समावेशिता के प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत करने वाला है। वैश्विक बिज़नेस और वित्तीय बाजारों में किसी भी देश की स्थिरता और सामाजिक सद्भाव उसके दीर्घकालिक विकास और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए एक महत्वपूर्ण मानक माने जाते हैं। इस तरह के वैचारिक संदेश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की एक उदार और बहुसांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के रूप में ब्रांडिंग को और पुख्ता करते हैं, जिससे कॉर्पोरेट जगत और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सकारात्मक संदेश जाता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp